7 एकड़ में 3 फसलें, लाखों की कमाई: 12वीं पास किसान अनिल भागवत की सफलता की कहानी मध्य प्रदेश 2 महीने पहले 91
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के एक किसान ने मिश्रित खेती के जरिए अपनी किस्मत बदल ली है। 12वीं पास अनिल भागवत अब न केवल खुद लाखों कमा रहे हैं, बल्कि गांव के अन्य लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं।

खेती में नवाचार का कमाल

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के किसान अपनी नई तकनीकों और प्रयोगों के लिए देशभर में जाने जाते हैं। यहाँ के किसानों का अभिनव दृष्टिकोण ही उनकी आय में निरंतर वृद्धि का आधार बन रहा है। आज हम आपको एक ऐसे ही प्रगतिशील किसान की कहानी बताने जा रहे हैं, जो बुरहानपुर जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर स्थित इच्छापुर गांव के रहने वाले हैं। इस किसान का नाम अनिल भागवत है, जिन्होंने 7 एकड़ भूमि पर मिश्रित खेती का मॉडल अपनाकर सफलता की नई इबारत लिखी है।

मिश्रित खेती का सफल मॉडल

अनिल भागवत ने पारंपरिक खेती की लीक से हटकर केला, सोयाबीन, कपास, तुवर, प्याज और विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियों की खेती को अपनाया है। उनका मानना है कि एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय जब अलग-अलग फसलों को एक साथ उगाया जाता है, तो जोखिम कम हो जाता है और लागत में भी कमी आती है। अनिल के इस सफल खेती मॉडल को देखकर गांव के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं, जिसके कारण उन्हें इलाके का मॉडल किसान माना जाता है। उनके इस बेहतरीन कार्य के लिए कृषि विभाग की ओर से उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है।

तकनीक और अनुभव का संगम

अनिल भागवत के अनुसार, खेती की शुरुआत उन्होंने अपने पिता के अनुभवों से सीखी थी। उनके परिवार के लोग पहले केवल केले की पारंपरिक खेती पर निर्भर थे, लेकिन अनिल ने पिछले 15 वर्षों से खेती के तरीकों में बदलाव किया है। वे समय-समय पर कृषि वैज्ञानिकों और स्थानीय कृषि अधिकारियों से मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं। आधुनिक जानकारी के लिए वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूट्यूब की भी भरपूर मदद लेते हैं। यूट्यूब के माध्यम से उन्होंने फसल प्रबंधन और कीट नियंत्रण की बारीकियां सीखी हैं, जिससे उत्पादन लागत को काफी कम करने में सफलता मिली है।

मुनाफा और रोजगार का सृजन

आर्थिक पहलुओं पर बात करते हुए अनिल बताते हैं कि 7 एकड़ भूमि पर खेती करने के लिए उन्हें लगभग 3 से साढ़े तीन लाख रुपये की लागत लगानी पड़ती है। इसके बदले में उन्हें सालाना 4 से 5 लाख रुपये की आय हो जाती है। हालांकि, कभी-कभी केले की फसल को तेज हवाओं या आंधी-तूफान के कारण नुकसान भी झेलना पड़ता है, जिससे कमाई का औसत थोड़ा कम या ज्यादा हो सकता है।

अपनी मेहनत और सफलता के दम पर अनिल अब दूसरों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। वे अपने खेत पर गांव के ही 8 से 10 लोगों को नियमित रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं, जिसमें 6 महिलाएं भी शामिल हैं। उनका भविष्य का लक्ष्य अधिक से अधिक लोगों को काम के अवसर प्रदान करना है।

निष्कर्ष

अनिल भागवत का उदाहरण यह साबित करता है कि अगर सही जानकारी और आधुनिक तकनीकों का सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो खेती भी एक बेहद लाभकारी व्यवसाय बन सकती है। एक साधारण किसान होकर भी उन्होंने जिस तरह से संसाधनों का प्रबंधन किया है और दूसरों को रोजगार दिया है, वह पूरे क्षेत्र के लिए एक मिसाल है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप