पलामू का अनोखा शिव मंदिर: एक ही जगह पर विराजमान हैं 12 ज्योतिर्लिंग, अकाल मृत्यु के भय से मिलती है मुक्ति धर्म 2 घंटे पहले 6
झारखंड के पलामू जिले में स्थित एक मंदिर में सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रतिमूर्ति स्थापित है, जहां सावन के महीने में भक्तों का तांता लगा रहता है। इस स्थान की मान्यता है कि यहां पूजा करने से अकाल मृत्यु का संकट टल जाता है और भक्तों को सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

पलामू में आस्था का अनूठा केंद्र

झारखंड का पलामू जिला एक ऐसे धार्मिक स्थल का गवाह है जो श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है। आमतौर पर देश भर में स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए भक्तों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, लेकिन पलामू में एक ऐसा मंदिर है जहाँ शिव के सभी 12 स्वरूप एक ही परिसर में मौजूद हैं। सावन का पावन महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए विशेष माना जाता है और इस दौरान इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। लोग अपनी सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना लेकर यहाँ पहुंचते हैं।

रेड़मा चौक स्थित भगवती भवन की महिमा

मेदिनीनगर के रेड़मा चौक के पास स्थित भगवती भवन मंदिर बरसों से भक्तों की श्रद्धा का मुख्य केंद्र है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ दक्षिणेश्वर मां काली की प्रतिमा के साथ-साथ भगवान शिव के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियां स्थापित की गई हैं। सावन के दिनों में यहाँ का वातावरण शिवमय हो जाता है और भक्त विधि-विधान से जलाभिषेक कर महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यहाँ आने वाले भक्तों का मानना है कि इस पवित्र स्थान पर आने मात्र से उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

महाकाल की मिट्टी और अकाल मृत्यु का भय

इस मंदिर के मुख्य पुजारी शिबुल पंडित बताते हैं कि यहाँ स्थापित उज्जैन के महाकाल ज्योतिर्लिंग की प्रतिमा विशेष है। इसे स्थापित करने के लिए उज्जैन से विशेष रूप से मिट्टी मंगवाई गई थी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान महाकाल अकाल मृत्यु से अपने भक्तों की रक्षा करने वाले देव माने गए हैं। यही वजह है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ आकर महाकाल की प्रतिमा पर जल अर्पित करते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहाँ श्रद्धा के साथ पूजा करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और व्यक्ति को दीर्घायु तथा जीवन में सुख-शांति का आशीर्वाद मिलता है।

60 साल पुरानी परंपरा और स्थापना

भगवती भवन में द्वादश ज्योतिर्लिंगों की स्थापना की परंपरा करीब 60 साल पुरानी है। मंदिर के इतिहास के बारे में बताते हुए पुजारी शिबुल पंडित ने जानकारी दी कि इन प्रतिमाओं की स्थापना के समय संबंधित ज्योतिर्लिंग स्थलों से पवित्र मिट्टी, जल और मंत्रों का प्रयोग किया गया था, जो इसे अत्यंत प्रभावशाली बनाता है। यही कारण है कि स्थानीय लोगों के अलावा दूर-दराज के इलाकों से आने वाले भक्त भी यहाँ के धार्मिक महत्व को जानते हैं और खिंचे चले आते हैं।

वर्षों से जारी है सेवा

मंदिर के मुख्य पुजारी शिबुल पंडित का स्वयं का अनुभव भी बहुत पुराना है। वे 1978 से लगातार इस मंदिर की सेवा और पूजा-अर्चना के कार्य में लगे हुए हैं। उनका कहना है कि शास्त्रों में द्वादश ज्योतिर्लिंगों की महिमा का गुणगान किया गया है और उन्हें इस बात की खुशी है कि वे इस परंपरा को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दे रहे हैं। उनके अनुसार, मंदिर आने वाले भक्तों को एक ही स्थान पर 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का सुलभ अवसर मिलता है, जो एक दुर्लभ अनुभव है। सावन के पवित्र माह में मंदिर की व्यवस्था और भी अधिक दिव्य हो जाती है, जहाँ भक्त अपनी प्रार्थनाएं लेकर आते हैं और शिव की कृपा प्राप्त करते हैं। पलामू का यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सनातन परंपराओं की जीवंत विरासत को भी सहेज कर रखे हुए है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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