उपनाम: दलहनी फसल
मूंग-उड़द बोने से पहले बीजोपचार न भूलें, वरना 60% तक गिर सकता है उत्पादन; जानें वैज्ञानिक की सलाह
छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन की मूंग-उड़द की बुआई से पहले कृषि विज्ञान केंद्र बालोद की पौध रोग विशेषज्ञ डॉ. भूमेश्वरी साहू ने इमिडाक्लोप्रिड से बीजोपचार की सलाह दी है, जिससे पीला मोजेक रोग और सफेद मक्खी से बचाव होता है।
धान की जगह जून-जुलाई में लगाएं अरहर, उन्नत बीज से लेकर पौधों की दूरी और ड्रिप सिंचाई का रखें ध्यान, बंपर होगी कमाई
जून-जुलाई में अगर किसान धान जैसी पारंपरिक फसल के बजाय अरहर बोएं और सही बीज, पौधों की दूरी व आधुनिक सिंचाई तकनीक अपनाएं, तो मुनाफा कई गुना बढ़ सकता है। साथ में दूसरी फसल लगाकर अतिरिक्त आमदनी भी पाई जा सकती है।
गोंडा के पप्पू यादव के लिए 'हरा सोना' बनी मूंग, 40 हजार की लागत से लाखों की कमाई की उम्मीद
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के प्रगतिशील किसान पप्पू यादव ने मूंग की उन्नत खेती को आमदनी का जरिया बनाया है। कम लागत में तैयार होने वाली इस दलहनी फसल से उन्हें हर सीजन लाखों रुपये की आय की उम्मीद है।
मूंग की खेती: कम लागत में बेहतर मुनाफा, बुवाई से कटाई तक अपनाएं वैज्ञानिक विधियां
खरीफ सीजन में मूंग की खेती किसानों के लिए कम लागत में अधिक आमदनी का जरिया बन सकती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार 15 जुलाई तक बुवाई पूरी कर, प्रमाणित बीज और राइजोबियम कल्चर से बीजोपचार अपनाकर 60 से 70 दिनों में अच्छी पैदावार ली जा सकती है।
अरहर बोने से पहले अपनाएं ये जैविक तरीके, नेमाटोड समेत हर दुश्मन कीट का होगा खात्मा
फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन खान के अनुसार अरहर की बुआई से पहले भूमि का जैविक शोधन करने से मिट्टी में छिपे हानिकारक फफूंद, कीट और नेमाटोड नष्ट हो जाते हैं और फसल शुरू से ही स्वस्थ रहती है।