उपनाम: शाही लीची
मुजफ्फरपुर की शाही लीची का नया रूप, सुजनी कला के जरिए तैयार हुई ‘लीचीपुरम आर्ट’
बिहार के मुजफ्फरपुर की प्रसिद्ध शाही लीची अब केवल स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सुजनी शॉल पर कलात्मक रूप से उकेरा जा रहा है। ‘लीचीपुरम सांस्कृतिक पुनर्जागरण अभियान’ के तहत स्थानीय कलाकारों ने कला और रोजगार को जोड़ने की अनूठी पहल की है।
मुजफ्फरपुर की शाही लीची का दाम काजू से भी ऊंचा, 1200 रुपये सैकड़ा तक पहुंची कीमत, विदेशों तक डिमांड बरकरार
खराब मौसम और जलवायु परिवर्तन के चलते इस बार मुजफ्फरपुर की शाही लीची के उत्पादन में 75% तक गिरावट आई है, जिससे इसकी कीमत 1200 रुपये प्रति सैकड़ा तक चली गई है। इसके बावजूद देश-विदेश में इसकी मांग में कोई कमी नहीं है।
आम के बाद अब बीज रहित बेदाना लीची का कमाल, BAU सबौर ने किया तैयार; काली मिर्च के दाने जितना कण, शाही से भी बड़ा आकार
बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के वैज्ञानिकों ने बिना बीज वाली बेदाना लीची विकसित की है, जिसमें बीज के नाम पर सिर्फ काली मिर्च के दाने के बराबर कण रहता है और आकार शाही लीची से भी बड़ा होता है। इसके जीआई टैग के लिए भारत सरकार को आवेदन भी भेज दिया गया है।
लीची की मिठास ने बदली किसान राजकुमार की तकदीर, लाखों की कमाई और हॉलैंड-ओमान तक पहुंच
शिवहर के कुअमा गांव के किसान राज कुमार राम ने धान-गेहूं की पारंपरिक खेती छोड़कर शाही और चाइना लीची की बागवानी अपनाई, जिससे उन्हें सालाना लाखों रुपये का शुद्ध मुनाफा हो रहा है। उनकी रसीली लीची की मांग अब हॉलैंड और ओमान जैसे देशों तक फैल चुकी है।