जमशेदपुर के प्रवीण सेठी का अनूठा मिशन, 599 अज्ञात और लावारिस लोगों के लिए किया पिंडदान झारखंड 2 घंटे पहले 5
जमशेदपुर के निवासी प्रवीण सेठी पिछले कुछ सालों से लावारिस शवों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए काम कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने पितृ पक्ष के दौरान 599 ऐसे लोगों की आत्मा की शांति के लिए सामूहिक श्राद्ध और भोज का आयोजन किया जिनके दुनिया में कोई नहीं था।

अज्ञात लोगों के लिए फरिश्ता बने प्रवीण सेठी

इस भागदौड़ भरी दुनिया में हर किसी की अंतिम यात्रा सम्मान के साथ संपन्न हो, यह हर इंसान का अधिकार है। हालांकि, कड़वा सच यह है कि कई लोग गुमनामी के अंधेरों में अपनी जान गंवा देते हैं। उनके न तो कोई परिजन होते हैं और न ही अंतिम विदाई देने वाला कोई अपना। ऐसे लोगों के लिए जमशेदपुर के निवासी प्रवीण सेठी एक उम्मीद की किरण बनकर उभरे हैं। वे पिछले कई सालों से उन लोगों के लिए पिंडदान और श्राद्ध कर्म कर रहे हैं, जिन्हें समाज ने लावारिस समझकर छोड़ दिया था।

पितृ पक्ष पर 599 आत्माओं को दी गई श्रद्धांजलि

हाल ही में पितृ पक्ष की अमावस्या के पावन अवसर पर जुगसलाई के पार्वती घाट पर एक बेहद भावुक और पुनीत कार्य संपन्न हुआ। अंत्योदय एक अभियान नामक संस्था की ओर से 599 अज्ञात और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के दिवंगत लोगों की आत्मा की शांति के लिए विधिवत श्राद्ध कर्म, पिंडदान और हवन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान लगभग 1000 लोगों के लिए श्राद्ध भोज की व्यवस्था की गई। इस अवसर पर पार्वती घाट के उन कर्मचारियों और पदाधिकारियों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जो इस नेक काम में लगातार अपना सहयोग प्रदान करते रहे हैं।

एक दर्दनाक घटना से मिली प्रेरणा

प्रवीण सेठी, जो पेशे से एक पत्रकार हैं और जुगसलाई नगर परिषद के पार्षद के रूप में भी सेवा दे रहे हैं, बताते हैं कि यह केवल एक सामाजिक गतिविधि नहीं बल्कि उनके जीवन का लिया गया एक कठोर संकल्प है। सालों पहले एक दिव्यांग दंपति के अंतिम संस्कार के दौरान उन्होंने जो लाचारी देखी, उसने उनके मन को झकझोर कर रख दिया। उसी दिन उन्होंने प्रण लिया कि यदि शहर में किसी लावारिस शव की सूचना मिलेगी या कोई परिवार आर्थिक तंगी के कारण अंतिम संस्कार करने में असमर्थ होगा, तो वे उसे अकेला नहीं छोड़ेंगे। इसी संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से साल 2022 में गणेश चतुर्थी के शुभ दिन अंत्योदय एक अभियान की शुरुआत की गई।

अब तक 599 शवों को मिला सम्मानजनक अंतिम संस्कार

प्रवीण सेठी के आंकड़ों के अनुसार, जब से यह अभियान शुरू हुआ है, तब से लेकर अब तक कुल 599 शवों का विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार कराया जा चुका है। इन 599 लोगों में से 466 वे अज्ञात शव थे जिनकी शिनाख्त नहीं हो पाई थी, जबकि 133 शव ऐसे लोगों के थे जिनके परिवार अत्यंत गरीब थे और अंतिम संस्कार का खर्च उठाने में असमर्थ थे। यह संस्था सुनिश्चित करती है कि चाहे वह कोई भी हो, उसकी अंतिम विदाई पूरी गरिमा के साथ संपन्न हो।

समाज का सहयोग ही इस अभियान की ताकत

इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह किसी एक व्यक्ति का प्रयास न होकर पूरे समाज की भागीदारी बन चुका है। अंत्योदय एक अभियान के व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से शहर के व्यापारी, बुद्धिजीवी, डॉक्टर, शिक्षाविद, पुलिस अधिकारी और श्रमिक वर्ग के लोग आपस में जुड़े हुए हैं। सभी सदस्य अपनी क्षमतानुसार आर्थिक और भौतिक सहयोग देते हैं ताकि अंतिम संस्कार के दौरान धन की कमी कभी बाधा न बने। प्रवीण सेठी मानते हैं कि बिना समाज के इस सम्मिलित सहयोग के इतने बड़े स्तर पर सेवा कार्य करना संभव नहीं था।

आप भी बन सकते हैं इस नेक पहल का हिस्सा

प्रवीण सेठी ने शहर के सभी नागरिकों से एक भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को कहीं भी किसी लावारिस शव की जानकारी मिलती है, या कोई परिवार आर्थिक मजबूरी के चलते अपनों के अंतिम संस्कार में असमर्थ है, तो वे तुरंत अंत्योदय एक अभियान से संपर्क करें। इसके लिए मोबाइल नंबर 9204886232 जारी किया गया है। इस नंबर पर एक फोन कॉल करते ही अभियान की टीम सक्रिय हो जाती है और अंतिम संस्कार की सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह निशुल्क की जाती हैं। यह पहल समाज को यह याद दिलाती है कि एक इंसान की असली पहचान केवल उसके जीवन से नहीं, बल्कि उसे मिलने वाली सम्मानजनक विदाई से भी होती है। जिस तरह से यह अभियान आगे बढ़ रहा है, वह निस्संदेह समाज के लिए एक बड़ा उदाहरण है कि जब इंसानियत की बात आती है, तो हर कोई साथ खड़ा हो सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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