उपनाम: मोहम्मद अली जिन्ना
मोहम्मद अली जिन्ना को सेक्युलर बताने वाले इन कड़वे सच को जरूर जान लें
मोहम्मद अली जिन्ना की धर्मनिरपेक्ष छवि को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच, उनके इतिहास और पाकिस्तान प्रस्ताव की सच्चाई को समझना बेहद जरूरी है।
क्या सुभाषचंद्र बोस के जीवित रहने पर भारत का विभाजन टाला जा सकता था? एक गहन विश्लेषण
भारत के इतिहास में आज भी यह प्रश्न चर्चा का विषय है कि यदि नेताजी सुभाषचंद्र बोस आजादी के समय जीवित होते, तो क्या देश का बंटवारा रुक सकता था। एक पत्रकार की दृष्टि में उनकी धर्मनिरपेक्ष विचारधारा और नेतृत्व क्षमता कैसे राजनीतिक समीकरण बदल सकती थी, जानिए इस...
जिन्ना की धोखेबाजी और ऑल इंडिया रेडियो का वह रहस्यमयी प्रसारण: कैसे 229 दिनों में बलूचिस्तान की आजादी हुई खत्म?
11 अगस्त 1947 को आजाद घोषित हुई कलात रियासत मात्र 229 दिनों के भीतर पाकिस्तान का हिस्सा बन गई। जिन्ना की कूटनीतिक चालों और ऑल इंडिया रेडियो की एक विवादास्पद रिपोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को हमेशा के लिए एक ऐतिहासिक पहेली बना दिया।
11 अगस्त 1947: बीकानेर रियासत के लिए जिन्ना और माउंटबेटन की बिसात, गांधीजी पर उठे थे गंभीर सवाल
देश की आजादी से मात्र चार दिन पहले का दिन उथल-पुथल भरा रहा, जहां एक तरफ बीकानेर के विलय को लेकर राजनीतिक चालें चली जा रही थीं, वहीं दूसरी ओर कोलकाता में महात्मा गांधी पर भेदभाव के आरोप लग रहे थे।
10 अगस्त 1947: दिल्ली में तिरंगे पर नेहरू की दलील और कराची में जोगेंद्रनाथ मंडल पर जिन्ना की मेहरबानी
10 अगस्त 1947 के दिन भारत और पाकिस्तान के विभाजन की पृष्ठभूमि में दिल्ली और कराची में दो बड़ी राजनीतिक घटनाएं घटी थीं, जिसने इतिहास की दिशा बदल दी।