उपनाम: छतरपुर
बिना बिजली के भी कैसे ठंडे रहते थे पुराने जमाने के घर? जानिए वह खास तकनीक जो आज भी कारगर है
छतरपुर जिले के हंसारी गांव में बने पारंपरिक घर अपनी विशेष बनावट के चलते भीषण गर्मी में भी ठंडे रहते हैं, जहां कूलर या पंखे की जरूरत नहीं पड़ती। मोटी मिट्टी की दीवारें और लकड़ी की संरचना अंदर का तापमान संतुलित बनाए रखती है।
पत्नी और बेटे की कब्रों के बीच मिला कैंसर पीड़ित पति का शव, 11 दिन में बिखर गया पूरा परिवार
मुंह के कैंसर से जूझ रहे 40 वर्षीय सुबहान अहमद का शव चरखारी के कब्रिस्तान में उनकी पत्नी और छह वर्षीय बेटे की कब्रों के बीच मिला, जिसमें उनका एक हाथ पत्नी की और दूसरा बेटे की कब्र पर रखा था। महज 11 दिनों में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत ने पूरे इलाक...
रसगुल्ले जैसा दिखने वाला यह अनोखा मुरब्बा ₹400 किलो, बारिश में बनता है और सालभर खाया जाता है
छतरपुर के जीतेंद्र बाजपेयी सालों से बांस का खास मुरब्बा बना रहे हैं, जो 400 रुपए किलो बिकता है और हड्डियां मजबूत करने समेत कई फायदे देता है।
बिना पंखे और कूलर के भी ठंडे रहते हैं ये पुराने घर, जानिए क्या है 'दोहरे खंड' का राज
छतरपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में आज भी ऐसे पुराने घर मौजूद हैं, जो भीषण गर्मी में भी भीतर से ठंडे बने रहते हैं और जहां कूलर, पंखे या बिजली तक की जरूरत नहीं पड़ती। इसकी वजह है इन घरों की खास बनावट, जिसे 'दोहरे खंड' के रूप में बनाया जाता था।
साल में सिर्फ 1 महीने बिकती है यह खास सब्जी, खरीदने के लिए टूट पड़ते हैं लोग; जानें स्वाद और फायदे
छतरपुर जिले में जून के महीने में कमल ककड़ी नाम की सब्जी बाजार में आती है, जिसे क्षेत्रीय भाषा में भसीड़ा कहते हैं। आलू जैसी बनावट और हल्के मीठे, नारियल जैसे स्वाद वाली यह सब्जी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है।