उपनाम: भगवान विष्णु
गुरुवार के नियम: देवगुरु बृहस्पति को प्रसन्न रखना है तो भूलकर भी न करें ये गलतियां
सनातन धर्म में गुरुवार का दिन देवगुरु बृहस्पति और भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन कुछ विशेष कार्यों और आदतों से परहेज करना आवश्यक है ताकि जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे।
योगिनी एकादशी 2026: 9 या 10 जुलाई, कब है सही तारीख? उज्जैन के पंडित से जानें व्रत का महत्व और नियम
योगिनी एकादशी की तिथि को लेकर चल रहे असमंजस के बीच उज्जैन के ज्योतिषाचार्य ने स्पष्ट किया है कि व्रत किस दिन रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आराधना का विशेष फल प्राप्त होता है।
देवशयनी एकादशी 2026: कब है चातुर्मास की शुरुआत, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और नियम
आषाढ़ माह की देवशयनी एकादशी से चातुर्मास का शुभारंभ हो रहा है, जो चार महीनों तक चलने वाले भगवान विष्णु के शयनकाल का प्रतीक है। इस दौरान शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है और आध्यात्मिक अनुष्ठानों का महत्व बढ़ जाता है।
चम्पक द्वादशी और सिद्ध योग का संयोग: शुक्रवार को अपनाएं ये विशेष उपाय, बरसेगी सुख-समृद्धि
शुक्रवार 26 जून को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि के साथ चम्पक द्वादशी और सिद्ध योग का खास मिलन हो रहा है। इस शुभ अवसर पर भगवान विष्णु की विशेष पूजा और अचूक उपाय करने से जीवन में सुख, सौभाग्य और उन्नति के मार्ग खुल सकते हैं।
आषाढ़ माह 2026: साधना और भक्ति के लिए क्यों खास है यह महीना, जानिए महत्वपूर्ण तिथियां और नियम
हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ का महीना आध्यात्मिक उन्नति और भगवान विष्णु की उपासना के लिए अत्यंत उत्तम माना जाता है। जानिए इस माह की शुरुआत कब से होगी और इसका धार्मिक महत्व क्या है।
निर्जला एकादशी 2026: पूजा के दौरान इन दो आरतियों का पाठ है अनिवार्य, यहाँ देखें पूरे शब्द
निर्जला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए सबसे उत्तम माना गया है। पूजा को पूर्ण करने के लिए इन दो आरतियों का गायन अत्यंत फलदायी होता है।
एकादशी माता कौन हैं और कैसे हुआ उनका जन्म, जानिए इस व्रत के पीछे की पौराणिक कहानी
सनातन धर्म में एकादशी व्रत का बड़ा महत्व है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसका सीधा संबंध एकादशी माता की उत्पत्ति से है। जानिए भगवान विष्णु के तेज से कैसे प्रकट हुईं एकादशी माता और क्या है इसके पीछे का रहस्य।
निर्जला एकादशी 2026: जानिए इस दिन का महत्व और क्यों इसे माना जाता है सबसे खास
ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी को हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि इस दिन बिना जल और अन्न के व्रत रखने से पूरे साल की एकादशियों का पुण्य मिल जाता है।
निर्जला एकादशी और गुरुवार का विशेष संयोग, कुंडली में गुरु को मजबूत करने के लिए आजमाएं ये 4 आसान उपाय
निर्जला एकादशी और गुरुवार का दुर्लभ मेल 25 जून 2026 को हो रहा है। भगवान विष्णु की कृपा पाने और कुंडली में गुरु ग्रह को सशक्त बनाने के लिए ये उपाय आपके जीवन में सुख-समृद्धि ला सकते हैं।
निर्जला एकादशी व्रत 25 जून को: जानें विधि-विधान और महत्व
वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व है, जानें पूरी पूजा प्रक्रिया।
निर्जला एकादशी से पूर्णिमा तक करें इन 5 मंत्रों का जाप, दूर होंगी जीवन की सभी परेशानियां
निर्जला एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक की अवधि में विशेष मंत्रों का जाप करना आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत लाभकारी माना गया है। आइए जानते हैं कि किन मंत्रों के जाप से आप भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा पा सकते हैं।
निर्जला एकादशी: आर्थिक तंगी और असाध्य रोगों से मिलेगी मुक्ति, जानें इस बार का शुभ संयोग
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। हरिद्वार के पंडित श्रीधर शास्त्री के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने पर व्यक्ति को विशेष लाभ और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
निर्जला एकादशी 2026: तुलसी के इन आसान उपायों से बदल सकती है किस्मत, जानें पूरी विधि
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना के साथ तुलसी के कुछ खास उपाय करने से जीवन में सुख और समृद्धि आती है।
निर्जला एकादशी 2026: इस कठिन व्रत के जरूरी नियम, पालन करने पर मिलेगा साल भर की एकादशियों का पुण्य
ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन बिना जल और अन्न के उपवास रखने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
निर्जला एकादशी 2026: क्या जल पीने से टूट जाता है व्रत? जानें धार्मिक नियम और सही तरीका
निर्जला एकादशी का व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है, लेकिन शास्त्रों में कुछ विशेष परिस्थितियों और नियमों के तहत जल ग्रहण करने का उपाय बताया गया है जिससे व्रत भंग नहीं होता।