उपनाम: अरहर की खेती
अरहर की बंपर पैदावार का नया फॉर्मूला: कम बीज और बेड टू बेड तकनीक से लक्ष्मीकांत ने बदली खेती की तस्वीर
रायपुर के एक युवा किसान ने अरहर की खेती में आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर बंपर पैदावार का तरीका साझा किया है। उन्होंने बताया कि किस प्रकार कम बीज का उपयोग और सही किस्मों का चुनाव किसानों की लागत घटाकर मुनाफा बढ़ा सकता है।
खेती का नया ट्रेंड: नर्सरी विधि से अरहर उगाकर किसान कमा रहे 10 गुना मुनाफा
बुंदेलखंड के किसान अब अरहर की खेती के लिए नर्सरी तकनीक अपना रहे हैं, जिससे न केवल बीजों का बेहतर अंकुरण होता है बल्कि कम लागत में बंपर पैदावार भी मिलती है।
बारिश कम हुई तो किसान क्या उगाएं? वैज्ञानिक ने सुझाईं 90 दिन में पकने वाली फसलें
कम बारिश की आशंका को देखते हुए कृषि वैज्ञानिक किसानों को लंबी अवधि वाली धान की जगह कम समय में तैयार होने वाली सोयाबीन और अरहर जैसी फसलें अपनाने की सलाह दे रहे हैं।
धान की जगह जून-जुलाई में लगाएं अरहर, उन्नत बीज से लेकर पौधों की दूरी और ड्रिप सिंचाई का रखें ध्यान, बंपर होगी कमाई
जून-जुलाई में अगर किसान धान जैसी पारंपरिक फसल के बजाय अरहर बोएं और सही बीज, पौधों की दूरी व आधुनिक सिंचाई तकनीक अपनाएं, तो मुनाफा कई गुना बढ़ सकता है। साथ में दूसरी फसल लगाकर अतिरिक्त आमदनी भी पाई जा सकती है।
अरहर बोने से पहले अपनाएं ये जैविक तरीके, नेमाटोड समेत हर दुश्मन कीट का होगा खात्मा
फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन खान के अनुसार अरहर की बुआई से पहले भूमि का जैविक शोधन करने से मिट्टी में छिपे हानिकारक फफूंद, कीट और नेमाटोड नष्ट हो जाते हैं और फसल शुरू से ही स्वस्थ रहती है।