डिजिटल इंडिया में इस गांव के लोग नेटवर्क के लिए तरसे, फोन करने के लिए जाना पड़ता है 4 किलोमीटर दूर हरियाणा एक घंटा पहले 3
हरियाणा के यमुनानगर जिले का नवाजपुर गांव आज भी मोबाइल नेटवर्क के लिए संघर्ष कर रहा है। करीब 850 की आबादी वाले इस गांव के लोगों को फोन करने और ऑनलाइन पेमेंट के लिए 3 से 4 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।

एक तरफ जहां पूरा देश 5G तकनीक और डिजिटल इंडिया के नारे के साथ आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ हरियाणा का एक ऐसा गांव भी है जो आज के दौर में भी मोबाइल नेटवर्क के एक-एक सिग्नल के लिए तरस रहा है। यमुनानगर जिले का नवाजपुर गांव आधुनिक कनेक्टिविटी के मामले में पूरी तरह से पिछड़ा हुआ है। उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे इस गांव की कुल आबादी लगभग 850 है, लेकिन यहां किसी भी टेलीकॉम कंपनी का मोबाइल नेटवर्क काम नहीं करता है। नेटवर्क की इस बड़ी समस्या के कारण स्थानीय लोगों का जीवन बेहद मुश्किल हो गया है।

बातचीत और ऑनलाइन पेमेंट के लिए जाना पड़ता है 3 से 4 किलोमीटर दूर

नवाजपुर गांव के लोगों के पास मोबाइल फोन तो हैं, लेकिन उनमें नेटवर्क के सिग्नल गायब रहते हैं। गांव वालों को यदि किसी से फोन पर बात करनी हो या कोई जरूरी कॉल रिसीव करनी हो, तो उन्हें अपने घरों से बाहर निकलकर करीब 3 से 4 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। आज के समय में जब रोजमर्रा के छोटे-छोटे लेन-देन डिजिटल माध्यमों से होते हैं, तब इस गांव के लोगों को ऑनलाइन पेमेंट करने के लिए दूसरे गांवों का रुख करना पड़ता है। बिना नेटवर्क के ऑनलाइन बैंकिंग और अन्य डिजिटल सुविधाओं का लाभ उठाना यहां के लोगों के लिए एक सपना बनकर रह गया है।

छात्रों की पढ़ाई पर मंडराया संकट

इस नेटवर्क ब्लैकआउट का सबसे बुरा प्रभाव गांव के विद्यार्थियों की शिक्षा पर पड़ रहा है। वर्तमान में स्कूलों का काफी काम ऑनलाइन और WhatsApp पर होने लगा है। होमवर्क से लेकर परीक्षा की जरूरी जानकारियां तक WhatsApp समूहों में भेजी जाती हैं। लेकिन इंटरनेट न होने के कारण बच्चे घर पर बैठकर अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पा रहे हैं।

गांव की रहने वाली छात्रा दृष्टि ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा:

"हम नेटवर्क न होने के कारण घर पर बिल्कुल भी पढ़ाई नहीं कर सकते हैं। जब हम पढ़ाई करने के लिए गांव से बाहर किसी दूसरी जगह जाते हैं, तो हमारे माता-पिता का हमसे संपर्क टूट जाता है। नेटवर्क न होने के कारण हमेशा सुरक्षा का डर बना रहता है।"

ग्रामीणों द्वारा किए गए वैकल्पिक उपाय

सरकारी और निजी कंपनियों की बेरुखी से तंग आकर नवाजपुर के ग्रामीणों ने अपने स्तर पर कुछ वैकल्पिक इंतजाम किए हैं, ताकि उनका संपर्क बाहरी दुनिया से बना रहे:

  • ग्रामीणों ने अपने निजी खर्च पर गांव में कुछ वाई-फाई कनेक्शन लगवाए हैं।
  • वैकल्पिक संचार व्यवस्था के तौर पर घरों में पुराने लैंडलाइन फोन दोबारा चालू किए गए हैं।
  • ऑनलाइन भुगतान और जरूरी डिजिटल कामों के लिए ग्रामीण पड़ोसी गांवों में जाने को मजबूर हैं।

विधायक से लेकर सांसद तक से गुहार, पर ढाक के तीन पात

गांव के लोगों का कहना है कि वे अपनी इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन, नेताओं और टेलीकॉम कंपनियों के अधिकारियों से मिल चुके हैं। स्थानीय निवासी संजय गुर्जर ने नाराजगी जताते हुए बताया कि आज के डिजिटल युग में उनका गांव बेहद पिछड़ गया है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर वे विधायक, सांसद और सरकारी संचार कंपनी BSNL को भी कई बार लिखित रूप में शिकायत दे चुके हैं, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

सरपंच प्रतिनिधि संजीव कुमार ने बताया:

"हमारे गांव में मोबाइल रेंज की सबसे बड़ी दिक्कत है। वर्तमान में लोग वाई-फाई के सहारे किसी तरह काम चला रहे हैं। एक तरफ मोबाइल रिचार्ज लगातार महंगे हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ नेटवर्क न होने से लोगों का पैसा बर्बाद हो रहा है। बिना नेटवर्क के हमारा पूरा गांव अधूरा महसूस करता है।"

पंचायत ने प्रशासन के सामने यह प्रस्ताव भी रखा है कि यदि कोई भी मोबाइल कंपनी गांव में अपना टावर लगाना चाहती है, तो वे सरकारी या निजी जमीन उपलब्ध कराने के लिए भी तैयार हैं।

प्रशासन ने दिया मामले के समाधान का आश्वासन

इस गंभीर समस्या के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन हरकत में आया है। छछरौली के SDM जसपाल गिल ने इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:

"यह मामला अभी-अभी मेरे संज्ञान में आया है। नवाजपुर गांव के लोगों को नेटवर्क की इस समस्या से निजात दिलाने के लिए हम जल्द ही संबंधित टेलीकॉम कंपनी के अधिकारियों से बात करेंगे और इस समस्या का कोई उचित और त्वरित समाधान निकाला जाएगा।"
अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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