राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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विचारों
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के अंदर हलचल तेज हो गई है। ममता बनर्जी की पार्टी पर टूट का खतरा गहराता दिख रहा है। पार्टी की वरिष्ठ सांसद और लोकसभा में टीएमसी की पूर्व चीफ व्हिप काकोली घोष ने दावा किया है कि उनके साथ पार्टी के 20 सांसद खड़े हैं और इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अलग राजनीतिक पहचान की मांग रखी है। एक खास बातचीत में काकोली घोष ने अपनी नाराजगी की असली वजह और आगे की योजना का खुलासा किया है।
खुली बगावत की ओर बढ़ती अंदरूनी लड़ाई
तृणमूल कांग्रेस की भीतरी कलह अब खुली बगावत का रूप लेती नजर आ रही है। पार्टी के नाराज सांसदों का एक बागी गुट लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सकता है। सूत्रों के अनुसार, यह गुट लोकसभा में अभिषेक बनर्जी की जगह काकोली घोष दस्तीदार को नेता के रूप में मान्यता दिए जाने की मांग उठा सकता है।
काकोली घोष का दावा है कि उन्हें करीब 20 सांसदों का साथ हासिल है। इन बागी सांसदों ने अलग खेमा बनाकर एनडीए में शामिल होने की मंशा जाहिर की है और इस सिलसिले में लोकसभा अध्यक्ष को 20 हस्ताक्षरों वाला पत्र भी सौंपा है। अगर यह दावा सही निकलता है, तो इसे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के लिए बड़ा झटका माना जाएगा।
विकास और बेहतर समन्वय के लिए अलग राह
काकोली घोष ने कहा कि उनका समूह पश्चिम बंगाल के विकास और केंद्र व राज्य के बीच बेहतर तालमेल के लिए अलग रास्ता चुनना चाहता है। उन्होंने दोहराया कि 20 सांसदों ने हस्ताक्षर कर लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजा है। उनके मुताबिक, यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका मकसद जनता के हित और राज्य के विकास को प्राथमिकता देना है।
हम राज्य की उन्नति चाहते हैं। केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय के साथ काम करना चाहते हैं ताकि आम लोगों को इसका फायदा मिल सके।
एनडीए के साथ काम करने की इच्छा
काकोली घोष ने साफ किया कि उनका समूह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ मिलकर काम करना चाहता है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हित उनके लिए सबसे ऊपर हैं।
हम देश को सुरक्षित रखना चाहते हैं। हमारी जो राजनीतिक ताकत है, उसका इस्तेमाल देशहित और जनता के काम के लिए होना चाहिए।
ममता की नीतियों से असहमति, व्यक्तिगत मतभेद से इनकार
जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी नाराजगी ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से है, तो उन्होंने किसी व्यक्तिगत मतभेद से सीधे तौर पर इनकार किया। हालांकि उन्होंने यह जरूर माना कि वे पार्टी की कुछ नीतियों से सहमत नहीं हैं।
मैं 40 साल से राजनीति में हूं। मेरे लिए जनता का एजेंडा सबसे महत्वपूर्ण है, न कि किसी व्यक्ति का। हम उन नीतियों के खिलाफ हैं, जिनकी वजह से जनता ने पार्टी को झटका दिया।
20 सांसदों के समर्थन का दावा
बीते कुछ दिनों से राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि बागी खेमे के पास 13 या 14 सांसदों का ही समर्थन है। काकोली घोष ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया।
अगर कोई कह रहा है कि हमारे साथ सिर्फ 13 सांसद हैं, तो वे उनके नाम सामने लाएं। 20 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं और स्पीकर को पत्र भेजा गया है।
लोकसभा में नेतृत्व बदलने की चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसदों का समूह लोकसभा में टीएमसी के नेतृत्व को लेकर भी नया दावा पेश कर सकता है। कहा जा रहा है कि यह गुट अभिषेक बनर्जी की जगह काकोली घोष को नेता के तौर पर मान्यता दिए जाने की मांग कर सकता है। इसी मुद्दे को लेकर लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की तैयारी बताई जा रही है।
क्या टीएमसी को लगेगा बड़ा झटका?
लोकसभा में टीएमसी का संख्या बल मजबूत है। ऐसे में अगर वाकई 20 सांसदों का बड़ा समूह नेतृत्व से अलग रुख अपनाता है, तो यह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह समूह दल-बदल विरोधी कानून से भी बच सकता है। इससे पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई सियासी रेखाएं खिंच सकती हैं, जिसका असर संसद के साथ-साथ राज्य की राजनीति पर भी दूरगामी रूप से पड़ सकता है।
स्पीकर के फैसले पर टिकी सबकी नजर
फिलहाल राजनीतिक हलकों की निगाहें लोकसभा अध्यक्ष के अगले कदम पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि बागी खेमे के दावों को कितनी वैधता मिलती है और टीएमसी नेतृत्व इस चुनौती से किस तरह निपटता है। काकोली घोष के दावों ने इतना तो साफ कर ही दिया है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा घमासान देखने को मिल सकता है।
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