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14 घंटे पहले
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अगले कारोबारी हफ्ते पर निवेशकों की पैनी नजर
भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला सप्ताह काफी उठापटक भरा रहा। हालांकि सप्ताह के अंत में बाजार ने कुछ हद तक सुधार के संकेत दिए, लेकिन कुल मिलाकर पूरे हफ्ते सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई। पूरे सप्ताह के दौरान सेंसेक्स में लगभग 0.6 फीसदी और निफ्टी में करीब 0.5 फीसदी की कमजोरी देखी गई। शुक्रवार के सत्र में सेंसेक्स 3 अंक से अधिक की मामूली बढ़त के साथ 77,541 के स्तर पर, जबकि निफ्टी 20 अंक की तेजी के साथ 24,252 के स्तर पर जाकर बंद हुआ। अब निवेशकों की नजर 24 से 28 अगस्त के आगामी कारोबारी हफ्ते पर है, जहां बाजार की चाल मुख्य रूप से चार बड़े कारकों पर टिकी रहेगी।
1. मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान का तनाव
बाजार की चाल को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा कारक मध्य पूर्व की स्थिति है। वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसी चर्चाएं हैं कि अमेरिका जल्द ही ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगा सकता है। यदि दोनों देशों के बीच तनाव और गहराता है, तो वैश्विक बाजार में अनिश्चितता का माहौल पैदा हो सकता है, जिसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार की धारणा पर पड़ना तय है।
2. कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
शेयर बाजार के लिए कच्चा तेल एक निर्णायक कारक के रूप में देखा जा रहा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड करीब 95 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 87 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा है। चूंकि भारत अपनी अधिकांश तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें देश के लिए महंगाई और कंपनियों के परिचालन खर्च को बढ़ा सकती हैं, जिससे बाजार का सेंटिमेंट कमजोर हो सकता है।
3. बॉन्ड यील्ड में लगातार वृद्धि
वित्तीय बाजारों में बॉन्ड यील्ड का प्रदर्शन भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है। पिछले हफ्ते भारत की 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 6.88 फीसदी तक पहुंच गई थी, जो पिछले दो महीनों का उच्चतम स्तर है। हालांकि सप्ताह के अंत में यह 6.85 फीसदी पर स्थिर हुई। अमेरिका में भी बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। जब बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी होती है, तो डेट इंस्ट्रूमेंट अधिक आकर्षक लगने लगते हैं, जिससे शेयर बाजार से पूंजी का प्रवाह कम होने का जोखिम बना रहता है।
4. अमेरिकी महंगाई के आंकड़े और फेड की नीति
निवेशकों की नजर अमेरिकी बाजार से मिलने वाले संकेतों पर भी होगी। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श का संबोधन और अमेरिका के PCE महंगाई के आंकड़े काफी महत्वपूर्ण रहेंगे। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होगा कि भविष्य में ब्याज दरों को लेकर फेडरल रिजर्व की रणनीति क्या होगी।
निवेशकों के लिए सुझाव
जानकारों का मानना है कि घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और चुनिंदा शेयरों में लगातार खरीदारी से बाजार को सपोर्ट मिल रहा है। पिछले हफ्ते रियल्टी, मेटल और प्राइवेट बैंक क्षेत्र के शेयरों में निवेशकों की अच्छी दिलचस्पी देखी गई थी, जबकि IT और FMCG क्षेत्र के शेयर दबाव में बने रहे। ऐसे में निवेशकों को अगले हफ्ते सतर्क रहकर ही कदम बढ़ाने की सलाह दी जा रही है।
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