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2 घंटे पहले
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विचारों
फीफा वर्ल्ड कप 2026 में जापानी प्रशंसकों ने एक बार फिर मैच खत्म होने के बाद पूरे स्टेडियम की सफाई कर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यह कोई पहली बार नहीं है। पिछले कई वर्ल्ड कप से लगातार उन्हें ऐसा करते देखा जा रहा है, और खास बात यह कि वे यह काम तब भी करते हैं जब उनकी अपनी टीम मैच हार जाती है। सवाल यह है कि उनमें यह आदत कहां से आती है, जिसे बाकी दुनिया को भी सीखने की जरूरत है।
टेक्सस के एटी एंड टी स्टेडियम में जापान ने नीदरलैंड के खिलाफ अपना पहला मुकाबला रोमांचक अंदाज में ड्रॉ खेला। मैच के बाद जो हुआ, उसकी चर्चा हर तरफ हो रही है। जैसे ही खेल खत्म हुआ, जापानी दर्शक अपने आसपास की जगह साफ करने में जुट गए। वे बिखरा हुआ कूड़ा उठाकर उन बड़े प्लास्टिक बैगों में भर रहे थे, जिन्हें वे खुद अपने साथ स्टेडियम लेकर आए थे। पूरी जगह को साफ-सुथरा छोड़ने के बाद ही वे वहां से बाहर निकले।
हार-जीत में एक जैसा बर्ताव
फुटबॉल जगत में जापानी प्रशंसक स्टेडियमों को पूरी तरह साफ छोड़कर जाने के लिए मशहूर हैं। उनकी शालीनता, अनुशासन और सम्मानजनक व्यवहार हर टूर्नामेंट में लोगों का मन मोह लेता है। टीम जीते या हारे, उनके बर्ताव में कोई फर्क नहीं आता।
न हूटिंग, न गाली-गलौज
जापानी दर्शक विरोधी टीम को न तो हूट करते हैं और न ही नकारात्मक चीयरिंग। यह उनकी स्पोर्ट्समैनशिप और संस्कृति का एक और खूबसूरत पहलू है। अमेरिका में चल रहे फीफा वर्ल्ड कप में उन्होंने अपनी टीम का जोरदार समर्थन तो किया, लेकिन विरोधी खिलाड़ियों या उनके फैंस के खिलाफ कोई हूटिंग, गाली-गलौज या नेगेटिव चैंट नहीं किए। इसके उलट वे बेहद शालीनता से अपनी टीम का हौसला बढ़ाते हैं और मैच के बाद अक्सर विरोधी टीम के समर्थकों से दोस्ती भी कर लेते हैं।
हार के बाद भी छोड़ी थी मिसाल
जापानी प्रशंसक सबसे पहले 2018 में रूस में हुए विश्व कप के दौरान अपने साफ-सुथरे व्यवहार की वजह से वायरल हुए थे। उस प्रतियोगिता में एक दर्दनाक हार के बाद भी उन्होंने यही मिसाल पेश की। प्री क्वार्टर फाइनल में जापान दो गोल से आगे चल रहा था, लेकिन बेल्जियम ने मैच के आखिरी मिनट में उसे हरा दिया।
उस मुकाबले के बाद जापानी खिलाड़ियों ने अपना चेंजिंग रूम भी बेहद साफ-सुथरा छोड़ा और वहां रूसी भाषा में ‘धन्यवाद’ लिखा एक हस्तलिखित नोट तक रख दिया। चार साल बाद कतर वर्ल्ड कप में भी यही नजारा दिखा, जहां जापान ने जर्मनी और स्पेन जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ अपनी कुछ सबसे यादगार जीत दर्ज कीं और ग्रुप ई में शीर्ष पर रहा।
क्यों करते हैं ऐसा
जापानी लोगों के लिए किसी जगह को पहले से बेहतर हालत में छोड़ना एक आम बात है। चाहे क्लब मैच हो, फ्रेंडली हो या वर्ल्ड कप का मुकाबला—वे जहां भी जाते हैं, स्टेडियम और कभी-कभी ड्रेसिंग रूम तक साफ करके लौटते हैं। उनकी इस आदत की हर कोई तारीफ करता है। जापान में बच्चों को स्कूल से ही यह सिखाया जाता है कि “जो जगह इस्तेमाल की, उसे बेहतर या कम से कम वैसा ही छोड़ो।” उनकी संस्कृति कहती है—दिखावा मत करो, बल्कि आदत डालो। इस बार भी जब जापानी दर्शकों ने ऐसा किया, तो सोशल मीडिया पर लोग उनकी तारीफ करते नहीं थके और कहा गया कि पूरी दुनिया को इनसे सीखना चाहिए।
‘ओ-सोजी’: स्कूल से मिलती है सीख
जापानी संस्कृति में सम्मान और सामूहिक सद्भाव को सबसे ऊपर रखा जाता है, यहां तक कि विरोध भी सम्मानजनक तरीके से जताया जाता है। जापान के स्कूलों में एक खास व्यवस्था है—“ओ-सोजी” यानी सामूहिक सफाई। यह कोई सजा नहीं, बल्कि पाठ्यक्रम का हिस्सा है। बच्चे मिलकर कक्षाओं, गलियारों और यहां तक कि शौचालयों तक की सफाई करते हैं। इसे एक खेल की तरह महसूस कराया जाता है, ताकि यह उनकी आदत और साझा जिम्मेदारी बन जाए। इससे उनमें अपने इस्तेमाल की जगह को साफ रखने का भाव विकसित होता है।
जापानी संस्कृति में “मेइवाकू” यानी दूसरों को परेशानी से बचाना बेहद अहम माना जाता है, और स्टेडियम की सफाई इसी सोच का विस्तार है। यह किसी सार्वजनिक स्थान के प्रति सम्मान और आभार जताने का तरीका है। यह व्यवहार जापानी कहावत “तात्सु तोरी अतो वो दोरोसाज़ु” (जाता पक्षी अपना निशान मैला नहीं करता) को भी दर्शाता है, यानी जाने से पहले जगह को वैसा ही छोड़ो जैसी वह मिली थी। इसके अलावा शिंटो और बौद्ध धर्म में सफाई को मानसिक शुद्धि और सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
क्या जापानियों के घर सबसे साफ होते हैं?
जापानी घर अपनी साफ-सफाई और व्यवस्था के लिए प्रसिद्ध हैं। यहां सफाई कोई बड़ा काम नहीं समझा जाता। हर चीज की एक तय जगह होती है और परिवार के सभी सदस्य रोजाना 10 मिनट निकालकर चीजों को उनकी जगह रखते हैं तथा सतहों को साफ करते हैं। यह एक आदत है, कोई बोझ नहीं। जापानी घरों में बाहर के जूते उतारकर अंदर “इनडोर शूज़” या मोजे पहने जाते हैं, ताकि बाहर की गंदगी अंदर न आ सके। बच्चों को भी अपना सामान संभालने और सफाई में हाथ बंटाने की शिक्षा दी जाती है, जो उन्हें जीवन का एक अहम कौशल सिखाती है।
जापान की वो बातें जो सीखने लायक हैं
समय की पाबंदी – जापान में समय का सम्मान करना दूसरों का सम्मान करना माना जाता है। अगर ट्रेनें कुछ सेकंड भी देर हो जाएं, तो ड्राइवर और गार्ड सभी यात्रियों से माफी मांगते हैं। देर होना दूसरों के समय की बर्बादी समझा जाता है और समय की पाबंदी अनुशासन व विश्वसनीयता का प्रतीक है।
सम्मान और विनम्रता – झुककर अभिवादन करना और विनम्र शब्दों का प्रयोग कर वे दूसरों का सम्मान जताते हैं। वे समूह की भलाई को हमेशा निजी इच्छा से ऊपर रखते हैं और दिखावे की कोशिश नहीं करते।
स्वच्छता और व्यवस्था – यहां सड़कें बिना कूड़ेदान के भी साफ रहती हैं, क्योंकि लोग कचरा अपने पास रखकर सही जगह पर ही फेंकते हैं। यह आदत वे घर से लेकर हर जगह अपनाते हैं।
कड़ी मेहनत और परफेक्शनिज्म – वे कड़ी मेहनत और समर्पण दिखाते हैं, धैर्य रखते हैं और छोटी-छोटी चीजों में भी पूरा ध्यान देते हैं।
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