गन्ने की कीमतों को लेकर कर्नाटक में गहराया संकट, किसानों ने 5500 रुपये प्रति टन की मांग पर फूंका बिगुल राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 6
कर्नाटक में गन्ना किसानों का आंदोलन उग्र हो गया है। मिल मालिकों के 3500 रुपये प्रति टन के प्रस्ताव को खारिज करते हुए किसानों ने 5500 रुपये प्रति टन की अपनी मांग पर अड़े रहने की बात कही है।

गन्ने की कीमतों पर किसानों का आर-पार का रुख

कर्नाटक में गन्ने की फसल की कीमतों को लेकर जारी विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। बेलगावी जिले में चीनी मिल मालिकों और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत का कोई ठोस नतीजा न निकलने के बाद किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। बेलगावी के प्रभारी मंत्री और लोक निर्माण विभाग के मंत्री सतीश जारकीहोली के साथ किसानों की दो दौर की चर्चा हुई, लेकिन यह पूरी तरह बेनतीजा साबित हुई। इसके बाद से ही किसानों ने अपना रुख और कड़ा कर लिया है।

मिल मालिकों का प्रस्ताव और किसानों का इंकार

चीनी मिल मालिकों ने फिलहाल 3,500 रुपये प्रति टन की दर से गन्ना खरीदने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, किसान संगठनों ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। किसान नेताओं का साफ कहना है कि उन्हें यह कीमत कतई मंजूर नहीं है। वे अपनी उपज के लिए कुल 5,500 रुपये प्रति टन की मांग कर रहे हैं। इस मांग का गणित बहुत स्पष्ट है, किसान चाहते हैं कि चीनी मिलें उन्हें 4,500 रुपये प्रति टन का भुगतान करें और राज्य सरकार इसमें 1,000 रुपये प्रति टन की अतिरिक्त सब्सिडी प्रदान करे।

जेल भरो आंदोलन की चेतावनी

किसान नेता चूनाप्पा पुजारी ने सरकार और मिल मालिकों को दो टूक लहजे में चेतावनी दी है। उनका कहना है कि बार-बार बैठकें करने का कोई औचित्य नहीं है, जब तक कि सरकार और मिल मालिक उनकी मांगों पर सहमति नहीं जताते। किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे राज्यव्यापी जेल भरो आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि यह मुद्दा जल्द नहीं सुलझाया गया, तो राज्य विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र के दौरान सरकार को भारी विरोध का सामना करना पड़ेगा।

मैसूरु और मांड्या में भी सड़कों पर किसान

गन्ना किसानों का यह असंतोष सिर्फ बेलगावी तक ही सीमित नहीं है। राज्य के अन्य हिस्सों जैसे मैसूरु और मांड्या में भी विरोध की आग फैल गई है। मैसूरु में किसानों ने उपायुक्त के कार्यालय में घुसने का प्रयास किया, जबकि मांड्या में कन्नड़ कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर किसानों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इन प्रदर्शनों के दौरान राज्य और केंद्र सरकारों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।

लगातार बढ़ता जा रहा है विरोध

पिछले कुछ हफ्तों से कर्नाटक में गन्ना किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। किसान केवल बैठकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे राज्य भर में पदयात्राएं निकाल रहे हैं, विरोध मार्च कर रहे हैं और राजमार्गों को अवरुद्ध कर रहे हैं। इससे पहले, पुणे-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग को किसानों ने 30 घंटे से अधिक समय तक जाम कर दिया था, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ था।

बातचीत की विफलता का सिलसिला

सरकार और किसानों के बीच गतिरोध कम होने का नाम नहीं ले रहा है। 26 अक्टूबर को बेलगावी के सुवर्ण विधान सौधा में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी, जिसमें सरकार, मिल मालिकों और किसान प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। उस दौरान सरकार ने मिल मालिकों से किसानों को 250 रुपये प्रति टन अतिरिक्त भुगतान करने का आग्रह किया था। खबरों के मुताबिक, मिल मालिकों ने इस प्रस्ताव को लागू करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई, जिसके बाद से किसानों का सरकार पर से भरोसा उठ गया है। वर्तमान में मंत्री सतीश जारकीहोली द्वारा मिल मालिकों के साथ फिर से बातचीत के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन किसान अब किसी भी छोटे समाधान के बजाय अपनी 5,500 रुपये प्रति टन की मांग पर अड़े हुए हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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