अमेरिका में लहराया परचम: 17 साल की रिद्धि चौहान बनीं NJROTC में बटालियन कमांडर विश्व एक महीने पहले 67
राजस्थान के जयपुर से जुड़ीं 17 वर्षीय रिद्धि चौहान ने अमेरिका में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जहां वे NJROTC प्रोग्राम में 300 कैडेट्स की कमान संभाल रही हैं।

अमेरिका में भारतीय मूल की बेटी का जलवा

आमतौर पर 17 साल की उम्र किशोरावस्था की मस्ती और स्कूल की पढ़ाई के बीच गुजरती है, लेकिन अमेरिका के न्यूयॉर्क में रहने वाली भारतीय मूल की रिद्धि चौहान ने इस उम्र में एक बड़ी जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई है। रिद्धि ने नेवी जूनियर रिजर्व ऑफिसर्स ट्रेनिंग कॉर्प्स यानी NJROTC में बटालियन कमांडर का पद हासिल कर मिसाल कायम की है। इस पद पर रहते हुए वे 300 कैडेट्स का नेतृत्व कर रही हैं, जो इस प्रोग्राम में छात्रों के लिए सर्वोच्च पद माना जाता है। रिद्धि वर्तमान में क्वींस के बेंजामिन एन. कार्डोजो हाई स्कूल में अपनी पढ़ाई कर रही हैं।

जयपुर से न्यूयॉर्क तक का सफर

रिद्धि चौहान का संबंध राजस्थान की राजधानी जयपुर से है। उनके पिता दिलीप चौहान और माता रुचिका हैं। हालांकि उनका परिवार अब न्यूयॉर्क में बस चुका है, लेकिन उनकी जड़ें भारत से जुड़ी हुई हैं। रिद्धि की एक बहन भी हैं जिनका नाम काहिनी गुप्ता चौहान है, जो चिकित्सा क्षेत्र में कार्यरत हैं। अपनी पढ़ाई और सैन्य ट्रेनिंग के बाद, रिद्धि अब नेवल एकेडमी प्रिपरेटरी स्कूल में दाखिला लेने की योजना बना रही हैं। यह उनके लिए यूनाइटेड स्टेट्स नेवल एकेडमी तक पहुँचने की दिशा में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है।

क्या है NJROTC प्रोग्राम

NJROTC एक ऐसा लीडरशिप प्रोग्राम है जिसे अमेरिकी नौसेना का पूरा समर्थन प्राप्त है। अमेरिका के विभिन्न हाई स्कूलों में संचालित होने वाला यह कार्यक्रम छात्रों के बीच अनुशासन, टीम भावना और चरित्र निर्माण पर विशेष जोर देता है। रिद्धि का मानना है कि इस प्रोग्राम ने उन्हें न केवल स्कूल स्तर पर योगदान देने का एक मौका दिया, बल्कि उनकी नेतृत्व क्षमता को भी निखारा है। उनका यह अनुभव भविष्य में एक कुशल नेवल ऑफिसर बनने के उनके लक्ष्य को पूरा करने में मददगार साबित होगा।

विभिन्न पदों पर निभाई जिम्मेदारी

बटालियन कमांडर जैसे उच्च पद तक पहुँचने के लिए रिद्धि ने इससे पहले भी कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई हैं। उन्होंने एकेडमिक कमांडर, STEM कमांडर, इंस्पेक्शन कमांडर और प्लाटून लीडर के रूप में अपनी योग्यता सिद्ध की है। विशेष रूप से एकेडमिक कमांडर के तौर पर, रिद्धि ने अपनी स्कूल टीम को लीडरशिप एंड एकेडमिक बाउल के दूसरे चरण तक पहुँचाया है। उनकी टीम ने नेशनल एकेडमिक एग्जाम में भी पहला स्थान हासिल कर गौरव बढ़ाया है, जिसे रिद्धि ने लगातार 2 वर्षों तक बनाए रखने में कामयाबी पाई है।

सी-पर्च रोबोट प्रोजेक्ट में बड़ी भूमिका

STEM कमांडर के पद पर रहते हुए रिद्धि ने अपनी तकनीकी कुशलता का भी परिचय दिया। उन्होंने कैडेट्स की एक बड़ी टीम का नेतृत्व करते हुए यूनिट का पहला सी-पर्च अंडरवॉटर रोबोट तैयार किया। इस चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट के दौरान, उन्होंने 200 से अधिक साथी कैडेट्स को प्रशिक्षित और निर्देशित किया। रिद्धि की यह उपलब्धि भारतीय मूल के लोगों द्वारा अमेरिका में किए जा रहे बेहतरीन कार्यों की एक और कड़ी है। इससे पहले भी अमेरिकी राजनीति और अन्य क्षेत्रों में भारतीय मूल के लोगों की सफलता की खबरें चर्चा में रही हैं।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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