कौन है मंजीत सिंह बेदी? FBI की मोस्ट वांटेड लिस्ट में नाम, 1.42 करोड़ का ईनाम घोषित अमेरिका 2 घंटे पहले 4
अमेरिका के खाद्य सहायता कार्यक्रम में करोड़ों की धोखाधड़ी करने के आरोपी मंजीत सिंह बेदी को पंजाब पुलिस ने जालंधर से गिरफ्तार कर लिया है। FBI ने उस पर 1.42 करोड़ रुपये का ईनाम रखा था।

मोस्ट वांटेड मंजीत सिंह बेदी की गिरफ्तारी

अमेरिका की प्रमुख खुफिया जांच एजेंसी FBI ने हाल ही में एक ऐसे जालसाज का पोस्टर सार्वजनिक किया था जो भारतीय मूल का नागरिक है। इस व्यक्ति का नाम मंजीत सिंह बेदी है। FBI ने बेदी पर 1.42 करोड़ रुपये का ईनाम घोषित किया था। हैरत की बात यह है कि इस पोस्टर के जारी होने के कुछ ही घंटों के भीतर पंजाब पुलिस ने उसे जालंधर से धर दबोचा। आखिर मंजीत सिंह बेदी ने ऐसा कौन सा अपराध किया था कि वह अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों की नजरों में आ गया और एफबीआई की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल हो गया। इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।

मंजीत सिंह बेदी कौन है और क्या है मामला?

मंजीत सिंह बेदी मूल रूप से पंजाब के जालंधर का रहने वाला है। वह काफी समय से अमेरिका में बस गया था। वहां वाशिंगटन के टैकोमा शहर में वह एशियन ग्रोसरी स्टोर नामक एक दुकान चलाता था। मंजीत का यह स्टोर अमेरिकी सरकार के सप्लीमेंटल न्यूट्रिशन असिस्टेंस प्रोग्राम यानी SNAP से जुड़ा हुआ था। यह कार्यक्रम अमेरिका में कम आय वाले परिवारों के लिए एक कल्याणकारी योजना है, जिसके माध्यम से सरकार उन्हें राशन और खाने-पीने का सामान खरीदने के लिए आर्थिक मदद देती है। इस योजना के लाभार्थियों को सरकार द्वारा इलेक्ट्रॉनिक बेनिफिट ट्रांसफर यानी EBT कार्ड और उनके साथ गुप्त पिन कोड दिए जाते हैं, जिनका उपयोग वे अधिकृत दुकानों पर ही कर सकते हैं।

धोखाधड़ी का तरीका और सरकारी खजाने को नुकसान

FBI और अमेरिकी न्याय विभाग की जांच में सामने आया है कि मंजीत सिंह बेदी ने अपनी किराने की दुकान को सरकारी योजना में हेराफेरी का मुख्य अड्डा बना रखा था। चार्जशीट के मुताबिक, यह फर्जीवाड़ा मार्च 2024 से जून 2025 के बीच बड़े पैमाने पर अंजाम दिया गया। इस पूरे घोटाले के तरीके को हम निम्नलिखित चरणों में समझ सकते हैं:

  • कार्ड जमा करना: SNAP योजना के लाभार्थियों को लालच देकर मंजीत उनसे उनके EBT कार्ड और पिन कोड अपने पास जमा करवा लेता था।
  • फर्जी ट्रांजेक्शन: मंजीत अपनी दुकान के पॉइंट ऑफ सेल यानी POS टर्मिनल का गलत इस्तेमाल करता था। वह उन EBT कार्डों से ऐसे ट्रांजेक्शन करता था जैसे कि किसी लाभार्थी ने असल में वहां से राशन या सामान खरीदा हो।
  • नकद की हेराफेरी: दुकान से कोई भी सामान बेचने के बजाय, मंजीत कार्ड में मौजूद सरकारी सहायता राशि को नकद में बदल देता था।
  • आधा-आधा का खेल: इसमें मंजीत का कमीशन बहुत अधिक होता था। यदि कोई लाभार्थी अपने कार्ड में 200 डॉलर यानी लगभग 19,000 रुपये की सरकारी सहायता राशि लेकर आता था, तो मंजीत उसे मात्र 100 डॉलर यानी लगभग 9,500 रुपये नकद देता था और बाकी के 100 डॉलर खुद अपनी जेब में रख लेता था।

अमेरिकी अधिकारियों का आकलन है कि इस संगठित घोटाले के जरिए मंजीत सिंह बेदी ने सरकारी खजाने को कम से कम 600,000 डॉलर यानी लगभग 5.7 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया है।

वायर फ्रॉड की गंभीर धाराएं क्यों लगीं?

अमेरिकी कानून के अंतर्गत मंजीत पर केवल SNAP फ्रॉड ही नहीं, बल्कि वायर फ्रॉड का भी गंभीर मामला दर्ज किया गया है। इसका कारण यह है कि जब भी वह अपनी दुकान पर EBT कार्ड स्वाइप करता था, तो बैंक खाते में भुगतान की मंजूरी और कार्ड को भुनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक संदेश राज्यों की सीमाओं के पार जाते थे। अंतरराज्यीय इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन तकनीकों के जरिए वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देने की वजह से उस पर वायर फ्रॉड की धाराएं भी लगाई गई हैं।

अमेरिका से भारत भागने की पूरी कहानी

अप्रैल 2026 में अमेरिकी अदालत ने मंजीत सिंह बेदी पर आधिकारिक रूप से वायर फ्रॉड और SNAP फ्रॉड के आरोप तय किए थे। उस समय कोर्ट ने उसे जमानत देते हुए कुछ सख्त शर्तें रखी थीं। उसे अपना पासपोर्ट जमा करना था और केस की सुनवाई पूरी होने तक वाशिंगटन से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। हालांकि, मंजीत ने इन सभी कानूनी शर्तों का उल्लंघन किया। एफबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, मंजीत सड़क मार्ग से अमेरिका-कनाडा सीमा को पार कर गया और वहां से भागकर अप्रैल 2026 में ही भारत पहुंच गया। अदालत के आदेशों की अवमानना के बाद 21 मई 2026 को वाशिंगटन के वेस्टर्न डिस्ट्रिक्ट के अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने उसके खिलाफ गैर-जमानती फेडरल गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। इसके बाद ही एफबीआई ने उसके बारे में जानकारी देने वाले के लिए 150,000 डॉलर यानी लगभग 1.42 करोड़ रुपये के ईनाम की घोषणा की थी।

पंजाब में गिरफ्तारी के मायने

FBI द्वारा वांटेड सूची जारी होने के फौरन बाद जालंधर पुलिस हरकत में आई। पुलिस कमिश्नर सतिंदर सिंह ने पुष्टि की है कि मंजीत को गुप्त सूचना मिलने पर यात्रा के दौरान पकड़ा गया। हालांकि, मंजीत की गिरफ्तारी केवल अमेरिका में किए गए अपराधों तक ही सीमित नहीं है। उस पर भारत में भी कई गंभीर मामले चल रहे हैं। उस पर पंजाब ट्रैवल प्रोफेशनल्स रेगुलेशन एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत धोखाधड़ी और विश्वासघात के मामले दर्ज हैं। पंजाब पुलिस अब इस बात की गहन जांच कर रही है कि भारत में रहने के दौरान वह किन-किन अवैध गतिविधियों में संलिप्त था और उसके अन्य नेटवर्क क्या थे। अमेरिकी केस और भारतीय मामलों के बीच की कड़ियां जोड़कर पुलिस कार्रवाई कर रही है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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