आर्थिक युद्ध क्या है? अमेरिका ईरान को कैसे देगा शिकस्त और डोनाल्ड ट्रंप की धमकी का क्या है मतलब अमेरिका 10 घंटे पहले 4
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के बजाय आर्थिक घेराबंदी की रणनीति तैयार की है, जिसके तहत डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान का साथ देने वाले देशों को कड़ी चेतावनी दी है।

अमेरिका की बदली हुई रणनीति

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। सैन्य मोर्चे पर वांछित सफलता न मिलने और युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन को वापस बुलाने के बाद, अमेरिका ने ईरान को हराने के लिए अब आर्थिक युद्ध का रास्ता अपनाया है। डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान और उसका समर्थन करने वाले देशों को गंभीर आर्थिक संकट की चेतावनी दी है। इस स्थिति ने वैश्विक कूटनीति में खलबली मचा दी है, क्योंकि ईरान ने भी जवाबी कदम उठाने की तैयारी कर ली है।

ईरान की प्रतिक्रिया और चेतावनी

ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने अमेरिकी प्रशासन के इस रुख पर कड़ा एतराज जताया है। मोहसिन रेजाई ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि कोई भी देश अमेरिका द्वारा छेड़े गए इस आर्थिक युद्ध में शामिल होता है, तो ईरान उसे अपना प्रत्यक्ष शत्रु मानेगा। यह बयान डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर दी गई उस धमकी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने ईरान का साथ देने वाले देशों को अब तक के सबसे खतरनाक और कठोर आर्थिक परिणाम भुगतने की बात कही थी।

आखिर आर्थिक युद्ध किसे कहते हैं

आर्थिक युद्ध वह स्थिति है जब दो या दो से अधिक देश बिना किसी टैंक, मिसाइल या सैन्य हथियार का उपयोग किए एक-दूसरे की अर्थव्यवस्था को निशाना बनाते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य विरोधी देश की वित्तीय संरचना को ध्वस्त करना, उसकी मुद्रा के मूल्य को नीचे गिराना और उसे वैश्विक स्तर पर पूरी तरह से अलग-थलग कर देना होता है। इसका अंतिम लक्ष्य देश की सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर करना होता है। इसका एक उदाहरण यूक्रेन द्वारा रूस की प्रमुख ऑनलाइन मार्केटिंग कंपनी वाइल्डबेरी के कार्यालयों और गोदामों को निशाना बनाना है, ताकि रूस की आर्थिक व्यवस्था पर दबाव बनाया जा सके।

आर्थिक युद्ध के प्रमुख अस्त्र

आर्थिक युद्ध के दौरान सैन्य हथियारों के स्थान पर निम्नलिखित वित्तीय साधनों और पैंतरों का इस्तेमाल किया जाता है:

  • आर्थिक प्रतिबंध: विरोधी देश के साथ हर प्रकार के व्यापार, आयात और निर्यात पर पूर्ण या आंशिक रूप से पाबंदी लगाना।
  • संपत्ति को फ्रीज करना: संबंधित देश की विदेशी बैंकों में जमा सरकारी और व्यक्तिगत पूंजी को ब्लॉक करना।
  • वित्तीय प्रणाली से बहिष्करण: अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग नेटवर्क जैसे SWIFT से उस देश को बाहर निकाल देना, जिससे उसका वैश्विक लेन-देन ठप हो जाए।
  • टैरिफ और सीमा शुल्क: विरोधी देश से आयातित वस्तुओं पर इतना अधिक टैक्स लगा देना कि उनकी बिक्री बाजार में असंभव हो जाए।
  • सेकेंडरी प्रतिबंध: जो देश या निजी कंपनियां पीड़ित देश के साथ व्यापारिक संबंध बनाए रखेंगी, उन पर भी प्रतिबंधों की तलवार लटकाना।

अमेरिका का ईरान पर दबाव

ईरान के साथ जारी सैन्य गतिरोध के 8 महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी अमेरिका उसे झुका पाने में असफल रहा है। अब अमेरिकी नीति का मुख्य केंद्र ईरान के तेल और गैस व्यापार को पूरी तरह से शून्य करना और उसे वैश्विक बैंकिंग नेटवर्क से काट देना है। डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चेतावनी का सीधा असर उन देशों पर पड़ सकता है जो ईरान से ऊर्जा संसाधन यानी तेल और गैस की खरीद करते हैं। विशेष रूप से भारत, चीन और रूस जैसे देशों के लिए यह एक बड़ी चुनौती हो सकती है, क्योंकि सेकेंडरी प्रतिबंधों का खतरा व्यापारिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है। अमेरिका की यह रणनीति अब इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अपने साथ कितनी मजबूती से खड़ा कर पाता है और ईरान इसे कैसे झेलता है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप