पश्चिम चंपारण के विजय गिरी ने किया कमाल, अपने खेतों में उगा रहे हैं धान की 15 दुर्लभ किस्में, 'संजीवनी' और 'मैजिक राइस' जैसे अनोखे चावल शामिल बिहार एक दिन पहले 4
बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के एक प्रगतिशील किसान विजय गिरी अपनी अनूठी खेती के कारण चर्चा में हैं। वे अपने खेतों में धान की 15 ऐसी दुर्लभ और औषधीय किस्में उगा रहे हैं जो न केवल स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं बल्कि कैंसर और डायबिटीज जैसी बीमारियों से लड़ने में भी मददगार हैं।

बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के रामनगर प्रखंड में रहने वाले विजय गिरी पारंपरिक खेती से अलग कुछ नया करने के लिए जाने जाते हैं। विजय गिरी पेशे से एक किसान हैं और लंबे समय से फसलों की ऐसी किस्मों पर काम कर रहे हैं जो अब बहुत कम देखने को मिलती हैं। धान की खेती में आमतौर पर किसान केवल एक या दो आम किस्मों का ही चयन करते हैं ताकि उन्हें बाजार में बेचना आसान हो, लेकिन विजय गिरी ने इस लीक से हटकर काम किया है। वे अपने खेतों में धान की 15 अलग-अलग किस्मों की खेती कर रहे हैं। इनमें से कई किस्में बेहद दुर्लभ और प्राचीन हैं, जिनके औषधीय गुण हैरान करने वाले हैं।

विजय गिरी की इस पहल ने कृषि जगत और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। शुरुआत में वे केवल दो या चार प्रकार के धान ही लगाया करते थे, लेकिन समय के साथ उन्होंने दुर्लभ अनाजों की उपयोगिता को समझा और अपने काम का दायरा बढ़ा दिया है।

'संजीवनी' चावल, सेहत के लिए वरदान

विजय गिरी के खेत में उगाई जाने वाली धान की किस्मों में सबसे अधिक चर्चा 'संजीवनी' चावल की हो रही है। इस विशेष धान को कृषि वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किया गया है। संजीवनी चावल को स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बेहद लाभकारी माना गया है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो डायबिटीज यानी मधुमेह की बीमारी से पीड़ित हैं। आमतौर पर डायबिटीज के मरीजों को चावल खाने से परहेज करने की सलाह दी जाती है, लेकिन संजीवनी चावल का सेवन वे बिना किसी डर के कर सकते हैं। इसके अलावा, इस चावल में विशेष प्रकार के फाइटो केमिकल्स पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, ये फाइटो केमिकल्स शरीर में कैंसर के सेल्स को पनपने से रोकते हैं और उन्हें नष्ट करने में सहायता करते हैं। इस तरह यह चावल कैंसर जैसी घातक बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम करने की क्षमता रखता है।

बिना आग और गर्म पानी के पकने वाला 'मैजिक राइस'

विजय गिरी के खेतों में एक और अनोखी फसल लहलहा रही है, जिसे 'मैजिक राइस' यानी जादुई चावल के नाम से जाना जाता है। इस चावल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे पकाने के लिए ईंधन, आग या गर्म पानी की आवश्यकता नहीं होती। सामान्य चावल को पकाने के लिए जहां खौलते हुए पानी की जरूरत होती है, वहीं मैजिक राइस को साधारण ठंडे पानी में रखकर ही आसानी से पकाया जा सकता है। यह धान मूल रूप से असम की एक पारंपरिक किस्म है। अब बिहार के साथ-साथ देश के कई अन्य राज्यों में भी प्रगतिशील किसान इसकी खेती का प्रयोग कर रहे हैं। यह चावल उन क्षेत्रों या परिस्थितियों में बेहद मददगार साबित हो सकता है जहां पारंपरिक ईंधन की कमी होती है।

खेतों में महक रही हैं धान की ये 15 अनोखी किस्में

संजीवनी और मैजिक राइस के अतिरिक्त, विजय गिरी अपने खेतों में धान की कई अन्य ऐतिहासिक और औषधीय किस्मों का उत्पादन कर रहे हैं। उनके द्वारा उगाई जा रही फसलों में निम्नलिखित मुख्य किस्में शामिल हैं:

  • अंबे मोहर: यह चावल अपनी बेहतरीन सुगंध के लिए जाना जाता है।
  • पर्पल नजारा: यह देखने में बेहद आकर्षक और बैंगनी रंग का होता है।
  • विष्णु भोग: एक अत्यंत प्राचीन और स्वादिष्ट चावल की किस्म।
  • आनंदी: स्वास्थ्य के लिए उत्तम मानी जाने वाली धान की किस्म।
  • काला बाटी: पारंपरिक और पौष्टिक तत्वों से भरपूर चावल।
  • हरा चावल, लाल चावल और काला चावल: ये रंगीन चावल फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं।
  • पार्वती चिन्नौर: मध्य भारत की एक मशहूर और सुगंधित किस्म।
  • बौना दूबराज: छोटे दाने वाला खुशबूदार चावल।
  • मोटन भोग और तालमाना सोना: पारंपरिक स्वाद और पोषण का बेजोड़ संगम।
  • वर्म भूसी: एक और दुर्लभ और पारंपरिक किस्म।

जलवायु और मिट्टी का विशेष संतुलन है जरूरी

किसान विजय गिरी का कहना है कि धान की इन औषधीय और प्राचीन किस्मों को उगाना इतना आसान भी नहीं है। इनमें से अधिकांश किस्में देश के अलग-अलग क्षेत्रों की जलवायु के अनुकूल विकसित हुई हैं। इनकी खेती के लिए खास तरह के वातावरण और मिट्टी के संतुलन की आवश्यकता होती है। इनमें से कई किस्में ऐसी हैं जिनमें प्राकृतिक रूप से एक बेहतरीन खुशबू पाई जाती है, जो पकने के बाद पूरे क्षेत्र को महका देती है। विजय गिरी ने कड़ी मेहनत और कृषि विशेषज्ञों की सलाह से इन सभी किस्मों को पश्चिम चंपारण की मिट्टी में सफलतापूर्वक उगाकर दिखा दिया है। उनकी यह कोशिश न केवल जैव विविधता को बचाने में मदद कर रही है, बल्कि पारंपरिक कृषि को एक नया जीवन भी दे रही है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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