सोमवार को शेयर बाजार में वेदांता की धूम! डिमर्जर के बाद लिस्ट होंगी 4 नई कंपनियां, निवेशकों की रहेगी पैनी नजर व्यापार एक महीने पहले 22
वेदांता लिमिटेड से अलग होकर बनी चार नई कंपनियां 15 जून से शेयर बाजार में स्वतंत्र रूप से कारोबार शुरू करेंगी, जिसके बाद ग्रुप की कुल पांच कंपनियां लिस्टेड हो जाएंगी। निवेशकों की खास नजर वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड के प्रदर्शन पर रहेगी।

भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार का कारोबारी सत्र खास अहमियत रखता है। मेटल और माइनिंग क्षेत्र के बड़े समूह वेदांता की लंबे समय से प्रतीक्षित डिमर्जर प्रक्रिया अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच गई है। इसके तहत वेदांता लिमिटेड से अलग हुई चार नई कंपनियां 15 जून से बाजार में स्वतंत्र रूप से ट्रेड करना शुरू कर देंगी। इस बदलाव के बाद वेदांता ग्रुप की कुल पांच कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध हो जाएंगी। निवेशकों के साथ-साथ बाजार के जानकारों की निगाहें खासतौर पर इन नए शेयरों की चाल पर टिकी रहेंगी।

डिमर्जर के बाद जिन चार कंपनियों को अलग पहचान मिलेगी, उनमें वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड, वेदांता पावर लिमिटेड, वेदांता एल्युमिनियम मेटल लिमिटेड और वेदांता आयरन एंड स्टील लिमिटेड शामिल हैं। दूसरी ओर, मूल कंपनी वेदांता लिमिटेड पहले की तरह बाजार में कारोबार करती रहेगी। कंपनी का मानना है कि हर कारोबार को अलग-अलग और स्वतंत्र तरीके से चलाने से निवेशकों को प्रत्येक क्षेत्र की असली क्षमता और वैल्यू का बेहतर लाभ मिल सकेगा।

वेदांता ऑयल एंड गैस पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस

इन नई कंपनियों में सबसे ज्यादा चर्चा वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड को लेकर है। यह कंपनी VOGL नाम से ट्रेड करेगी और जाने-माने Cairn ब्रांड के अंतर्गत अपना कारोबार संचालित करेगी। देश में तेल और गैस की लगातार बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए इसे आने वाले समय के एक बड़े ग्रोथ इंजन के तौर पर देखा जा रहा है। कंपनी ने लक्ष्य रखा है कि वित्त वर्ष 2028-29 तक वह अपना उत्पादन बढ़ाकर 1.5 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक के स्तर पर पहुंचाए।

44 ब्लॉक और 1.4 अरब बैरल का बड़ा भंडार

वेदांता ऑयल एंड गैस के पास राजस्थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश और असम जैसे कई राज्यों में मिलाकर कुल 44 तेल एवं गैस ब्लॉक मौजूद हैं। कंपनी के पास करीब 1.4 अरब बैरल ऑयल इक्विवेलेंट का संसाधन भंडार है, जो इसे देश की सबसे बड़ी निजी तेल और गैस कंपनियों की कतार में खड़ा करता है।

कैसा रहा कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन

हालांकि हाल के वित्तीय आंकड़ों में कुछ दबाव साफ दिखाई देता है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंपनी का राजस्व 3 फीसदी घटकर 2,583 करोड़ रुपये रह गया। वहीं EBITDA में 12 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई और यह घटकर 1,065 करोड़ रुपये पर आ गया। पूरे साल के स्तर पर भी कंपनी के रेवेन्यू और मुनाफे में थोड़ी कमी देखने को मिली है। भले ही ताजा नतीजों में कंपनी की कमाई और मुनाफे पर हल्का असर पड़ा हो, लेकिन निवेशकों को भरोसा है कि बड़े कारोबार और भविष्य की विस्तार योजनाओं के दम पर आगे चलकर इससे अच्छा फायदा मिल सकता है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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