लापता बबीता का मोबाइल लोकेशन ट्रैक, कैंप से महज 200 मीटर दूर तक चालू मिला फोन भारत 2 घंटे पहले 2
उत्तराखंड के दयारा बुग्याल ट्रेक के पास से गायब हुई एमबीए छात्रा बबीता पांडे की तलाश 13वें दिन भी जारी है। उसके मोबाइल की आखिरी लोकेशन गोई पड़ाव से करीब 200 मीटर नीचे मिली, पर अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा।

उत्तराखंड के दयारा बुग्याल ट्रेक के नजदीक से लापता हुई एमबीए की छात्रा बबीता पांडे का अब तक कोई पता नहीं चल सका है और उसके गायब होने के 13वें दिन भी खोजबीन का सिलसिला जारी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक बबीता के मोबाइल की आखिरी सक्रिय लोकेशन दयारा ट्रेक के पड़ाव गोई क्षेत्र से करीब 200 मीटर नीचे की ओर दर्ज की गई है। फोन की यह अंतिम लोकेशन मिल जाने के बाद भी जांच एजेंसियों को कोई पुख्ता सुराग नहीं मिल पाया है, जिसके चलते पूरा मामला और उलझता जा रहा है।

आखिरी लोकेशन के इर्द-गिर्द तेज हुई खोजबीन

एक ओर प्रशासन की कई टीमें संयुक्त अभियान के जरिए बबीता को खोजने में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस ने कोतवाली मनेरी में मामला दर्ज कर जांच आरंभ कर दी है। जांच में लगी एजेंसियां बबीता के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स और लोकेशन हिस्ट्री खंगालने के साथ-साथ उसके संपर्क में रहे लोगों से लगातार पूछताछ कर रही हैं।

हसीन वादियों में कहीं गुम तो नहीं हुई बबीता?

इसी बीच बबीता की एक तस्वीर सामने आई है। 29 तारीख की यह तस्वीर उसी कैंप के पास की है, जहां बबीता ठहरी हुई थी। दयारा बुग्याल की यात्रा पर निकली एमबीए छात्रा बबीता पांडे की यही आखिरी तस्वीर मानी जा रही है। इस तस्वीर में बबीता जिन खूबसूरत वादियों को निहार रही है, आज उन्हीं वादियों में देश की 6 बड़ी एजेंसियां उसकी तलाश में जुटी हैं। सर्च ऑपरेशन में लगी 120 लोगों की टीम में NDRF, SDRF, ITBP, NIM के पर्वतारोही, उत्तराखंड पुलिस, वन विभाग के कर्मी और स्थानीय ग्रामीण शामिल हैं। ये सभी नदी, तालाब और जंगलों की छानबीन में लगे हैं।

28 मई को दो दोस्तों संग सीसीटीवी में दिखी थी बबीता

मैनुअल तलाशी के अलावा ऊंची पहाड़ियों और इंसानी पहुंच से दूर के इलाकों में हेलीकॉप्टर और ड्रोन की मदद से एरियल सर्विलांस भी किया जा रहा है, जबकि डॉग स्क्वॉड की टीम भी सुराग तलाशने में जुटी है। जिस बबीता की खोज में इतनी बड़ी टीम लगी है, वह अपने दो दोस्तों के साथ 28 मई को रैथल गांव में रुकी थी और इसकी फुटेज सीसीटीवी में कैद हुई थी। इसके एक दिन बाद उन्होंने रैथल से दयारा बुग्याल के लिए ट्रेकिंग शुरू की और गोई बेस कैंप में रात गुजारी। लेकिन इसी कैंप से बबीता लापता हो गई और तभी से उसकी तलाश जारी है। जिस गोई कैंप के पास से वह गायब हुई थी, उसके आसपास के जंगलों, पहाड़ी इलाकों, सुनसान जगहों और जल स्रोतों की भी गहराई से तलाशी ली जा चुकी है, मगर अब तक कोई अहम सुराग हाथ नहीं लगा है।

ट्रेकिंग एजेंसी और गाइड पर कार्रवाई

जांच के दौरान ट्रेकिंग और कैंपिंग एजेंसी की लापरवाही भी उजागर हुई है। उत्तरकाशी के जिला पर्यटन अधिकारी ने संबंधित एजेंसी का लाइसेंस निलंबित कर दिया है और विभाग आगे की कार्रवाई भी कर रहा है। 23 साल की बबीता दो भाइयों की इकलौती बहन और परिवार की सबसे बड़ी संतान है। उसका बड़ा भाई हर्षित पांडे और मां उत्तरकाशी में बचाव टीमों के साथ मौजूद हैं, जबकि छोटा भाई तनुज पांडे, दादी और दिव्यांग पिता रामनगर में बबीता की सकुशल वापसी की राह देख रहे हैं।

क्यों मशहूर है दयारा बुग्याल ट्रेक?

उत्तरकाशी का जिस दयारा बुग्याल ट्रेक से बबीता लापता हुई है, वह उत्तराखंड के सबसे प्रसिद्ध अल्पाइन घास के मैदानों में गिना जाता है। सर्दियों में बर्फ की सफेद चादर और गर्मियों में दूर-दूर तक फैले हरे-भरे मैदान इसे देश-विदेश के सैलानियों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाते हैं। यहां से बंदरपूंछ, श्रीकंठ, द्रौपदी का डांडा और गंगोत्री पर्वतमाला के लुभावने नजारे दिखाई देते हैं। यही कारण है कि हर साल हजारों ट्रेकर इस इलाके का रुख करते हैं। बबीता भी उन्हीं सैलानियों में से एक थी, जो ट्रेकिंग के जरिए इस सुंदरता को और करीब से महसूस करना चाहती थी। मगर यहां पहुंचने के बाद वह लापता हो गई और 13वें दिन भी उसकी खोज जारी है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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