USS कोल पर हमला: यमन के एडन बंदरगाह पर जब दहल उठा था अमेरिकी जंगी जहाज, अल-कायदा के उस आत्मघाती धमाके की पूरी कहानी अमेरिका एक घंटा पहले 3
अक्टूबर 2000 में यमन के एडन बंदरगाह पर अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत USS कोल पर अल-कायदा ने एक भीषण आत्मघाती हमला किया था, जिसमें 17 अमेरिकी नाविकों की मौत हो गई थी।

यह घटना साल 2000 की है, जब यमन के तट पर एक ऐसी कयामत आई जिसने अमेरिकी नौसेना के इतिहास में सबसे काले पन्नों में से एक को दर्ज कर दिया। 12 अक्टूबर 2000 की वह सुबह यमन के एडन बंदरगाह पर बिल्कुल आम दिनों जैसी ही दिखाई दे रही थी। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले ही कुछ घंटों में वहां एक ऐसा भीषण आत्मघाती हमला होने वाला है, जो पूरी दुनिया को झकझोर कर रख देगा। अमेरिकी नौसेना के सबसे आधुनिक और शक्तिशाली मिसाइल डिस्ट्रॉयर युद्धपोतों में से एक, USS कोल को निशाना बनाकर किए गए इस हमले ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर कर दिया था।

एक सामान्य सुबह जो अचानक त्रासदी में बदल गई

उस दिन सुबह के करीब 9:30 बजे थे। अमेरिका में जिंदगी अपनी रफ्तार से चल रही थी। लोग दफ्तरों के लिए निकल रहे थे, बच्चे स्कूलों में जा चुके थे और सड़कों पर रोजाना की तरह चहल-पहल थी। उधर यमन के एडन बंदरगाह पर अमेरिकी जंगी जहाज USS कोल ईंधन लेने के लिए रुका हुआ था। इस विशाल युद्धपोत की कमान कमांडर किर्क लिपोल्ड के हाथों में थी। जहाज को बहुत ही सुरक्षित तरीके से बर्थ पर लगा दिया गया था।

इसके ठीक एक घंटे बाद, यानी सुबह 10:30 बजे जहाज में ईंधन भरने का काम शुरू किया गया। सैनिक और बंदरगाह के कर्मचारी अपने-अपने कामों में व्यस्त थे। कमांडर लिपोल्ड और उनके सहयोगी पूरी तरह से आश्वस्त थे कि सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं और कहीं से भी कोई खतरा नहीं है। ईंधन भरने की प्रक्रिया में समय लगता है, इसलिए सभी नौसैनिक अपनी ड्यूटी निभा रहे थे। समय तेजी से बीत रहा था और करीब 48 मिनट बीत चुके थे।

मुस्कुराते चेहरों के पीछे छिपा था मौत का जाल

घड़ी में सुबह के 11:18 मिनट हो रहे थे, तभी जंगी जहाज के बायीं तरफ पानी में एक छोटी सी फाइबरग्लास की नाव धीरे-धीरे आगे बढ़ती दिखाई दी। इस छोटी सी नाव पर दो युवक सवार थे। पहली नजर में वे बिल्कुल सामान्य स्थानीय नाविक लग रहे थे। उन्होंने जहाज पर तैनात अमेरिकी नौसैनिकों की तरफ देखा, मुस्कुराए और हाथ हिलाकर उनका अभिवादन किया। अमेरिकी सैनिकों को भी कोई शक नहीं हुआ, उन्होंने भी मुस्कुराते हुए उनके हाथ हिलाने का जवाब दिया।

लेकिन उस दोस्ताना मुस्कान के पीछे मौत का भयानक खेल छिपा था। सैनिक अभी सोच ही रहे थे कि यह छोटी नाव इतने विशाल युद्धपोत के इतने करीब क्यों आ रही है, कि अचानक सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर एक जोरदार धमाका हुआ। वह धमाका इतना भीषण था कि उसकी आवाज से पूरा बंदरगाह कांप उठा और आसमान में काले धुएं का एक विशाल गुबार छा गया।

विस्फोट का भयानक असर और मची चीख-पुकार

हमलावरों की उस छोटी सी नाव में लगभग 200 से 300 किलोग्राम बेहद शक्तिशाली विस्फोटक लदा हुआ था। जैसे ही वह नाव USS कोल के पतवार से टकराई, एक जबरदस्त ऊर्जा पैदा हुई। इस धमाके के कारण जंगी जहाज के बायीं तरफ पानी की सतह के ठीक पास करीब 40 फीट चौड़ा और लगभग 40 से 60 फीट ऊंचा एक विशाल गड्ढा यानी छेद हो गया।

धमाका उस वक्त हुआ जब कई नौसैनिक नीचे के डेक पर दोपहर का खाना खा रहे थे या अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। धमाके की चपेट में आते ही कई सैनिक पल भर में ही मौत की नींद सो गए। चारों तरफ सिर्फ चीख-पुकार, आग और अफरातफरी का माहौल था। जंगी जहाज का संतुलन पूरी तरह से बिगड़ चुका था और उसमें तेजी से पानी भरने लगा था। जहाज डूबने की कगार पर पहुंच गया था।

नौसैनिकों की बहादुरी और जान की बाजी

इस भीषण हमले में कुल 17 अमेरिकी नाविकों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 37 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थिति इतनी विकट थी कि जहाज किसी भी समय समुद्र में समा सकता था। लेकिन ऐसी विकट परिस्थितियों में भी बचे हुए चालक दल के सदस्यों ने अदम्य साहस और बहादुरी का परिचय दिया। वे अपनी जान की परवाह किए बिना आग बुझाने के काम में जुट गए।

नौसैनिकों ने सबसे पहले जहाज के भीतर तेजी से घुस रहे पानी को रोकने के लिए आपातकालीन कदम उठाए। उनकी मुस्तैदी और बहादुरी के कारण ही जहाज को डूबने से बचाया जा सका, हालांकि वे अपने 17 साथियों को बचाने में नाकाम रहे, जिसकी टीस आज भी अमेरिकी नौसेना को सालती है।

हमले की साजिश का पर्दाफाश: अल-कायदा का हाथ

इस हमले की खबर फैलते ही पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया। अमेरिकी प्रशासन तुरंत हरकत में आया और जांच एजेंसियां जांच में जुट गईं। शुरुआती जांच में ही यह साफ हो गया कि यह एक सुनियोजित आत्मघाती आतंकी हमला था। इसके बाद अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने मामले की गहराई से तफ्तीश की।

जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ कि इस हमले के पीछे खूंखार आतंकवादी संगठन अल-कायदा और उसके सरगना ओसामा बिन लादेन का हाथ था। उन्होंने ही इस आत्मघाती हमले की पूरी साजिश रची थी। जांच में एक और बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया:

  • इससे पहले जनवरी 2000 में भी अल-कायदा ने इसी एडन बंदरगाह पर एक अन्य अमेरिकी जंगी जहाज USS द सलिवन्स को निशाना बनाने की कोशिश की थी।
  • उस समय आतंकवादियों की नाव बहुत अधिक वजन होने के कारण पानी में डूब गई थी, जिससे उनका वह मनसूबा नाकाम हो गया था।
  • बाद में आतंकवादियों ने उसी नाव को पानी से बाहर निकाला, उसे सुधारा और उसी विस्फोटक का इस्तेमाल करके USS कोल पर यह सफल और घातक हमला किया।

यमन के एडन बंदरगाह पर हुआ यह हमला अमेरिकी इतिहास की उन दुखद घटनाओं में दर्ज है, जिसने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई की दिशा और दशा को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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