होर्मुज जलडमरूमध्य पर डोनाल्ड ट्रंप के दावे का ईरान ने उड़ाया मजाक, कहा 7000 मील दूर के सपने न देखें
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3 घंटे पहले
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तनाव की नई कड़ी
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे सैन्य टकराव को करीब छह महीने का समय बीत चुका है। इस युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए संयुक्त हमलों से हुई थी, जिसने अब एक बेहद संवेदनशील और तनावपूर्ण रुख अख्तियार कर लिया है। इस पूरे संघर्ष का केंद्र बिंदु अब होर्मुज जलडमरूमध्य यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बन गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस रणनीतिक जलमार्ग पर बार-बार अपना अधिकार जता रहे हैं, जबकि ईरान का स्पष्ट कहना है कि यह क्षेत्र उनका था और हमेशा उनका ही रहेगा। इस घमासान के बीच ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रेज़ाई ने ट्रंप के दावों का उपहास उड़ाते हुए कहा कि होर्मुज को फिर से खोलने में अमेरिका की विफलता और उस पर अपने नियंत्रण का दावा करने के बीच का अंतर 7,000 मील की उस दूरी से भी कहीं ज्यादा है, जो अमेरिका की राजधानी को होर्मुज से अलग करती है।
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेज़ाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी नाराजगी और कटाक्ष जाहिर किया। उन्होंने लिखा कि अमेरिका का होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने में विफल रहना और फिर उसी पर अपना प्रभुत्व जताना, इन दोनों के बीच का फासला 7,000 मील की दूरी से भी अधिक है। रेज़ाई ने आगे कहा कि फारस की खाड़ी में अब अमेरिका के दबदबे के बाद का दौर यानी पोस्ट-अमेरिकन ऑर्डर शुरू हो चुका है और अमेरिका को इस हकीकत को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने एक नक्शा भी साझा किया, जिसमें कैप्शन दिया कि कुछ सपने वास्तविक धरातल से बहुत दूर होते हैं। इस तरह उन्होंने ट्रंप द्वारा इस जलमार्ग को नया अमेरिकी इलाका घोषित करने के कदम को सिरे से खारिज कर दिया।
प्रशासनिक बदलाव और पृष्ठभूमि
उल्लेखनीय है कि मोहसेन रेज़ाई, जो ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के पूर्व कमांडर रह चुके हैं, उन्हें इसी महीने की शुरुआत में सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का सचिव नियुक्त किया गया है। उन्होंने इस पद पर मोहम्मद बाघेरी ज़ोलग़द्र की जगह ली है।
ट्रंप की चेतावनी और तेल आपूर्ति का संकट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ट्रुथ सोशल पर एक नक्शा पोस्ट किया, जिसमें होर्मुज को अमेरिका का नया इलाका बताया गया है। इसके जरिए उन्होंने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर कब्जा करने की अपनी धमकी को दोबारा दोहराया। गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का सबसे अहम मार्ग है। दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का करीब पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। युद्ध छिड़ने के बाद से ही ईरान ने इस जलमार्ग को बंद कर रखा है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग सेवा पूरी तरह बाधित है और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर संकट पैदा हो गया है।
ईरान की शर्तें और कतर की मध्यस्थता
ईरान ने अपना रुख कड़ा रखते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमेरिका उसकी प्रमुख मांगें नहीं मान लेता, तब तक होर्मुज को नहीं खोला जाएगा। इन मांगों में ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी खत्म करना, तेल पर लगे प्रतिबंध हटाना, जब्त की गई ईरानी संपत्ति को जारी करना और युद्ध के नुकसान की भरपाई करना शामिल है। वहीं दूसरी ओर, कतर के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज को लेकर एक समझौते का समर्थन करता है। कतर का मानना है कि इस तरह का समझौता दोनों देशों के बीच रुकी हुई बातचीत को दोबारा शुरू करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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