ईरान ने अमेरिका के सामने फिर रखीं अपनी शर्तें, अराघची बोले- समझौता दो चरणों में होगा विश्व 2 घंटे पहले 2
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने प्रस्तावित शांति समझौते का खाका पेश करते हुए कहा कि यह दो चरणों में पूरा होगा और होर्मुज़ पर ईरान की संप्रभुता समेत कई शर्तों को अमेरिका को मानना होगा। उनके मुताबिक समझौते को कुछ ही दिनों में अंतिम रूप दिया जा सकता है।

ईरान और अमेरिका एक शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़ते दिख रहे हैं, मगर इसके लिए वॉशिंगटन को तेहरान की रखी गई शर्तों पर सहमत होना पड़ेगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने प्रस्तावित समझौते का विस्तृत ब्योरा साझा करते हुए दावा किया कि इसे महज कुछ दिनों में अंतिम रूप दिया जा सकता है। "इस्लामाबाद मेमोरैंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग" नाम के इस समझौते को लेकर उन्होंने कहा कि यह फ्रेमवर्क समझौता दोनों देशों के बीच जारी टकराव को समाप्त करेगा, आगे की बातचीत का रास्ता खोलेगा तथा समुद्री सुरक्षा से लेकर प्रतिबंधों में नरमी तक के मसलों को सुलझाएगा।

अराघची ने स्पष्ट किया कि अब तक अमेरिका और ईरान के बीच किसी अंतिम समझौते पर दस्तखत नहीं हुए हैं। उन्होंने अमेरिका के समक्ष एक बार फिर उन अहम प्रावधानों को दोहराया, जो उनके अनुसार इस पूरे समझौते की बुनियाद बनेंगे।

ईरान की शर्तें क्या हैं

  • अराघची ने ट्रंप को उनकी शर्तें याद दिलाते हुए कहा कि प्रस्तावित समझौता एक व्यापक राजनयिक प्रक्रिया का सिर्फ पहला चरण है। उन्होंने आगाह किया कि दोनों देशों के बीच भविष्य की बातचीत इसके सफल अमल पर टिकी रहेगी। उनके अनुसार, तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा को वार्ता के दूसरे चरण तक टालने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा, "मुझे यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह बातचीत, जिससे युद्ध समाप्त होगा, दो चरणों में होगी।"
  • उनके मुताबिक परमाणु समझौते को पहले चरण के मेमोरेंडम में रखा गया है, जबकि परमाणु से जुड़े अधिक जटिल मुद्दों पर बातचीत दूसरे चरण के लिए स्थगित कर दी गई है, जिसके 60 दिनों तक चलने की उम्मीद है। उनकी बातों से संकेत मिलता है कि यदि शुरुआती समझौता सही ढंग से लागू नहीं हुआ, तो परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शायद कभी शुरू ही न हो।
  • ईरान की एक प्रमुख शर्त यह है कि होर्मुज़ में युद्ध से पहले वाली स्थिति बहाल नहीं की जाएगी। यह साफ संदेश है कि रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज़ जलडमरूमध्य में हालात वैसे नहीं रहेंगे जैसे टकराव से पहले थे। गौरतलब है कि दुनिया के तेल की एक बड़ी आपूर्ति इसी जलमार्ग से होती है और युद्ध के दौरान यह क्षेत्र तनाव का केंद्र बना रहा। अराघची ने मेमोरेंडम की मुख्य बातों का जिक्र करते हुए कहा, "इसमें होर्मुज़ से जुड़े मामले और समुद्री पाबंदियों को हटाने जैसी बातें भी शामिल हैं।"
  • ईरान का कहना है कि होर्मुज़ पर उसकी संप्रभुता का सम्मान होना चाहिए। अराघची ने बातचीत के दौरान बार-बार संप्रभुता की अहमियत पर जोर दिया और इसे समझौते के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक बताया। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि 47 साल बाद यह पहली बार है, जब अमेरिका ने इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान की संप्रभुता के प्रति साफ तौर पर सम्मान जताया है और इसका जिक्र करते हुए इसे लिखित रूप में भी दर्ज किया है।"
  • अराघची के अनुसार, संप्रभुता के लिए परस्पर सम्मान इस प्रस्तावित समझौते की एक बुनियाद है। उन्होंने कहा, "यह समझौता ईरान के आंतरिक मामलों में दखल न देने का वादा करता है और हमसे भी उनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का वादा मांगता है। यह पूरी तरह बराबरी के आधार पर है।"
  • उन्होंने संकेत दिया कि किसी भी समझौते के बाद समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में तेहरान सीधी भूमिका निभाने को तैयार है। ईरान ने जताया है कि संघर्ष समाप्त करने और समुद्री प्रतिबंध हटाने से जुड़ी व्यवस्थाओं के तहत वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा।
  • प्रस्तावित समझौते का एक और अहम हिस्सा विदेशों में फंसी ईरान की संपत्ति से जुड़ा है। अराघची ने बताया कि वार्ताकारों ने इस मसले को सुलझाने का एक तरीका पहले ही तय कर लिया है। उन्होंने कहा, "ईरान के रुके हुए फंड का भी मुद्दा है, जिसके लिए एक तरीका तय किया गया है।" रुके हुए फंड को जारी करना लंबे समय से तेहरान की प्रमुख मांग रही है और उम्मीद है कि यह प्रतिबंधों में ढील तथा आर्थिक पुनर्निर्माण पर होने वाली व्यापक बातचीत का हिस्सा बनेगा। इसके बाद वार्ता में पुनर्निर्माण और विकास से जुड़े कदम भी शामिल किए जाएंगे।
चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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