बुशहर न्यूक्लियर प्लांट पर अमेरिकी हमले के दावों पर मचा बवाल, ईरान ने दिया यह जवाब विश्व एक महीने पहले 67
ईरान के बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट पर अमेरिकी हमले की खबरों के बीच ईरानी अधिकारियों ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। साथ ही, ईरान ने अमेरिका पर युद्ध समझौते के उल्लंघन और गंभीर युद्ध अपराध करने का आरोप लगाया है।

बुशहर पावर प्लांट पर हमलों की चर्चा और ईरान का खंडन

मेहर न्यूज़ एजेंसी ने हाल ही में बुशहर के समीप धमाकों की आवाज़ें सुनाई देने की रिपोर्ट दी थी, जिसके बाद यह चर्चा तेज़ हो गई कि अमेरिका ने बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट को निशाना बनाया है। ऐसी खबरें भी सामने आईं कि मिसाइलों के अवशेष सीधे न्यूक्लियर फैसिलिटी पर आकर गिरे। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने इन तमाम दावों को पूरी तरह से नकार दिया है। बुशहर के गवर्नर मोहम्मद मुज़फ़्फ़री ने इन खबरों का खंडन करते हुए कहा कि भले ही आज सुबह क्षेत्र में हमले हुए हों, लेकिन किसी भी स्थिति में न्यूक्लियर प्लांट को निशाना नहीं बनाया गया है।

खारग द्वीप और बुशहर की स्थिति

ईरानी मीडिया और आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, यह खबरें भी निराधार हैं कि अमेरिका ने खारग द्वीप पर कोई हमला किया है। यह द्वीप बुशहर प्रांत के तट के बेहद करीब स्थित है और ईरान के कच्चे तेल के निर्यात में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश के 90 प्रतिशत कच्चे तेल की प्रोसेसिंग इसी स्थान से की जाती है। ISNA न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, मोहम्मद मुज़फ़्फ़री ने स्पष्ट किया कि बुशहर और खारग द्वीप, दोनों ही जगहों पर किसी भी प्रकार की घटना नहीं हुई है।

बुशहर न्यूक्लियर प्लांट का महत्व

बुशहर स्थित न्यूक्लियर प्लांट का निर्माण करीब 20 साल पहले रूसी विशेषज्ञों और कर्मचारियों की मदद से किया गया था। गौरतलब है कि अमेरिका और इज़राइल के बीच चल रहे सैन्य तनाव के दौरान भी बुशहर उन चुनिंदा स्थानों में शामिल नहीं था जिन पर बमबारी की गई थी। उस दौरान नतांज़, फोर्डो और इस्फ़हान की परमाणु सुविधाओं पर अमेरिकी B-2 बॉम्बर विमानों के ज़रिए हमला किया गया था, लेकिन बुशहर सुरक्षित रहा। उस समय भी वहां रूसी तकनीकी कर्मचारी तैनात थे। वर्तमान में तेहरान के अधिकारी जोर देकर कह रहे हैं कि बुशहर के पावर प्लांट को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।

चीन-ईरान रेल कॉरिडोर पर असर

फार्स न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी हवाई हमलों में ईरान के उत्तरी प्रांत गोलेस्तान का 'अक ताक़ेह खान' रेलवे पुल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। यह पुल तेहरान और ईरान के सबसे बड़े व्यापारिक साझीदार चीन के बीच व्यापारिक संपर्क के लिए बेहद अहम माना जाता है। अमेरिकी नाकेबंदी के दौरान जब ईरान के बंदरगाहों का उपयोग सीमित हो जाता है, तब रूस को माल भेजने के लिए भी इसी मार्ग का सहारा लिया जाता है। यह रास्ता तुर्कमेनिस्तान और कज़ाकिस्तान के रास्ते चीन तक जाता है। फार्स का कहना है कि प्रशासन जल्द ही पुल की मरम्मत का कार्य शुरू कर उसे बहाल कर देगा।

युद्ध समझौते के उल्लंघन का आरोप

ईरान ने अपने क्षेत्र पर हुए इन अमेरिकी हमलों को एक 'गंभीर युद्ध अपराध' करार दिया है। ईरान ने वॉशिंगटन पर उस अंतरिम समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है, जिसका उद्देश्य युद्ध को समाप्त करना था। ईरानी विदेश मंत्रालय ने मशहद शहर की ओर जाने वाली लाइन पर स्थित रेलवे पुलों और दक्षिणी तटीय प्रांतों पर हुए हवाई हमलों की कड़ी निंदा की है। मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि ये हमले युद्ध खत्म करने वाले समझौते (MoU) की धारा 1 और 5 का सीधा उल्लंघन हैं। ज्ञात हो कि बुधवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया था कि यह समझौता अब खत्म हो चुका है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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