ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का दूसरा दिन, हमले में 2 लोगों की गई जान विश्व एक महीने पहले 86
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है, जहां लगातार दूसरे दिन अमेरिकी बमबारी में दो लोगों की मौत की खबर है और शांति वार्ता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

तेहरान और वाशिंगटन के बीच बढ़ता सैन्य संघर्ष

ईरान के खिलाफ अमेरिका का सैन्य अभियान लगातार दूसरे दिन भी पूरी तीव्रता के साथ जारी है। सोमवार को हुए ताज़ा हवाई हमलों ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 2 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। गौरतलब है कि रविवार को भी अमेरिकी सेना ने ईरान के विभिन्न सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को अपना निशाना बनाया था।

अबादान और बंदर अब्बास में भारी तबाही

ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम ने खुज़ेस्तान प्रांत के डिप्टी गवर्नर के हवाले से बताया कि स्थानीय समयानुसार सोमवार दोपहर करीब 1:45 बजे दक्षिण-पश्चिमी ईरान के अबादान शहर में तीन अलग-अलग स्थानों पर जोरदार धमाके हुए। इस हमले के कारण जान-माल का बड़ा नुकसान हुआ है, जिसमें 2 नागरिकों की मौत और 3 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

वहीं, मेहर समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिणी ईरान के तटीय शहर बंदर अब्बास और क़ेश्म द्वीप के पास भी बड़े धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका अब अपनी रणनीति बदल चुका है और हमलों का दायरा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के तटीय इलाकों से निकलकर ईरान के भीतरी हिस्सों तक पहुंच गया है।

शांति वार्ता और राजनयिक प्रयासों पर गहरा संकट

इस सैन्य टकराव ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही सभी राजनयिक कोशिशों को पूरी तरह विफल कर दिया है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका इन हमलों के जरिए ओमान के माध्यम से हो रही शांति वार्ता को जानबूझकर कमजोर कर रहा है। इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से समुद्री जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाना था। दोनों देशों के बीच 60 दिनों के भीतर समझौता करने की समय-सीमा तय की गई थी, लेकिन ताजा हालात ने इस पूरे कूटनीतिक प्रक्रिया को पटरी से उतार दिया है।

ईरान ने लगाया अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन का आरोप

ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की इस आक्रामक सैन्य नीति की तीखी आलोचना की है। मंत्रालय का कहना है कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूलभूत सिद्धांतों का उल्लंघन है। सोमवार को जारी अपने आधिकारिक बयान में मंत्रालय ने कहा कि बीते 24 घंटों में अमेरिकी सेना ने ईरान के परिवहन ढांचे, मछली पकड़ने वाली नौकाओं, कार्गो जहाजों, मौसम संबंधी सुविधाओं और महत्वपूर्ण इमारतों को निशाना बनाया है।

यह कार्रवाई उस समझौते यानी MOU के प्रावधानों का खुला उल्लंघन है, जिस पर हस्ताक्षर हुए अभी सिर्फ 25 दिन ही बीते हैं। दरअसल, हाल ही में ईरान की IRGC द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने के ऐलान के तुरंत बाद रविवार को अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी थी। बंदर अब्बास और सिरिक शहरों में हुए धमाकों के पीछे अमेरिका का तर्क यह है कि ईरान की सेना ने साइप्रस के झंडे वाले एक जहाज पर हमला किया था।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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