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एक घंटा पहले
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ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख अपना रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ एक बड़े हमले की चेतावनी जारी की है। इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में रह रहे अपने नागरिकों से वहां से निकलने या सुरक्षित रहने के लिए तत्पर रहने को कहा है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा एडवाइजरी में स्पष्ट किया गया है कि आने वाले दिनों में क्षेत्र की स्थिति और अधिक खराब हो सकती है, जिसके कारण कई एयरलाइंस अपनी उड़ानें रद्द करने के लिए मजबूर हो सकती हैं।
ईरान द्वारा कुवैत में किए गए ड्रोन हमलों और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त लहजे का इस्तेमाल किया है। दूसरी ओर, इजरायल ने भी गाजा और लेबनान में सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। हालांकि, हमास ने अमेरिका की मध्यस्थता में युद्धविराम के लिए सहमति जताई थी और अपने हथियार छोड़ने की पेशकश भी की थी, लेकिन जमीनी हकीकत में तनाव कम होने के बजाय और अधिक बढ़ गया है।
मिडिल ईस्ट में सुरक्षा स्थिति के बिगड़ने की आशंका
अमेरिकी विदेश विभाग ने एक आधिकारिक सुरक्षा निर्देश जारी करते हुए कहा कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति बेहद नाजुक और जटिल बनी हुई है, जो किसी भी वक्त गंभीर रूप से बिगड़ सकती है। इस सलाह में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकियों को बहुत अधिक सतर्क रहने और यात्रा के दौरान संभावित व्यवधानों, उड़ान रद्द होने या हवाई क्षेत्र के अचानक बंद होने के लिए पूरी तरह तैयार रहने का आग्रह किया गया है। विदेश विभाग के बयान में कहा गया है कि मिडिल ईस्ट में रह रहे अमेरिकी नागरिकों को वहां से निकलने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। यदि हालात और तनावपूर्ण होते हैं, तो उन्हें त्वरित निकासी के लिए हर समय तैयार रहना होगा।
राजनयिकों और संस्थानों पर खतरे की चेतावनी
सुरक्षा सलाह के अनुसार, जो अमेरिकी नागरिक अभी इस क्षेत्र से बाहर हैं, उन्हें मध्य पूर्व की यात्रा न करने की सख्त हिदायत दी गई है। विदेश विभाग का मानना है कि ईरान और उसके साथ जुड़े क्षेत्रीय सहयोगी वैश्विक स्तर पर अमेरिकी राजनयिक केंद्रों, व्यावसायिक संस्थानों और अन्य परिसंपत्तियों को निशाना बना सकते हैं। तेहरान ने हाल के समय में अपने आक्रामक हमलों का विस्तार उन देशों तक किया है जो पहले सुरक्षित माने जाते थे, जैसे कि मिस्र।
अमेरिकी नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी तरह के सार्वजनिक प्रदर्शनों से दूर रहें, क्षेत्रीय समाचारों पर बारीक नजर रखें और अमेरिका से संबंधित स्थलों के निकट अतिरिक्त सावधानी बरतें। साथ ही, उन्हें आपातकालीन योजनाओं को अपडेट रखने और सुरक्षा अपडेट के लिए 'स्मार्ट ट्रैवलर एनरोलमेंट प्रोग्राम' में पंजीकरण कराने का निर्देश दिया गया है। इसी के तहत, अबू धाबी स्थित अमेरिकी दूतावास और दुबई स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास से गैर-जरूरी कर्मचारियों को संयुक्त अरब अमीरात से बाहर भेजने का आदेश जारी कर दिया गया है।
ट्रंप की दोटूक: अमेरिका सिर्फ जीतना चाहता है
राष्ट्रपति आवास में आयोजित कैबिनेट बैठक के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए कि अमेरिका ईरान के विरुद्ध एक लंबे और निर्णायक सैन्य अभियान के लिए पूरी तरह तैयार है। डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा, हम सिर्फ जीतना चाहते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका ईरान पर तब तक कड़े प्रहार जारी रखेगा, जब तक ईरान अमेरिकी हमलों का सामना करने में सक्षम होगा।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने तेहरान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान ने पिछले महीने उस समझौता ज्ञापन का उल्लंघन किया है, जिसके तहत अस्थायी रूप से युद्ध को रोकने पर सहमति बनी थी। कैरोलिन लीविट ने कहा, ईरान ने अमेरिका के साथ समझौता किया और फिर उसका उल्लंघन किया। उन्होंने हमारे वाणिज्यिक जहाजों पर गोलियां चलाईं और अमेरिकी सैनिकों को मारा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस तरह के आतंकवादी कृत्यों को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान पर हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक वह सार्थक बातचीत के लिए तैयार नहीं हो जाता।
इजरायल की बमबारी से बढ़ा क्षेत्रीय तनाव
इजरायल ने हाल ही में मध्य और उत्तरी गाजा में व्यापक बमबारी की है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव की आग और भड़क गई है। इससे पहले अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और हमास के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें हमास ने हथियार डालने की इच्छा जताई थी। लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर इजरायल द्वारा किए गए हमलों ने इस शांति प्रक्रिया को लगभग खत्म कर दिया है। इजरायल ने हमास के इस प्रस्ताव पर औपचारिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर ने इस समझौते को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने दोटूक कहा है कि यह समझौता स्वीकार्य नहीं है और इजरायल को इस युद्ध में पूर्ण जीत हासिल करनी ही होगी।
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