बिहार
एक घंटा पहले
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विचारों
खेती में बदलती तस्वीर और उर्मिला देवी का योगदान
बिहार की माटी में खेती-बाड़ी का इतिहास काफी पुराना रहा है। एक दौर था जब कृषि कार्यों को मुख्य रूप से पुरुषों का काम माना जाता था, लेकिन वक्त के साथ यह सोच पूरी तरह बदल चुकी है। आज महिलाएं कृषि क्षेत्र में न केवल अपना योगदान दे रही हैं, बल्कि अपनी मेहनत और समझदारी से इसे और अधिक लाभदायक भी बना रही हैं। जहानाबाद जिले की रहने वाली उर्मिला देवी इसी बदलाव की एक सशक्त मिसाल बनकर उभरी हैं। वह न सिर्फ एक सफल किसान के रूप में पहचानी जा रही हैं, बल्कि स्मार्ट फार्मिंग के जरिए कम जगह में ज्यादा मुनाफा कमाने का हुनर भी सिखा रही हैं।
मीरा बिगहा की अनोखी खेती
उर्मिला देवी घोसी प्रखंड के मीरा बिगहा गांव की निवासी हैं। उनके पास खेती के लिए 1 एकड़ जमीन है, जिसे उन्होंने अपनी आमदनी का मुख्य जरिया बनाया है। इस खेती में उनकी सबसे बड़ी ताकत उनके पति का साथ है। पति-पत्नी दोनों मिलकर खेत के अलग-अलग हिस्सों की जिम्मेदारी संभालते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि उन्हें बाहर से किसी मजदूर को रखने की जरूरत नहीं पड़ती। नतीजतन, खेती से होने वाली पूरी कमाई घर की बचत में जुड़ जाती है। फिलहाल, उन्होंने अपने खेत के लगभग 15 कट्ठा हिस्से में विभिन्न प्रकार की सब्जियों की बुवाई की है।
मचान विधि और उन्नत तकनीक का कमाल
उर्मिला देवी ने खेती में आधुनिक 'मचान विधि' को अपनाया है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक का विचार उन्हें घोसी स्थित कृषि कार्यालय से मिला था। उनका कहना है, 'हमने एक ही खेत में बरसात के मौसम के अनुकूल सब्जियां उगाई हैं, जिसमें कद्दू, करेला, नेनुआ और खीरा प्रमुख हैं। मचान तकनीक के इस्तेमाल से कम जगह में एक साथ चार अलग-अलग तरह की फसलें उगाना मुमकिन हो पाया है।' एक ही खेत से चार प्रकार की फसलें लेने का सीधा असर उनकी आय पर पड़ता है, क्योंकि इससे उन्हें अलग-अलग समय पर अलग-अलग आमदनी प्राप्त होती रहती है।
6 महीने तक कमाई का चक्र
खेती के इस मॉडल का सबसे बड़ा लाभ यह है कि फसलें अलग-अलग समय पर तैयार होती हैं, जिससे घर के खर्चों के लिए 6 महीने तक पैसों की कोई कमी नहीं रहती। उर्मिला देवी ने फसलों के तैयार होने का गणित भी समझाया:
- खीरा: यह मात्र 35 दिनों में फल देना शुरू कर देता है।
- नेनुआ: इसकी फसल 45 दिनों में तैयार हो जाती है।
- कद्दू: यह लगभग 50 दिनों में फल देने लगता है।
- करेला: इसकी फसल तैयार होने में करीब 60 दिन लगते हैं।
इस योजनाबद्ध तरीके से बोई गई फसलें लगातार दो महीने तक मुनाफा देती रहती हैं। विशेषकर बरसात के मौसम में इन सब्जियों की बाजार में मांग बहुत अधिक रहती है, जिससे उन्हें अच्छी कीमत मिल जाती है।
मेहनत का जज्बा और आत्मनिर्भरता
उर्मिला देवी का दिन बहुत व्यस्त रहता है। वह और उनके पति खुद ही खेत में फसलों की तुड़ाई करते हैं। इसके बाद सब्जियों को गाड़ी पर लादकर इस्लामपुर मंडी तक पहुंचाने का काम उनके पति करते हैं। वे बताती हैं कि उनका पूरा दिन खेत में ही बीतता है। अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए, वह अपने बच्चों को स्कूल भेजकर उनकी पढ़ाई का ध्यान भी रखती हैं। इस तरह उर्मिला देवी न केवल खेती में दक्षता दिखा रही हैं, बल्कि अपने परिवार को एक बेहतर भविष्य देने के लिए आत्मनिर्भरता का मार्ग भी प्रशस्त कर रही हैं।
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