पूर्वोत्तर में सड़क नेटवर्क की बड़ी सौगात: 630 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे बनाएगी सरकार, ₹61500 करोड़ का होगा निवेश व्यापार एक घंटा पहले 3
केंद्र सरकार पूर्वोत्तर भारत में कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने जा रही है, जिसके तहत 630 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के निर्माण पर ₹61,500 करोड़ खर्च किए जाएंगे।

पूर्वोत्तर भारत में कनेक्टिविटी की नई शुरुआत

भारत सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना की रूपरेखा साझा की है। इस योजना के अंतर्गत सिलिगुड़ी, गुवाहाटी और शिलॉन्ग को एक विशाल 630 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के जरिए आपस में जोड़ा जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कुल ₹61,500 करोड़ का निवेश किया जाना है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य न केवल यात्रा के समय में कटौती करना है, बल्कि सामरिक दृष्टि से संवेदनशील नॉर्थ-ईस्ट क्षेत्र की पहुंच को शेष भारत से और अधिक सुगम बनाना है।

सिलिगुड़ी से गुवाहाटी तक बनेगा नया मार्ग

असम में एक कार्यक्रम के दौरान नितिन गडकरी ने बताया कि इस कॉरिडोर का शुरुआती चरण सिलिगुड़ी और गुवाहाटी को जोड़ने का कार्य करेगा। लगभग 400 किलोमीटर लंबे इस खंड के निर्माण और सुधार पर ₹30,000 करोड़ की लागत आएगी। फिलहाल इस रूट के लिए मंजूरी की प्रक्रिया जारी है। यह मार्ग अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि सिलिगुड़ी कॉरिडोर को 'चिकन नेक' के नाम से जाना जाता है, जो पूर्वोत्तर राज्यों और देश के अन्य हिस्सों के बीच संपर्क की एकमात्र कड़ी है।

गुवाहाटी और शिलॉन्ग की दूरी में भारी कमी

परियोजना की खासियतों में गुवाहाटी के पास स्थित जोरबाट से मेघालय के बारापानी तक बनने वाला नया ग्रीनफील्ड हाईवे शामिल है। इस सड़क के बनने से इन दो प्रमुख शहरों के बीच की दूरी 100 किलोमीटर से घटकर महज 66 किलोमीटर रह जाएगी। वर्तमान में इस सफर को पूरा करने में लगभग ढाई घंटे का समय लगता है, जो नई सड़क के बाद घटकर मात्र एक घंटे तक सिमट जाएगा।

शिलॉन्ग से सिलचर का सफर भी होगा आसान

इस बड़े कॉरिडोर का एक अन्य अहम हिस्सा शिलॉन्ग और सिलचर को जोड़ने वाला 165 किलोमीटर का ग्रीनफील्ड हाईवे है। वर्तमान में इन दोनों शहरों के बीच की सड़क दूरी 230 किलोमीटर है। इस नए मार्ग के तैयार होने पर दूरी तो कम होगी ही, साथ ही यात्रा का समय भी 8 घंटे से घटकर 4 घंटे रह जाने का अनुमान है। प्रशासन ने इस विशेष हिस्से के लिए वर्क ऑर्डर जारी करने की समय सीमा नवंबर निर्धारित की है।

असम में सड़क परियोजनाओं का जाल

सरकार द्वारा असम में किए जा रहे कार्यों का विवरण देते हुए मंत्री ने बताया कि राज्य भर में 4,700 किलोमीटर लंबे 265 अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिनकी कुल लागत लगभग ₹2 लाख करोड़ है। इसके साथ ही, 1,470 किलोमीटर की लंबाई के 31 नए प्रस्ताव भी पाइपलाइन में हैं, जिन पर करीब ₹92,000 करोड़ खर्च होंगे।

कनेक्टिविटी का विस्तार

सरकार गोरखपुर और सिलिगुड़ी को एक्सप्रेसवे के जरिए जोड़ने की योजना पर भी काम कर रही है। इसे पूर्वोत्तर के 630 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के साथ जोड़कर उत्तर प्रदेश से पूर्वोत्तर तक की निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, बैहाटा चारियाली से तेजपुर के बीच 135.87 किलोमीटर के चार लेन वाले एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर को मंजूरी दी गई है, जिस पर ₹8,970.20 करोड़ का बजट खर्च होगा।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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