हिमाचल प्रदेश: शहीद हवलदार विशंभर सिंह का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार, 11 वर्षीय बेटे ने दी मुखाग्नि हिमाचल प्रदेश 2 महीने पहले 65
उत्तराखंड के देहरादून में तैनात हवलदार विशंभर सिंह का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव ऊना पहुंचा, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।

ऊना में गमगीन माहौल में दी गई विदाई

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में मंगलवार का दिन अत्यंत दुखद रहा। देहरादून में सैन्य ड्यूटी के दौरान प्राण गंवाने वाले भारतीय सेना के हवलदार विशंभर सिंह का उनके पैतृक गांव मलंगड़ मियां में पूरे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस कठिन घड़ी में पूरा गांव अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ पड़ा था। हवलदार सिंह के 11 वर्षीय पुत्र अक्षित ने जब अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।

ड्यूटी के दौरान अचानक बिगड़ी तबीयत

सैन्य अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, हवलदार विशंभर सिंह उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में तैनात थे। बीते सोमवार को वे अपनी यूनिट में शारीरिक प्रशिक्षण सत्र का हिस्सा लेने के बाद साइकिल के माध्यम से वापस लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। साथी जवानों ने उन्हें बिना देरी किए अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जुलाई 2008 में हवलदार विशंभर सिंह ने भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट में कदम रखा था और तब से वे देश की सेवा में समर्पित थे।

शोक में डूबा परिवार और इलाका

मंगलवार की सुबह जब हवलदार सिंह का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा, तो पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और स्थानीय लोग अपने वीर जवान को श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्रित हुए। इस अवसर पर बंगाणा की एसडीएम सोनू गोयल, पुलिस उपाधीक्षक अजय ठाकुर, देहरादून से आए सेना के प्रतिनिधि और पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। उन्होंने हवलदार के बलिदान को नमन करते हुए उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

सैन्य परिवार की गौरवशाली और दुखद कहानी

हवलदार विशंभर सिंह का परिवार पूरी तरह से देश सेवा के लिए समर्पित रहा है। उनके पिता रसीला राम भारतीय सेना से सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हैं। हवलदार सिंह के परिवार में उनके माता-पिता, पत्नी और दो बेटे हैं। बड़े बेटे अक्षित की उम्र 11 वर्ष है, जबकि छोटा बेटा अभी केवल 6 महीने का है। परिवार के लिए यह सदमा इसलिए भी गहरा है क्योंकि करीब पांच साल पहले उन्होंने विशंभर के छोटे भाई जसविंदर सिंह को खो दिया था, जो स्वयं सेना में तैनात थे। एक ही परिवार ने देश के लिए दो बेटे खो दिए हैं, जो इस परिवार की शहादत और त्याग को दर्शाता है।

नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि ऊना के कुटलैहड़ निवासी हवलदार विशंभर सिंह का जाना एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि वे दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस कठिन परिस्थिति से उबरने की शक्ति दें। डीएसपी अजय ठाकुर ने भी वीर जवान को नमन करते हुए कहा कि विशंभर सिंह का सर्वोच्च बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरणा देता रहेगा। उनके परिवार का संघर्ष और त्याग पूरे देश के लिए एक मिसाल है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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