मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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कोचिंग संस्थानों पर नगर निगम का सख्त रुख
धार्मिक नगरी उज्जैन में शैक्षणिक संस्थानों की बढ़ती संख्या और उनमें पढ़ने वाले छात्रों की भारी तादाद को देखते हुए जिला प्रशासन और नगर निगम अब पूरी तरह सतर्क हो गया है। हाल के दिनों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बरती जा रही लापरवाही के मद्देनजर, प्रशासन ने अब सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। नगर निगम की टीम ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में स्थित प्रमुख कोचिंग सेंटर्स का औचक निरीक्षण करना शुरू कर दिया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में छात्रों और वहां काम करने वाले स्टाफ की जान को कोई खतरा न हो।
जांच के दायरे में आए बड़े संस्थान
नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा के कड़े निर्देशों के बाद, सहायक आयुक्त रविकांत मगरदे और फायर ऑफिसर लक्ष्मण प्रसाद साहू के नेतृत्व में एक विशेष दल का गठन किया गया है। इस टीम ने शहर के सनशाइन टॉवर क्षेत्र का दौरा किया और वहां चल रहे बड़े संस्थानों जैसे आकाश कोचिंग इंस्टीट्यूट, कौटिल्य एकेडमी और गारंटी सक्सेस का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने न केवल कागजातों की पड़ताल की, बल्कि मौके पर मौजूद फायर फाइटिंग उपकरणों की कार्यक्षमता को भी परखा।
किन दस्तावेजों और उपकरणों की हो रही जांच
निरीक्षण के दौरान नगर निगम की टीम ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया है। संस्थानों से मुख्य रूप से निम्नलिखित दस्तावेजों और सुरक्षा प्रबंधों की मांग की गई है:
- फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और अग्निशमन ऑडिट रिपोर्ट।
- भवन अनुज्ञा और विद्युत सुरक्षा प्रमाण पत्र।
- अग्निशामक यंत्रों (फायर एक्सटिंग्विशर) की मौजूदगी और उनकी समय सीमा।
- फायर अलार्म सिस्टम और स्मोक डिटेक्टरों की स्थिति।
- स्प्रिंकलर सिस्टम और फायर हाइड्रेंट की कार्यक्षमता।
- इमरजेंसी एग्जिट यानी आपातकालीन निकासी द्वार।
- आपातकालीन लाइटिंग और आपदा प्रबंधन से जुड़ी योजना।
अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यदि इन मानकों में कोई भी कमी पाई जाती है, तो संस्थान संचालक को तत्काल सुधार का मौका देने के बजाय सीधे सील करने की कार्रवाई की जा सकती है।
किस तरह के भवनों के लिए नियम अनिवार्य
फायर ऑफिसर लक्ष्मण प्रसाद साहू ने स्पष्ट किया कि अग्नि सुरक्षा नियमों के दायरे में आने वाले संस्थानों के लिए मानक बहुत स्पष्ट हैं। जिन भवनों की ऊंचाई 15 मीटर से अधिक है, या जिनका कुल क्षेत्रफल 500 वर्ग मीटर से ज्यादा है, उनके लिए फायर सेफ्टी प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य है। इसके अलावा, अस्पताल, मॉल, होटल, मैरिज गार्डन, सिनेमा हॉल और मल्टीप्लेक्स जैसे सार्वजनिक स्थानों पर भी ये नियम पूरी तरह लागू होते हैं। नगर निगम का कहना है कि व्यावसायिक उपयोग वाले मिश्रित भवनों में भी अग्नि सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
प्रशासन की चेतावनी: सुरक्षा पहली प्राथमिकता
नगर निगम ने सभी कोचिंग संचालकों को कड़ी चेतावनी जारी की है कि वे अपने सुरक्षा उपकरणों को हमेशा चालू हालत में रखें और समय-समय पर फायर अलार्म सिस्टम की जांच करते रहें। नगर निगम के अनुसार, छात्रों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि सुरक्षा ऑडिट में संस्थान विफल रहते हैं, तो उन्हें सील करने की कार्यवाही तत्काल प्रभाव से अमल में लाई जाएगी। सभी संस्थान संचालकों से आग्रह किया गया है कि वे अपनी व्यवस्थाओं को जल्द से जल्द अपडेट कर लें।
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