महाकाल भस्म आरती: उज्जैन में बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार, भक्तों ने किए दर्शन मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 2
19 जून 2026 को उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में ब्रह्म मुहूर्त में बाबा महाकाल की विशेष भस्म आरती और श्रृंगार किया गया, जिसमें देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।

मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 19 जून 2026, शुक्रवार को ब्रह्म मुहूर्त में बाबा महाकाल का भस्म से अद्भुत श्रृंगार किया गया। हर दिन की तरह, आज भी देश-विदेश से भारी संख्या में भक्त इस दिव्य भस्म आरती के दर्शन के लिए पहुंचे। महाकालेश्वर मंदिर में सुबह से शाम तक कई आरतियां होती हैं, लेकिन भस्म आरती का विशेष महत्व है।

महाकाल की भस्म आरती का दिव्य अनुभव

आज यानी 19 जून 2026 को ब्रह्म मुहूर्त में आयोजित भस्म आरती और श्रृंगार दर्शन के दौरान मंदिर परिसर में भारी भीड़ देखी गई। श्रद्धालु 'जय महाकाल' और 'हर हर महादेव' के जयकारे लगाते हुए भक्ति में लीन थे। भक्तों ने महाकाल के दर्शन कर एक अनोखे आध्यात्मिक अनुभव को महसूस किया। इस दौरान पूरे मंदिर में एक दिव्यता और भक्तिमय वातावरण छा गया था। श्रृंगार दर्शन ने सभी उपस्थित भक्तों को भगवान श्री महाकालेश्वर की अलौकिक छवि के करीब ले जाकर एक अद्वितीय अनुभव प्रदान किया। इस पवित्र अवसर पर बाबा के भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया और अपने जीवन में सुख-शांति व समृद्धि की कामना की।

पूरे दिन होती हैं 6 आरतियां

भगवान श्री महाकालेश्वर की पूरे दिन में 6 बार आरती की जाती है, जिसमें भस्म आरती को सबसे खास माना जाता है। इस विशेष भस्म आरती के दर्शन के लिए हर महीने देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु उज्जैन आते हैं। ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली इस आरती में बाबा महाकाल को 'घटा टोप' स्वरूप दिया जाता है। भस्म आरती के लिए एक सूती कपड़ा लेकर उसे शिवलिंग पर बांधते हुए भस्म बिखेर कर आरती की जाती है। श्री महाकालेश्वर के दर्शन के उपरांत जूना महाकाल के दर्शन करना भी आवश्यक माना जाता है।

उज्जैन के कई नाम और महत्व

धार्मिक नगरी उज्जैन को कई नामों से जाना जाता है। पुराणों में इसके अनेक नाम जैसे अवंतिका, कनकश्रंगा, अवंतिकापुरी और उज्जैनी का वर्णन मिलता है। भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग होने के कारण इस नगरी का अपना एक अलग ही महत्व है। यहां बाबा महाकाल को तांत्रिक विधि के अनुसार दक्षिण मुखी पूजा प्राप्त होती है, और यह दुनिया का एकमात्र स्थान है जहां बाबा महाकाल दक्षिण मुख में विराजमान हैं। महाकाल मंदिर का विशेष महत्व इस वजह से भी है कि यहां ब्रह्म मुहूर्त में श्री महाकालेश्वर की भस्म आरती का विधान है, जिसे 'मंगला आरती' भी कहा जाता है।

सर्वग्रह पीड़ा नाशक हैं बाबा महाकाल

ऐसी मान्यता है कि बाबा महाकाल के पूजन से कालदोष और ग्रहदोष दूर होते हैं और अकाल मृत्यु का भय भी टल जाता है। जिन जातकों को शनिदोष या राहु-केतु दोष होता है, उन्हें महाकाल की पूजा-अर्चना से अद्भुत शांति मिलती है। शास्त्रों में बाबा महाकाल की पूजा को सभी प्रकार की ग्रह पीड़ाओं को शांत करने वाला बताया गया है। यह भी माना जाता है कि श्री महाकालेश्वर के क्षेत्र में काल का प्रभाव कम हो जाता है, जिससे मनुष्य के कर्मों का बंधन धीरे-धीरे कमजोर होता है और आत्मा में स्थिरता आती है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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