उद्धव ठाकरे की पार्टी में टूट का डर, विधायकों की बैठक से गैर-हाजिर रहने वालों पर सियासी चर्चा तेज महाराष्ट्र एक घंटा पहले 2
महाराष्ट्र में शिवसेना के 6 सांसदों के अलग होने के बाद अब उद्धव ठाकरे गुट के विधायकों के दल बदलने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हाल ही में हुई एक बैठक में कई नेताओं की अनुपस्थिति ने इन अटकलों को और हवा दे दी है।

पार्टी में मची हलचल

महाराष्ट्र की सियासत में उद्धव ठाकरे के गुट को 6 सांसदों का झटका लगने के बाद से ही हलचल तेज है। अब राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा हो रही है कि क्या ऑपरेशन टाइगर 2.0 के तहत अब विधायकों की बारी है। लोग कयास लगा रहे हैं कि क्या सांसद के बाद अब विधायक भी उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल हो सकते हैं।

बैठक में कौन नदारद रहा

सांसदों के पाला बदलने के बाद उद्धव ठाकरे ने अपने विधायकों की एक अहम बैठक बुलाई थी। इस बैठक में कुल 20 विधायकों में से 17 विधायक और 6 एमएलसी में से 5 एमएलसी उपस्थित रहे। कुछ नेताओं की गैर-हाजिरी ने चर्चाओं को जन्म दिया कि पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं है। हालांकि, बैठक में न पहुंचने वाले नेताओं ने इन दावों को पूरी तरह खारिज किया है।

  • कलिना के विधायक संजय पोतनीस ने सफाई दी कि वे निजी कारणों से नहीं आ सके थे और नेतृत्व को इसकी सूचना पहले ही दी जा चुकी थी। उन्होंने दोहराया कि वे उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े हैं।
  • एमएलसी सुनील शिंदे ने बताया कि वे अपने गांव में एक धार्मिक कार्यक्रम के चलते नहीं पहुंच पाए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी तरह के ऑपरेशन के दबाव में नहीं हैं और ठाकरे के साथ बने रहेंगे।

शिंदे गुट और विपक्ष का रुख

एकनाथ शिंदे का कहना है कि जो सांसद उनके साथ जुड़े हैं, वे अपने क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता देने के लिए आए हैं। भविष्य में और भी नेताओं के आने के संकेत दिए जा रहे हैं। वहीं गृह राज्य मंत्री योगेश कदम का दावा है कि उन्हें किसी खास ऑपरेशन की जरूरत नहीं है क्योंकि कई जनप्रतिनिधि खुद ही विकास के लिए उनसे संवाद कर रहे हैं। दूसरी ओर, नाना पटोले और अमीन पटेल जैसे कांग्रेसी नेताओं ने आरोप लगाया कि बीजेपी केंद्रीय एजेंसियों का डर दिखाकर विपक्षी दलों को तोड़ने की कोशिश कर रही है। छगन भुजबल ने इसे संतुलित नजरिए से देखते हुए कहा कि हर नेता के फैसले के पीछे अलग कारण हो सकते हैं, इसलिए इस पर अधिक राजनीति करने की आवश्यकता नहीं है।

क्या है भविष्य की संभावना

फिलहाल ऑपरेशन टाइगर 2.0 केवल चर्चाओं तक ही सीमित नजर आता है। विधानसभा में महायुति के पास पहले से ही स्पष्ट बहुमत है। ऐसे में अगर उद्धव ठाकरे गुट से और विधायक टूटते भी हैं, तो उनके राजनीतिक भविष्य और पदों को लेकर बड़े सवाल खड़े होंगे। महाराष्ट्र में बीते वर्षों के अनुभव को देखें तो समीकरण कभी भी बदल सकते हैं, इसलिए आने वाले समय में राजनीतिक घटनाक्रमों पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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