राष्ट्रीय राजनीति
16 घंटे पहले
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पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद विपक्षी इंडिया गठबंधन (INDIA) ने सोमवार को नई दिल्ली में अपनी अहम बैठक की। करीब 23 दलों के नेता इसमें शामिल हुए और आगामी राजनीतिक रणनीति पर मंथन किया। इस दौरान महंगाई, बेरोजगारी, NEET विवाद, विदेश नीति और संसद के आने वाले सत्र जैसे कई मुद्दे एजेंडे में रहे। लेकिन इन सबके बीच एक सवाल ऐसा उठा, जिसने गठबंधन के भीतर की सबसे बड़ी दुविधा को एक बार फिर सामने ला दिया।
उद्धव ठाकरे ने उठाया नेतृत्व का सवाल
शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में हिस्सा लिया और गठबंधन नेतृत्व से सीधे पूछा कि आखिर इंडिया गठबंधन का प्रधानमंत्री पद का चेहरा कौन होगा। सूत्रों के अनुसार, ठाकरे ने कहा कि अगर विपक्ष 2029 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को टक्कर देना चाहता है, तो उसे समय रहते अपने नेतृत्व को साफ करना होगा।
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में शिवसेना सांसद संजय राउत ने बताया कि उद्धव ठाकरे का मानना है कि सिर्फ सरकार की आलोचना करते रहना काफी नहीं है। जनता यह भी जानना चाहती है कि सत्ता में आने पर विपक्ष देश की कमान किसके हाथ में देना चाहता है। राउत के मुताबिक, ठाकरे ने सुझाव दिया कि गठबंधन को जल्द से जल्द पीएम पद का चेहरा घोषित कर देना चाहिए, ताकि उस नेता को पूरे देश में अपनी पहचान मजबूत करने और लोगों तक पहुंच बनाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
नेताओं की चुप्पी बनी चर्चा का विषय
दिलचस्प बात यह रही कि ठाकरे की इस मांग पर बैठक में मौजूद किसी बड़े नेता ने खुलकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और दूसरे सहयोगी दलों के प्रतिनिधियों की ओर से इस मसले पर कोई स्पष्ट टिप्पणी सामने नहीं आई। राजनीतिक गलियारों में इस खामोशी को गठबंधन के भीतर मौजूद असहजता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
दरअसल, प्रधानमंत्री पद का चेहरा तय करना इंडिया गठबंधन के लिए हमेशा से सबसे पेचीदा मुद्दों में रहा है। कांग्रेस स्वाभाविक रूप से खुद को विपक्ष का सबसे बड़ा दल मानती है, जबकि कई क्षेत्रीय दल किसी एक चेहरे के पीछे खड़े होने को लेकर पूरी तरह सहज नहीं दिखते। ऐसे में ठाकरे का यह सवाल गठबंधन की उस कमजोरी को उजागर करता है, जिस पर अब तक खुली चर्चा से बचा जाता रहा है।
NEET विवाद और इस्तीफे की मांग
बैठक में सिर्फ नेतृत्व का मुद्दा ही नहीं उठा। शिवसेना ने महंगाई, बेरोजगारी और कथित घोटालों को लेकर भी अपनी चिंता जताई। संजय राउत ने बताया कि गठबंधन ने NEET परीक्षा से जुड़े विवाद और अन्य मुद्दों पर आगे की रणनीति पर भी विचार किया। विपक्षी दल इन मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का ध्यान आकर्षित करने की तैयारी कर रहे हैं।
बैठक में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर भी चर्चा हुई। विपक्षी दलों का मानना है कि NEET से जुड़े विवादों की नैतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। राउत ने कहा कि जब तक इस मुद्दे पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक संसद के भीतर और बाहर विरोध जारी रहेगा।
अगली बैठक अगस्त में हैदराबाद में
बैठक के अंत में यह भी तय हुआ कि इंडिया गठबंधन की अगली बैठक अगस्त में हैदराबाद में होगी। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों से ज्यादा चर्चा उसी सवाल की हो रही है, जिसे उद्धव ठाकरे ने बैठक के बीचोंबीच रख दिया- अगर विपक्ष सत्ता चाहता है, तो उसका नेता कौन है? फिलहाल इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं दिखता और यही इंडिया गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
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