उत्तर प्रदेश वक्फ बोर्ड में होगा बड़ा बदलाव, पहली बार शामिल होंगे 2 गैर-मुस्लिम सदस्य उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 67
उत्तर प्रदेश सरकार जल्द ही वक्फ बोर्ड का नया गठन करने जा रही है, जिसमें पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से 2 गैर-मुस्लिमों, 2 महिलाओं और पसमांदा मुसलमानों को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।

वक्फ बोर्ड की नई संरचना और पारदर्शिता का लक्ष्य

मध्य प्रदेश की तर्ज पर अब उत्तर प्रदेश सरकार भी अपने वक्फ बोर्ड में बड़ा फेरबदल करने की तैयारी में है। राज्य में नए वक्फ बोर्ड के गठन की प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस नए ढांचे में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। सुन्नी वक्फ बोर्ड की नई प्रस्तावित संरचना में कुल 11 सदस्यों को शामिल किया जाएगा, जिनमें एक चेयरमैन और 10 अन्य सदस्य शामिल होंगे। खास बात यह है कि इस नई टीम में 2 गैर-मुस्लिम सदस्य और 2 मुस्लिम महिलाएं भी अपनी भूमिका निभाएंगी। इसके साथ ही, बोर्ड में पसमांदा मुसलमानों के प्रतिनिधित्व को भी सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में अधिक स्पष्टता आएगी।

राज्य में वक्फ संपत्तियों का मौजूदा हाल

उत्तर प्रदेश में सुन्नी वक्फ बोर्ड का कार्यकाल बीते मार्च महीने में समाप्त हो चुका है, जबकि शिया वक्फ बोर्ड का कार्यकाल अक्टूबर में पूरा होने वाला है। इन दोनों निकायों के नए गठन के लिए सरकार ने आवश्यक तैयारियां तेज कर दी हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो उत्तर प्रदेश में कुल 2,32,547 वक्फ संपत्तियां मौजूद हैं। इनमें से 2,17,161 संपत्तियां सुन्नी वक्फ बोर्ड के अधीन हैं, जबकि शिया वक्फ बोर्ड के अंतर्गत 15,386 संपत्तियां आती हैं। इसके अतिरिक्त, उम्मीद पोर्टल पर अब तक 92,000 से अधिक वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण पूरा किया जा चुका है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने अपने वक्फ बोर्ड में 2 हिंदू सदस्यों को शामिल किया है, और अब उत्तर प्रदेश उसी राह पर आगे बढ़ रहा है।

सपा नेता की तीखी प्रतिक्रिया

इस प्रस्तावित बदलाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस भी शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने सरकार के इस कदम पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस फैसले की तुलना राम मंदिर में हुए कथित चंदा विवाद से करते हुए कहा कि सरकार का असली मकसद वक्फ की जमीनों पर कब्जा करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग राम मंदिर ट्रस्ट में चंदे में हेराफेरी के लिए जिम्मेदार हैं, वे वक्फ बोर्ड में निष्पक्ष काम कैसे कर सकते हैं।

मध्य प्रदेश में विरोध और कानूनी दांव-पेंच

दूसरी तरफ, मध्य प्रदेश में वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन और गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस ने सख्त तेवर अपना लिए हैं। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इस नियुक्ति को पूरी तरह अनुचित करार दिया है। उनका कहना है कि वक्फ अधिनियम से जुड़े मामले पहले से ही उच्चतम न्यायालय में लंबित हैं, जिस पर अंतिम फैसला आना बाकी है। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक शीर्ष अदालत से कोई स्पष्ट निर्देश नहीं आता, तब तक इस तरह की नियुक्तियां कानूनी रूप से संदिग्ध हैं। कांग्रेस पार्टी इस पूरे मामले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी कर रही है ताकि बोर्ड के गठन और सदस्यों के चयन प्रक्रिया पर रोक लगाई जा सके।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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