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एक घंटा पहले
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भारत सरकार भेजेगी प्रतिनिधिमंडल
ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारत सरकार ने अपनी आधिकारिक भागीदारी सुनिश्चित की है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा को इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नामित किया गया है। ईरान की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को विशेष रूप से इस अंतिम संस्कार में आने के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन अपने व्यस्त कार्यक्रमों के चलते प्रधानमंत्री स्वयं वहां नहीं जा रहे हैं। उनकी जगह पर ये दोनों प्रतिनिधि भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
शोक सभा में भी शामिल हुए थे मार्गेरिटा
विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा का ईरान से जुड़ाव हाल के दिनों में देखा गया है। इससे पूर्व अप्रैल महीने में, जब ईरान के दूतावास ने खामेनेई के निधन के 40वें दिन यानी चेहेलुम के मौके पर एक शोक सभा का आयोजन किया था, तब भी मार्गेरिटा ने भारत सरकार की ओर से उसमें भाग लिया था। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अंतिम संस्कार के लिए व्यक्तिगत रूप से निमंत्रण भेजा था। राजनयिक सूत्रों ने बुधवार को यह स्पष्ट कर दिया था कि अंतिम विदाई से जुड़ी विभिन्न रस्में 5 जुलाई से शुरू होकर 9 जुलाई तक चलेंगी।
तेहरान से मशहद तक होगा अंतिम विदाई का सफर
अयातुल्ला अली खामेनेई का राजकीय अंतिम संस्कार 4 जुलाई से 9 जुलाई के बीच संपन्न होगा। सरकारी टेलीविजन संस्थान IRIB के अनुसार, तेहरान और कोम शहरों में 5, 6 और 7 जुलाई को प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद, अंतिम संस्कार का मुख्य आयोजन 9 जुलाई को मशहद शहर में होगा। ज्ञात हो कि 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका के संयुक्त सैन्य हमले में खामेनेई की मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद उनके बेटे मोजतबा अली खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया था।
परिवार के साथ दफनाए जाएंगे खामेनेई
खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के तहत उनके पार्थिव शरीर को तेहरान से कोम ले जाया जाएगा, जहां आम जनता उन्हें अपनी अंतिम श्रद्धांजलि देगी। अंतिम पड़ाव के रूप में उनके शरीर को उनकी जन्मभूमि मशहद ले जाया जाएगा, जहां इमाम रजा दरगाह परिसर में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इसी दिन 28 फरवरी के हमले में मारे गए खामेनेई की बेटी और उनके दामाद को भी उसी स्थान पर दफनाया जाएगा। तीन दशकों तक ईरान की सत्ता संभालने वाले खामेनेई की विदाई की रस्में अब अपने अंतिम चरण में हैं।
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