भीड़ के बीच अकेले क्यों महसूस कर रहे हैं लोग, शुभांगी अत्रे ने खोली सोशल मीडिया के 'दिखावे' की पोल मनोरंजन एक महीने पहले 61
मशहूर टीवी अभिनेत्री शुभांगी अत्रे ने आधुनिक दौर में बढ़ते अकेलेपन और सतही रिश्तों पर खुलकर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया ने हमें एक-दूसरे से जोड़ तो दिया है, लेकिन असल भावनात्मक जुड़ाव को हमसे कोसों दूर कर दिया है।

आज के दौर का सच और अकेलापन

टेलीविजन जगत की मशहूर अदाकारा शुभांगी अत्रे ने हाल ही में उस कड़वी सच्चाई को बयां किया है जिसे अक्सर ग्लैमर और लाइमलाइट के पीछे अनदेखा कर दिया जाता है। शुभांगी का मानना है कि आज के आधुनिक युग में इंसान भीड़ का हिस्सा होने के बावजूद अंदर से अकेला है। उन्होंने बताया कि अकेलापन केवल तब महसूस नहीं होता जब आपके पास लोग न हों, बल्कि यह टीस तब ज्यादा उभरती है जब आपके आसपास तो बहुत से लोग हों, लेकिन कोई ऐसा न हो जिससे आप अपने दिल की बात गहराई से कह सकें। शुभांगी के अनुसार, आज के दौर में मानवीय संवेदनाएं और जज्बात सतही होते जा रहे हैं, जिसके कारण इंसान मानसिक रूप से एकाकीपन का शिकार हो रहा है।

सोशल मीडिया का छलावा और असली भावनाएं

सोशल मीडिया के प्रभाव पर बात करते हुए शुभांगी ने कहा कि इंटरनेट के दौर में हम एक-दूसरे की जिंदगी के हर पहलू से वाकिफ तो हैं, लेकिन असलियत में हम एक-दूसरे की भावनाओं से पूरी तरह कट चुके हैं। आज हम स्मार्टफोन की स्क्रीन के जरिए यह तो पल भर में जान लेते हैं कि हमारा कोई परिचित कहाँ गया है, उसने क्या खाया है या वे अपनी छुट्टियों में क्या तस्वीरें पोस्ट कर रहे हैं। हालांकि, ये चीजें केवल दिखावे का हिस्सा बनकर रह गई हैं। अभिनेत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सोशल मीडिया ने हमें दिखावे की दुनिया में तो बहुत आगे बढ़ा दिया है, लेकिन इंसानी जज्बातों को गहराई से समझने और महसूस करने का हुनर हमसे छीन लिया है। आज की बातचीत केवल औपचारिकता तक सीमित हो गई है।

गहराई वाले रिश्तों की अहमियत

शुभांगी अत्रे ने अपने व्यक्तिगत जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि वह खुद को खुशकिस्मत मानती हैं क्योंकि उनकी जिंदगी में ऐसे कुछ गिने-चुने लोग हैं, जो केवल औपचारिकता निभाने के लिए हाल-चाल नहीं पूछते। वे वास्तव में इस बात का इंतजार करते हैं कि सामने वाला व्यक्ति कैसा महसूस कर रहा है। अभिनेत्री का कहना है कि किसी भी इंसान के लिए सबसे बड़ी शांति तब होती है जब कोई उसे बिना किसी पूर्वाग्रह के, बिना टोके और बिना जज किए शांति से सुन सके। कई बार लोग आपसे बड़ी-बड़ी सलाह की उम्मीद नहीं रखते, उन्हें बस इस बात के अहसास की जरूरत होती है कि कोई उन्हें समझने के लिए उनके साथ मौजूद है। सच्ची और सुकून भरी बातचीत हमेशा मोबाइल स्क्रीन से दूर, आमने-सामने बैठकर ही संभव होती है।

रिश्तों में धैर्य और भरोसे की भूमिका

रिश्तों की जटिलताओं पर विचार रखते हुए शुभांगी ने साफ किया कि आज के इस मतलबी दौर में सच्चे और भरोसेमंद रिश्ते बनाना कोई आसान काम नहीं है। किसी भी रिश्ते में मजबूती, समझदारी और अपनापन आने में एक लंबा वक्त लगता है और इसके लिए दोनों पक्षों को धैर्य रखने की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि जिंदगी में वही लोग सबसे अधिक कीमती और अहम होते हैं, जो केवल आपके सुख के दिनों में साथ खड़े होकर ताली नहीं बजाते, बल्कि कठिन और बुरे समय में भी आपकी ढाल बनकर आपके साथ खड़े रहते हैं। ऐसे ही गहरे रिश्ते इंसान को दिमागी सुकून देते हैं और अकेलेपन के डर को दूर रखने में मदद करते हैं।

बेटी आशी से मिला सबसे बड़ा सहारा

अपनी निजी जिंदगी के सबसे खूबसूरत पहलू का जिक्र करते हुए शुभांगी ने बताया कि उनकी 19 साल की बेटी आशी उनकी जीवन की सबसे बड़ी ताकत है। अपनी बेटी की परिपक्वता के बारे में बात करते हुए अभिनेत्री ने कहा कि आशी बेहद समझदार है और वह हमेशा अपनी मां का ख्याल रखती है। नियमित रूप से हाल-चाल पूछना और मां के मन की स्थिति को भांप लेना आशी के स्वभाव में है। शुभांगी के अनुसार, अपनी बेटी और कुछ बेहद करीबी दोस्तों के अटूट प्रेम की वजह से ही वे खुद को कभी अकेला महसूस नहीं करतीं। उन्होंने अंत में स्पष्ट किया कि भीड़ में अकेले रहने का अनुभव केवल तभी खत्म हो सकता है जब हम स्क्रीन के बाहर निकलकर असल दुनिया में भावनाओं को जगह देना सीखेंगे।

आन्या कपूर पाबना के मनोरंजन रिपोर्टर हैं, जो बॉलीवुड, ओटीटी और टेलीविजन की खबरें कवर करते हैं। फिल्मों, वेब सीरीज, सेलिब्रिटी और बॉक्स ऑफिस पर उनकी पैनी नजर रहती है। वे मनोरंजन जगत की हलचल को रोचक अंदाज में दर्शकों तक लाते हैं।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप