उत्तर प्रदेश
3 महीने पहले
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चढ़ावा चोरी पर ट्रस्ट की सफाई
अयोध्या के भव्य राम मंदिर में हाल ही में चढ़ावे की राशि चोरी होने का मामला सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। इस सिलसिले में सोमवार को ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में बड़ा निर्णय लेते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे को मंजूरी दे दी गई है। अब ये दोनों राम मंदिर निर्माण कार्य की सीधी देखरेख नहीं करेंगे। इस पूरे घटनाक्रम के बीच ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने एक विशेष बातचीत में विस्तार से बताया कि मंदिर की सुरक्षा और कार्यप्रणाली से जुड़ी मानक संचालन प्रक्रिया यानी SoP का कड़ाई से पालन न हो पाने के कारण यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति पैदा हुई।
कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी और SBI की भूमिका
स्वामी गोविंद देव गिरि ने अपनी जिम्मेदारियों को स्पष्ट करते हुए कहा कि एक कोषाध्यक्ष के तौर पर उनका प्राथमिक कर्तव्य कोष में जमा धन को सुरक्षित रखना और उसका उचित लेखा-जोखा रखना है। चढ़ावे की दैनिक निगरानी का काम ट्रस्ट का नहीं, बल्कि मंदिर परिसर में तैनात संबंधित लोगों का था। उन्होंने विशेष रूप से अनिल मिश्रा का नाम लेते हुए कहा कि निगरानी की मुख्य जिम्मेदारी उन्हीं के पास थी। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि मंदिर के कर्मचारियों की नियुक्ति की पूरी जिम्मेदारी SBI को सौंपी गई थी। ट्रस्ट ने SBI की प्रतिष्ठा पर भरोसा जताते हुए सारा काम उन पर छोड़ दिया था। स्वामी जी ने माना कि SBI की तरफ से बरती गई ढिलाई के कारण ही चढ़ावे में चोरी संभव हो सकी, क्योंकि चढ़ावे में कमी की सूचना उन्हें समय रहते नहीं दी गई। यदि उन्हें इस बारे में पहले पता होता तो वह निश्चित रूप से कठोर कार्रवाई करते।
वित्तीय आंकड़े और चंपत राय पर भरोसा
ट्रस्ट के पास मौजूद वित्तीय आंकड़ों का ब्योरा देते हुए उन्होंने बताया कि अब तक कुल 3 हजार 264 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई है, जिसमें से 2 हजार 370 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। चालू वित्त वर्ष में 20 करोड़ 16 लाख 7 हजार 50 रुपये की जमीन खरीदी गई है। 30 जून तक ट्रस्ट के पास 1800 करोड़ रुपये की राशि शेष है। चंपत राय का बचाव करते हुए स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि उन पर आज भी पूरा भरोसा है। चंपत राय ने कोई गबन नहीं किया है, बल्कि उनसे केवल निगरानी करने में चूक हुई है। उन्होंने जिन लोगों पर आँख मूंदकर विश्वास किया, उन्होंने ही इस चोरी को अंजाम दिया।
IAS अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
कोषाध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि ट्रस्ट में शामिल 4 IAS अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। ये अधिकारी विशेष रूप से वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए ही नियुक्त किए गए थे। उन्होंने कहा कि इन अधिकारियों को भी इस व्यवस्था की निगरानी करनी चाहिए थी, क्योंकि वे अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते हैं। ट्रस्ट ने केवल इसलिए विश्वास किया क्योंकि इसमें SBI का नाम जुड़ा था, लेकिन व्यवस्था में अति-निर्भरता ही ट्रस्ट के लिए नुकसानदेह साबित हुई।
चंपत राय की निष्ठा और भविष्य की रणनीति
स्वामी गोविंद देव गिरि ने चंपत राय के साथ अपने 32 वर्षों के लंबे संबंध का जिक्र करते हुए उन्हें एक निष्कलंक और समर्पित प्रचारक बताया। उन्होंने कहा कि चंपत राय अब न्यासी पद से मुक्त हैं और भविष्य में ट्रस्ट के कार्यों में कोई भूमिका नहीं निभाएंगे। ट्रस्ट अब अपना खोया हुआ विश्वास फिर से हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। नई नियुक्तियों की प्रक्रिया के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है, जिसमें सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और उद्योगपति सुरेश हावरे शामिल हैं। ये लोग ही नए नामों का सुझाव देंगे। अंत में स्वामी जी ने SIT जांच पर पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा कि वे रामराज्य के संकल्प को पूरा करने के लिए अडिग हैं और लोगों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें।
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