ईरान-अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा, होर्मुज में जहाज पर हमले से शांति वार्ता पर मंडराया खतरा विश्व 2 महीने पहले 73
होर्मुज जलडमरूमध्य में एक जहाज पर हुए ईरानी हमले ने शांति वार्ता को अधर में लटका दिया है, जबकि डोनाल्ड ट्रंप के दावों को ईरान ने सिरे से नकार दिया है।

शांति वार्ता के बीच होर्मुज में बढ़ी हलचल

ईरान और अमेरिका के बीच चल रही शांति वार्ता के बेहद नाजुक मोड़ पर एक बड़ी घटना सामने आई है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक जहाज को निशाना बनाया है। यह हमला उस चेतावनी के कुछ ही घंटे बाद हुआ, जिसमें तेहरान ने साफ तौर पर कहा था कि बिना उनकी आधिकारिक अनुमति के कोई भी जहाज इस समुद्री रास्ते का उपयोग न करे। इस घटना के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी के सेक्रेटरी-जनरल आर्सेनियो डोमिंग्वेज़ ने स्पष्ट किया है कि जिस जहाज पर हमला किया गया है, वह किसी निकासी अभियान का हिस्सा नहीं था।

समुद्री निकासी योजना पर रोक

इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइज़ेशन के प्रमुख ने जानकारी दी है कि फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों को होर्मुज के रास्ते बाहर निकालने की पूरी योजना को फिलहाल के लिए रोक दिया गया है। एजेंसी ने कहा है कि जब तक उस इलाके में सुरक्षा की पूरी गारंटी नहीं मिल जाती और निकासी सूची में शामिल जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, तब तक यह अभियान शुरू नहीं किया जाएगा।

डोनाल्ड ट्रंप का दावा और ईरान की प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने परमाणु हथियारों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि ईरान पहले घंटे में ही परमाणु हथियार का उपयोग करने की स्थिति में था, लेकिन अब वे इसे हासिल न करने पर सहमत हो गए हैं। दूसरी ओर, ईरान ने इजरायल को भी कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि उन्हें लेबनान छोड़ देना चाहिए, अन्यथा उन्हें शर्मनाक हार का सामना करना पड़ेगा।

ट्रंप की योजना खारिज

ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेरी ग़ालिबाफ़ ने ट्रंप के उस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें ईरानी पैसे का उपयोग कृषि उत्पाद खरीदने के लिए करने की बात कही गई थी। ग़ालिबाफ़ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि अमेरिका गलत दावे कर रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी अनफ्रीज़ की गई संपत्ति से अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदने की बात महज एक झूठा दावा है। अंत में उन्होंने कहा कि यह दशकों पुराने अविश्वास का नतीजा है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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