राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी G7 समिट में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हुई। जैसे ही इस मुलाकात की तस्वीरें सामने आईं, उन्हें लेकर तरह-तरह के अनुमान और विश्लेषण शुरू हो गए। इसकी एक बड़ी वजह यह रही कि दोनों नेता पूरे 16 महीनों के बाद आमने-सामने हुए। इस अवधि में दोनों देशों के रिश्तों का गर्मजोशी भरा माहौल कड़वाहट में बदल चुका है और मौजूदा संबंधों को बहुत अच्छा नहीं कहा जा सकता।
तस्वीरों पर सुशांत सरीन की राय
एक बातचीत में कूटनीतिक मामलों के जानकार सुशांत सरीन ने इन तस्वीरों को बिल्कुल अलग नजरिए से देखा। उन्होंने कहा कि ट्रंप एक अलग ही तरह के व्यक्ति हैं और उन पर भरोसा कर पाना बेहद मुश्किल है।
एंकर राहुल शिवशंकर ने सरीन से सवाल किया कि कई बार दिखावे यानी ऑप्टिक्स का जरूरत से ज्यादा विश्लेषण कर लिया जाता है, जबकि वे हमेशा इस बात का सटीक संकेत नहीं देते कि आगे क्या होने वाला है। उन्होंने यह भी कहा कि यह पूरी तरह मुमकिन है कि अगले दिन की बातचीत में और अधिक गर्मजोशी देखने को मिले, और चूंकि उसी रात डिनर भी प्रस्तावित था, इसलिए हो सकता है कि अधिक सहज माहौल में दोनों नेता खुलकर बात करें। एंकर ने पूछा कि वे इस पहली मुलाकात को किस तरह देखते हैं।
'पलटकर पीठ में छुरा घोंप सकते हैं ट्रंप'
इस पर सुशांत सरीन ने कहा कि जो बात कही गई, वह शायद तब सही होती जब सामने कोई ऐसा व्यक्ति होता जो डोनाल्ड ट्रंप जितना असंतुलित और अप्रत्याशित न हो। लेकिन यहां सामने डोनाल्ड ट्रंप जैसा व्यक्ति है, इसलिए जब वह गर्मजोशी दिखाते हैं, तो अगले ही पल पलटकर आपकी पीठ में छुरा भी घोंप सकते हैं। उन्होंने कहा कि असल समस्या यही है।
सरीन ने आगे कहा कि अब समय आ गया है कि इस बहस से ऊपर उठा जाए कि बैठक में कितनी गर्मजोशी दिखी, किसने किसकी कितनी तारीफ की और किसने क्या कहा। ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि कौन क्या कर रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ साल में कम से कम उनकी नजर में यह पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि उनके जैसे कई लोग अमेरिका के साथ रणनीतिक संबंधों के प्रबल समर्थक रहे हैं। लेकिन अगर इस सच्चाई को स्वीकार नहीं किया गया कि अमेरिका के साथ रिश्तों का रणनीतिक पहलू लगभग खत्म हो चुका है, तो यह एक बड़ी भूल होगी।
'भारत को नुकसान पहुंचाने की पूरी कोशिश'
सुशांत सरीन ने कहा कि आर्थिक पक्ष शायद अब भी कायम है, हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने उस पर भी पूरी तरह चोट पहुंचाने की कोशिश की है। उन्होंने भारत पर प्रतिबंध लगाए, टैरिफ थोपे और पूरी तरह अनुचित तरीके से भारत को निशाना बनाते हुए उस पर दबाव बनाया। उन्होंने आर्थिक संबंधों को भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, फिर भी वह रिश्ता किसी तरह अब तक पटरी पर बना हुआ नजर आता है। सरीन के मुताबिक, अब भारत के लिए अमेरिका पर रणनीतिक साझेदार के रूप में निर्भर रहना मूर्खता होगी।
'निर्भरता घटाना जरूरी'
उन्होंने कहा कि यह विकल्प अब समाप्त हो चुका है और रणनीतिक स्तर पर भारत को अमेरिका को लेकर अपने जोखिम कम करने होंगे। जैसे करीब दो साल पहले चीन पर निर्भरता घटाने की बात हो रही थी, ठीक वैसे ही अब अमेरिका पर निर्भरता भी कम करनी होगी। सरीन ने कहा कि अमेरिका इतना अविश्वसनीय और मनमौजी साबित हुआ है कि अब उसे गंभीरता से लिया जाना मुश्किल है।
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