ग्रीनलैंड में बढ़ेगी अमेरिकी सैन्य ताकत, डोनाल्ड ट्रंप और डेनमार्क के बीच अहम समझौता विश्व 2 घंटे पहले 3
संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान डोनाल्ड ट्रंप और डेनमार्क के नेताओं ने आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस नई संधि से ग्रीनलैंड में अमेरिकी सेना की उपस्थिति मजबूत होगी, जबकि द्वीप का मालिकाना हक डेनमार्क के पास ही रहेगा।

आर्कटिक में सुरक्षा सहयोग की नई शुरुआत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क में चल रही संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं के साथ रक्षा समझौते को अंतिम रूप दिया है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करना है। इस संधि के जरिए ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है, हालांकि यह द्वीप भौगोलिक और प्रशासनिक रूप से डेनमार्क के नियंत्रण में ही बना रहेगा।

तनावपूर्ण संबंधों के बीच कूटनीतिक हल

पिछले कुछ समय से डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने के प्रस्ताव को लेकर डेनमार्क के साथ राजनयिक स्तर पर काफी खींचतान देखी गई थी। इस नए समझौते को उसी तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। संधि पर हस्ताक्षर से कुछ दिन पहले ही ट्रंप ने इस बात के संकेत दे दिए थे कि वे डेनमार्क के अधिकार क्षेत्र में रहते हुए ही ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को विस्तार देने की योजना पर काम कर रहे हैं।

ट्रंप ने बताया इसे सभी के लिए फायदेमंद

हस्ताक्षर समारोह के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि यह न केवल यूरोप और अमेरिका के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि ग्रीनलैंड के भविष्य के लिए भी बेहद शानदार साबित होगा। गौरतलब है कि पिछले कई महीनों से डोनाल्ड ट्रंप सार्वजनिक रूप से ग्रीनलैंड को खरीदने की अपनी इच्छा जताते रहे थे, जिसके कारण उनके नाटो सहयोगी देश डेनमार्क के साथ रिश्ते तनावपूर्ण हो गए थे।

सैन्य क्षमताओं का होगा विस्तार

इस समझौते के तहत अमेरिका ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य पहुंच को व्यापक बनाने जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस योजना में पिटुफिक स्पेस बेस का विस्तार किया जाना शामिल है। इसके अतिरिक्त नर्सार्सुआक और मेस्टर्सविग जैसे क्षेत्रों में नई सैन्य सुविधाओं का निर्माण या पुरानी सुविधाओं का पुनर्विकास करने पर भी विचार किया जा रहा है।

रूस और चीन की बढ़ती सक्रियता बनी वजह

आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती रणनीतिक गतिविधियों को लेकर अमेरिका पहले से ही चिंतित रहा है। डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि आर्कटिक क्षेत्र में चीन और रूस के जहाजों की निरंतर मौजूदगी को देखते हुए अमेरिका का वहां सक्रिय रहना अनिवार्य है। ट्रंप के अनुसार, डेनमार्क ग्रीनलैंड की सुरक्षा पर पर्याप्त खर्च नहीं कर रहा था, जबकि यह क्षेत्र वैश्विक सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इस समझौते के बावजूद ग्रीनलैंड की संप्रभुता पर कोई आंच नहीं आएगी और वह डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र बना रहेगा।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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