उत्तर प्रदेश
3 घंटे पहले
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टोल प्लाजा पर बवाल और एफआईआर
प्रयागराज के नवाबगंज टोल प्लाजा पर माफिया अतीक अहमद के बेटे मोहम्मद उमर के काफिले में शामिल वाहनों ने जमकर हुड़दंग मचाया। टोल टैक्स की अदायगी से बचने के लिए काफिले में शामिल लोगों ने न केवल बैरियर तोड़ा, बल्कि वहां तैनात कर्मचारियों को धमकाया भी। इस मामले को लेकर टोल प्लाजा के असिस्टेंट मैनेजर जयप्रकाश यादव ने नवाबगंज थाने में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। मिली जानकारी के अनुसार, इस घटना के बाद कुल 25 वाहनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
घटना की पूरी सच्चाई
यह मामला 8 अगस्त का है, जब एनएच 19 स्थित नवाबगंज टोल प्लाजा पर कंप्यूटर ऑपरेटर अजीत और हेल्पर अंशुमन शुक्ला अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। दोपहर के करीब 3:50 बजे का समय था, जब उमर अहमद को पुलिस अभिरक्षा में लखनऊ जेल से वापस लाया जा रहा था। सरकारी एस्कॉर्ट गाड़ियों के साथ-साथ उनके पीछे निजी वाहनों का एक बड़ा हुजूम चल रहा था।
काफिले में शामिल सफेद रंग की महिंद्रा एक्सयूवी जिसका नंबर UP 32NJ 1458 है और काली रंग की क्रेटा जिसका नंबर UP 70 HP 8416 है, समेत लगभग 25 से 30 गाड़ियां बगैर टोल टैक्स दिए तेजी से वहां से गुजरने लगीं। जब टोल कर्मियों ने नियमों का पालन करने और उन्हें रोकने का प्रयास किया, तो वाहनों में बैठे लोगों ने न केवल कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज की, बल्कि उन्हें जान से मारने की धमकी देते हुए उन पर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश भी की। किसी तरह कर्मचारियों ने हटकर अपनी जान बचाई।
कानूनी कार्रवाई और नुकसान
असिस्टेंट मैनेजर ने अपनी शिकायत में उन तमाम गाड़ियों के नंबर दर्ज कराए हैं जिन्होंने कानून का उल्लंघन किया। एफआईआर के मुताबिक, इन लोगों ने न सिर्फ सरकारी संपत्ति यानी टोल बैरियर को क्षतिग्रस्त किया, बल्कि विभाग को राजस्व का भी नुकसान पहुंचाया है। पुलिस ने तहरीर मिलने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है और अब गाड़ियों के नंबरों के आधार पर आगे की कानूनी कार्यवाही की जा रही है।
पृष्ठभूमि
उल्लेखनीय है कि अतीक अहमद के परिवार के साथ हाल ही में एक बड़ी त्रासदी हुई थी, जिसमें उसके सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की मौत हो गई थी। अबान की कार झांसी-कानपुर हाईवे पर अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई थी। अपने भाई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उच्च न्यायालय ने अतीक के दूसरे बेटों अली और उमर को पैरोल दी थी, जिसके बाद से ही उनके काफिलों की गतिविधियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
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