पाली का रहस्यमयी भीमकुंड: अरावली की वादियों में आज भी मौजूद हैं महाभारत काल के निशान जीवनशैली 7 घंटे पहले 5
राजस्थान के पाली जिले के सुमेरपुर में स्थित भीमकुंड अपनी पौराणिक मान्यताओं और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ आज भी महाबली भीम के पदचिन्ह देखे जा सकते हैं।

अरावली की वादियों में छिपा है भीमकुंड

राजस्थान के पाली जिले में स्थित अरावली की पर्वतमालाएं अपने भीतर कई ऐतिहासिक और पौराणिक रहस्यों को समेटे हुए हैं। इन्हीं वादियों के बीच सुमेरपुर क्षेत्र के बीजापुर के जंगलों में एक बेहद खास स्थान है, जिसे भीमकुंड के नाम से जाना जाता है। यह जगह न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है, बल्कि महाभारत काल की घटनाओं से जुड़ी मान्यताओं के कारण भी भक्तों और पर्यटकों के लिए श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है।

पांडवों के अज्ञातवास और चमत्कार की कहानी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल के दौरान पांडवों ने अपने अज्ञातवास का कुछ समय इन्हीं घने जंगलों और पहाड़ों के बीच व्यतीत किया था। किवदंतियों के अनुसार, जब पांडव अपनी यात्रा पर थे, तब माता द्रौपदी को अत्यधिक प्यास महसूस हुई। उस समय आसपास पानी का कोई भी स्रोत उपलब्ध नहीं था। तब महाबली भीम ने अपनी असीम शक्ति का परिचय देते हुए पहाड़ियों के बीच अपने घुटने और गदा से प्रहार किया।

भीम के इस जोरदार प्रहार से चट्टानें विदीर्ण हो गईं और उनमें से जल की धारा फूट पड़ी, जिसने बाद में एक कुंड का स्वरूप ले लिया। इसी घटना के कारण इस स्थान को भीमकुंड के नाम से ख्याति मिली। आज भी श्रद्धालु इस जगह को अत्यंत पवित्र मानते हैं और इसे महाबली भीम की शक्ति का प्रतीक मानकर दर्शन करने आते हैं।

आज भी मौजूद हैं भीम के पदचिन्ह

इस भीमकुंड परिसर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ की कठोर चट्टानों पर आज भी विशाल पैरों के निशान और घुटने टेकने के स्पष्ट साक्ष्य देखे जा सकते हैं। लोग इन्हें महाबली भीम के पदचिन्हों के रूप में पूजते हैं। इसके अलावा, यहाँ स्थित महादेव मंदिर और भीमकुंड का मिला-जुला वातावरण इस स्थान को आध्यात्मिक रूप से काफी शक्तिशाली बनाता है।

भीषण गर्मी में भी नहीं सूखता शीतल जल

पहाड़ियों के दुर्गम इलाके में स्थित होने के बावजूद इस कुंड के जल की गुणवत्ता अद्भुत है। यहाँ का पानी अत्यंत मीठा और शीतल रहता है। स्थानीय निवासियों और पर्यटकों का कहना है कि भीषण गर्मी के मौसम में भी यह कुंड कभी नहीं सूखता और इसमें पानी का स्तर बना रहता है। प्रकृति की इस अद्भुत छटा और महाभारत कालीन इतिहास के मेल ने बीजापुर के इस क्षेत्र को पर्यटकों के लिए एक आकर्षक स्थल बना दिया है।

यहाँ कैसे पहुँचें

भीमकुंड की यात्रा करने के लिए कई साधन उपलब्ध हैं:

  • सड़क मार्ग: यात्री एनएच-62 (NH-62) के माध्यम से जोधपुर या पाली से सुमेरपुर पहुँच सकते हैं। सुमेरपुर से बीजापुर की दूरी लगभग 15 से 20 किमी है। यहाँ से स्थानीय ऑटो, बस या टैक्सी की सुविधा आसानी से मिल जाती है। सिरोही या उदयपुर की ओर से आने वाले यात्री शिवगंज-सुमेरपुर के रास्ते बीजापुर पहुँच सकते हैं।
  • रेल मार्ग: इस स्थान के सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन जवाई बांध रेलवे स्टेशन है, जो बीजापुर से लगभग 20 किमी की दूरी पर स्थित है। स्टेशन से आगे की यात्रा के लिए यात्री निजी टैक्सी या जीप ले सकते हैं।
  • हवाई मार्ग: हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए निकटतम एयरपोर्ट जोधपुर एयरपोर्ट (लगभग 150 किमी) और उदयपुर एयरपोर्ट (लगभग 140 किमी) हैं। इन हवाई अड्डों से राज्य परिवहन की बसों या टैक्सियों के माध्यम से सुमेरपुर होते हुए बीजापुर पहुँचा जा सकता है।

बीजापुर पहुँचने के बाद, अरावली की पहाड़ियों में स्थित भीमकुंड तक जाने के लिए पैदल रास्तों का उपयोग करना होता है या फिर स्थानीय वाहनों की मदद ली जा सकती है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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