कर्मा पूजा: भादो एकादशी पर आदिवासी परंपरा और प्रकृति के प्रति अटूट आस्था की अनूठी झलक धर्म एक घंटा पहले 5
सरगुजा क्षेत्र में भादो एकादशी के मौके पर कर्मा पूजा का पर्व पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है, जिसमें युवतियां परिवार की सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।

परंपराओं का शहर सरगुजा

सरगुजा अंचल में आज भी आदिवासी और स्थानीय समुदाय अपनी प्राचीन संस्कृति और परंपराओं को संजोए हुए हैं। यहाँ पूर्वजों के समय से चली आ रही कर्मा पूजा की रस्म को आज भी पूरी आस्था के साथ निभाया जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से भादो महीने की एकादशी तिथि को मनाया जाता है, जो खेती और प्रकृति के साथ मानवीय जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है।

अच्छी फसल और सुख-समृद्धि की कामना

कर्मा पूजा का पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह समृद्धि का उत्सव भी है। स्थानीय जानकारों के अनुसार, ग्रामीण इस दिन विशेष रूप से अच्छी धान की फसल, गांव में अमन-चैन और परिवार की खुशहाली के लिए कर्म देवता की प्रार्थना करते हैं। यह त्यौहार मानवता और आस्था का एक अनूठा संगम है, जिसे पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया जा रहा है। कर्मा पूजा में मांझी, मजवार, कंवर, कुम्हार और गोंड समाज सहित कई अलग-अलग समुदाय के लोग पूरी श्रद्धा के साथ सम्मिलित होते हैं।

युवतियों का निर्जला व्रत

इस पर्व की सबसे महत्वपूर्ण रस्म अविवाहित युवतियों द्वारा रखा जाने वाला निर्जला व्रत है। कर्मा पूजा के दिन सुबह से ही युवतियां बिना अन्न और जल ग्रहण किए कठोर व्रत का पालन करती हैं। यह व्रत शाम तक चलता है, जिसमें प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। शाम को स्नान और शुद्धिकरण के बाद, युवतियां पूजा की रस्में पूरी करती हैं।

प्रकृति की पूजा और प्रसाद का महत्व

इस दिन कर्मा पेड़ की डाल को स्थापित कर उसकी विधिवत पूजा की जाती है। पूजा संपन्न होने के बाद प्रसाद वितरण की परंपरा भी कई स्थानों पर निभाई जाती है, जिससे सामाजिक समरसता बढ़ती है। स्थानीय जानकार सिकंदर प्रजापति ने बताया कि यह पर्व हर साल भादो महीने की 11वीं तिथि पर ही मनाया जाता है और ग्रामीण इलाकों में इसे लेकर विशेष उत्साह देखा जाता है। खेती-किसानी से जुड़ा यह त्यौहार प्रकृति और पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने का एक सशक्त माध्यम है, जो आज भी सरगुजा की संस्कृति की पहचान बना हुआ है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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