टमाटर की खेती से पाना चाहते हैं बंपर मुनाफा, तो किसान राजीव से सीखें ये सीक्रेट फॉर्मूला भारत एक महीने पहले 55
टमाटर की खेती में सफलता और अच्छी कमाई के लिए सही तकनीक का होना बेहद जरूरी है। अनुभवी किसान राजीव कुमार सहनी ने 4 महीने में तैयार होने वाली टमाटर की फसल के लिए खास तरीके साझा किए हैं।

टमाटर की उन्नत खेती के लिए तैयारी

आज के दौर में टमाटर की व्यावसायिक खेती करना किसानों के लिए कमाई का एक बड़ा जरिया बन गया है। अगर किसान इसे सही तकनीक और उचित प्रबंधन के साथ करते हैं, तो उन्हें काफी मुनाफा हो सकता है। पिछले 28 वर्षों से टमाटर की खेती के क्षेत्र में सक्रिय अनुभवी किसान राजीव कुमार सहनी ने इस फसल से बंपर पैदावार हासिल करने के लिए अपने अनुभवों को साझा किया है। उनके अनुसार, अच्छी फसल की शुरुआत खेत की तैयारी से होती है। जमीन की निराई-गुड़ाई और गहरी जुताई करना सबसे पहला कदम है। इसके बाद किसान को खेत की मिट्टी में मौजूद नमी का सही आकलन करना चाहिए। यदि मिट्टी में जरूरत से ज्यादा नमी है, तो उसे कुछ दिनों के लिए खुला छोड़ देना चाहिए ताकि नमी का स्तर संतुलित हो जाए। इसके बाद ही आगे की कृषि प्रक्रिया को अपनाना चाहिए।

बीज और खाद का चयन

खेत तैयार हो जाने के बाद, खाद और गुणवत्तापूर्ण बीजों का चयन फसल की सफलता के लिए आधार का काम करता है। किसान राजीव कुमार के अनुसार, खेतों में डीएपी, पोटाश, बोरॉन और जाइम जैसी खादों को संतुलित मात्रा में मिलाकर पूरे खेत में समान रूप से बिखेरना चाहिए। इसके बाद दोबारा जुताई करके खाद को मिट्टी में पूरी तरह मिला देना चाहिए। वे यह भी बताते हैं कि सफल किसान अक्सर सीधे बाजार से पौधे खरीदने के बजाय प्रमाणित कंपनियों के बीज लाकर अपनी नर्सरी में पौधे तैयार करने को प्राथमिकता देते हैं।

बीजों की किस्मों के बारे में बात करते हुए वे बताते हैं कि पहले 1080 यूएस नाम की वैरायटी बहुत लोकप्रिय थी, लेकिन उस कंपनी के बंद होने से अब यह बाजार में नहीं मिलती। वर्तमान में बाजार की मांग और पैदावार के हिसाब से राजा और नामधारी ब्रांड के टमाटर के बीजों को सबसे बेहतर माना जा रहा है।

फसल का चक्र और समय

टमाटर की फसल को पूरी तरह तैयार होने और मंडियों में बिक्री के लिए तैयार होने में लगभग 4 महीने का समय लगता है। नर्सरी से तैयार की गई पौध को जब मुख्य खेत में रोपा जाता है, तो उसके करीब 3 महीने बाद पौधों में फूल आने और फल लगने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। अंत में, चौथे महीने तक टमाटर पूरी तरह पककर तैयार हो जाते हैं। पोषण प्रबंधन के बारे में राजीव बताते हैं कि पौधों की रोपाई के करीब 15 दिन बाद दोबारा खाद का प्रयोग करना चाहिए और साथ ही पानी का छिड़काव भी आवश्यक है। इसके बाद की खाद की मात्रा पौधों की वृद्धि पर निर्भर करती है।

सिंचाई और पोषण में रखें सावधानी

सिंचाई और अतिरिक्त पोषण के मामले में किसान राजीव कुमार एक बहुत ही व्यावहारिक सलाह देते हैं। उनका मानना है कि फसल में पानी या खाद का प्रयोग आंख मूंदकर नहीं करना चाहिए। किसान को पौधों की वास्तविक जरूरत और मिट्टी की स्थिति को देखकर ही निर्णय लेना चाहिए। यदि पौधों का विकास सामान्य गति से हो रहा है और उन्हें अतिरिक्त खाद की जरूरत नहीं है, तो बेवजह खर्च करना पैसे की बर्बादी है। यही बात पानी के लिए भी लागू होती है। अत्यधिक सिंचाई से फसल को लाभ के बजाय भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। यदि किसान इन बातों का ध्यान रखकर अपनी सूझबूझ से फसल का प्रबंधन करें, तो वे निश्चित रूप से शानदार पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। यह तरीका उन्हें बाजार में बेहतर दाम दिलाने में भी सहायक साबित होगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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