राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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विचारों
देश की राजधानी इन दिनों टीएमसी के अब तक के सबसे बड़े राजनीतिक विभाजन की गवाह बनने जा रही है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेलने के बाद लुटियंस दिल्ली में ममता बनर्जी के खिलाफ मानो आखिरी चक्रव्यूह तैयार हो चुका है। रविवार शाम 4 बजे टीएमसी के बागी सांसद एक बेहद अहम और निर्णायक बैठक करने जा रहे हैं, जिसे राजनीतिक हलकों में 'सीक्रेट डिनर डिप्लोमेसी' का नाम दिया जा रहा है।
फिलहाल ममता बनर्जी के साथ सिर्फ 8 वफादार सांसद चट्टान की तरह डटे हुए हैं। मगर पार्टी के सबसे भरोसेमंद और वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय के बागी गुट में जाने की खबर ने टीएमसी को गहरा झटका दिया है। वहीं कल्याण बनर्जी भी बीते कुछ दिनों से अभिषेक बनर्जी को लेकर गेंद ममता बनर्जी के पाले में डाल चुके हैं।
कहां और किसके घर हो रही है बैठक
इन हालात में बागी गुट किसी बड़े ऐलान की तैयारी में है। यह बैठक पहले बागी खेमे का प्रमुख चेहरा बनीं सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तिदार के सरकारी आवास पर तय हुई थी, लेकिन सुरक्षा और भारी राजनीतिक सस्पेंस को देखते हुए ऐन वक्त पर इसका स्थान बदला भी जा सकता है। बैठक में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली में मौजूद ज्यादातर बागी सांसद एक-एक कर पहुंचने लगे हैं।
सबसे वरिष्ठ सांसद का बागी खेमे में जाना
रविवार सुबह जो सबसे बड़ा और चौंकाने वाला दावा सामने आया, उसने कोलकाता से लेकर दिल्ली तक टीएमसी के कोर ग्रुप में हलचल मचा दी है। बागी खेमे का कहना है कि लोकसभा में पार्टी के संसदीय दल के नेता और ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद व वरिष्ठतम सांसद सुदीप बंदोपाध्याय अब बागियों के साथ खड़े हो गए हैं।
सुदीप बंदोपाध्याय का यह कदम ममता बनर्जी के लिए ऐसा आघात माना जा रहा है, जिससे उबरना पार्टी के लिए लगभग नामुमकिन दिख रहा है। ताजा दावों के मुताबिक टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 बागी खेमे से हाथ मिला चुके हैं, जबकि ममता बनर्जी के पास अब महज 8 सांसद ही बचे हैं।
शुभेंदु अधिकारी ने क्यों बनाई दूरी
पहले यह इनपुट था कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी खुद इस डिनर में शामिल होकर बागियों के साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की आखिरी रूपरेखा तैयार करेंगे। लेकिन रणनीतिक सूत्रों के अनुसार ऐन मौके पर उन्होंने इस डिनर से दूरी बना ली। माना जा रहा है कि वे जानबूझकर सीधे तौर पर मौजूद नहीं रहेंगे, ताकि पूरे घटनाक्रम को भाजपा बनाम टीएमसी के बजाय टीएमसी का 'आंतरिक विद्रोह' दिखाया जा सके। आज शाम की बैठक में बागी सांसद लोकसभा के भीतर एक अलग ब्लॉक की मान्यता को लेकर अपनी कानूनी रणनीति पर अंतिम मंथन करेंगे।
सागरिका घोष का तीखा कानूनी हमला
एक तरफ बागी सांसद संसद में अलग समूह बनाने की तैयारी में हैं, तो दूसरी तरफ ममता बनर्जी की वफादार और राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने संविधान की किताब खोलकर उन पर करारा कानूनी वार किया है। उन्होंने साफ कहा है कि बागियों की अलग ब्लॉक की मांग पूरी तरह गैरकानूनी है।
संसद या विधानसभा के भीतर मूल पार्टी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव जीतकर अलग समूह या ब्लॉक बनाने का कोई कानूनी प्रावधान ही नहीं है। भारत के संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दलबदल विरोधी कानून का पैराग्राफ 4 बेहद स्पष्ट है। किसी भी सांसद या विधायक की सदस्यता तभी बच सकती है, जब उनकी मूल पार्टी का किसी अन्य दल में 'विलय' हो जाए। इसके अलावा कोई बीच का रास्ता नहीं है। या तो बागी सांसद किसी नई पार्टी में अपनी सदस्यता का विलय करें या फिर अपनी सांसदी गंवाने के लिए तैयार रहें, वरना सदन में उनका बैठना अवैध माना जाएगा।
स्पीकर से मुलाकात की आखिरी रिहर्सल
कुल मिलाकर शाम 4 बजे होने वाली यह बैठक महज एक डिनर या चर्चा नहीं, बल्कि लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात से पहले की आखिरी रिहर्सल है। अगर सुदीप बंदोपाध्याय और काकोली घोष दस्तिदार के नेतृत्व में ये 20 सांसद एकजुट बने रहते हैं, तो सागरिका घोष के उठाए कानूनी सवालों का जवाब देने के लिए वे किसी अन्य राष्ट्रीय या क्षेत्रीय दल के साथ अपने गुट के विलय की घोषणा आज रात ही कर सकते हैं। बंगाल की राजनीति का ऊंट किस करवट बैठेगा, इसका फैसला दिल्ली की इसी बैठक से तय हो जाएगा।
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