जीवनशैली
2 घंटे पहले
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सूखे हुए गुलाब को दोबारा कैसे जीवित करें
अक्सर घरों की बालकनी, छत या गार्डन में लगे गुलाब के पौधे जब सूखने लगते हैं, तो लोग मायूस होकर उन्हें उखाड़कर फेंक देते हैं। लोग यह मान लेते हैं कि पौधा अब पूरी तरह मर चुका है और इसमें दोबारा जान डालना मुमकिन नहीं है। हालांकि, सच्चाई यह है कि कई बार पौधा पूरी तरह से खत्म नहीं होता, बल्कि उसे बस सही देखभाल और पोषण की दरकार होती है। पत्तियां पीली पड़ना या टहनियों का सूखना इस बात का संकेत हो सकता है कि पौधे को पोषण नहीं मिल पा रहा है। यदि आप सही समय पर कुछ जरूरी उपाय अपना लें, तो वही बेजान दिखने वाला गुलाब कुछ ही हफ्तों में फिर से हरा-भरा होकर खिल सकता है।
सबसे पहले करें खराब टहनियों की छंटाई
गार्डनर राम सागर के मुताबिक, गुलाब के पौधे को पुनर्जीवित करने का पहला और सबसे अहम चरण उसकी ठीक से प्रूनिंग करना है। पौधे की जो टहनियां सूख चुकी हैं, काली पड़ गई हैं या मृत दिखाई दे रही हैं, उन्हें तुरंत काट कर अलग कर दें। ऐसी टहनियां पौधे की ऊर्जा को व्यर्थ में सोखती रहती हैं, जिससे नई और स्वस्थ शाखाओं का विकास रुक जाता है। छंटाई के लिए हमेशा एक साफ और धारदार प्रूनिंग कैंची का इस्तेमाल करें। यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि छंटाई करते समय पौधे की हरी और स्वस्थ टहनियों को कोई नुकसान न पहुंचे। एक बार जब मृत हिस्सा हट जाता है, तो पौधे का ध्यान नई ग्रोथ पर केंद्रित हो जाता है और नई कोंपलें फूटने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
मिट्टी की देखभाल और पोषण
कई बार गुलाब के पौधे के सूखने के पीछे का कारण गमले की सख्त हो चुकी मिट्टी होती है। जब मिट्टी पत्थर की तरह कड़ी हो जाती है, तो हवा और पानी का संचार जड़ों तक नहीं हो पाता, जिससे पौधा अंदर ही अंदर दम तोड़ने लगता है। ऐसी स्थिति में, किसी छोटे गार्डन टूल, खुरपी या लकड़ी की मदद से गमले की ऊपरी मिट्टी को धीरे-धीरे ढीला करें। मिट्टी को नरम करने के बाद, उसमें अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट की एक परत डालें। यह खाद मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है और जड़ों को नई ऊर्जा प्रदान करती है। यदि मिट्टी बहुत पुरानी हो चुकी है और उसमें पोषक तत्व खत्म हो गए हैं, तो गमले की ऊपरी मिट्टी की कुछ परत हटाकर ताजी मिट्टी मिलाना भी एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है।
पानी देने के तरीके में सुधार करें
सूखते हुए गुलाब को देखकर अक्सर माली या घर के सदस्य घबराकर उसे जरूरत से ज्यादा पानी देने लगते हैं, जो एक बहुत बड़ी गलती साबित होती है। अत्यधिक पानी देने से गमले में जलभराव की स्थिति बन जाती है और जड़ें सड़ने लगती हैं, जिससे पौधा और भी तेजी से मरने की ओर बढ़ने लगता है। सिंचाई हमेशा मिट्टी की स्थिति को देखकर ही करनी चाहिए। अगर गमले की ऊपर की मिट्टी सूखी लगे, तभी पानी डालें। बारिश के मौसम में खासतौर पर सावधानी बरतने की जरूरत होती है, क्योंकि इस दौरान वातावरण में नमी अधिक होती है, इसलिए मिट्टी जल्दी नहीं सूखती। पानी का सही संतुलन पौधे को फंगल इन्फेक्शन से भी बचाता है।
धूप और हवा का महत्व
गुलाब एक ऐसा पौधा है जिसे भरपूर धूप की आवश्यकता होती है। यदि आपका गुलाब का पौधा लंबे समय से छायादार या कम रोशनी वाली जगह पर रखा है, तो उसकी ग्रोथ धीमी हो जाएगी और उस पर फूलों का आना बंद हो जाएगा। पौधे को दोबारा हरा-भरा बनाने के लिए उसे रोजाना कम से कम 5 से 6 घंटे की अच्छी धूप दिखाएं। इसके साथ ही, पौधे को ऐसे स्थान पर रखें जहां हवा का आवागमन अच्छा हो। खुली और ताजी हवा पौधे को फंगल बीमारियों से बचाती है और उसे तेजी से रिकवर होने में मदद करती है। यदि आप इन सभी बातों का ध्यान रखते हैं, तो आपका गुलाब का पौधा जल्द ही पहले की तरह फूलों से भर जाएगा।
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