जीवनशैली
एक घंटा पहले
6
विचारों
छत पर बागवानी का बढ़ता चलन
आज के समय में जैसे-जैसे शहरीकरण बढ़ रहा है, घरों के आसपास खेती के लिए जमीन का दायरा सीमित होता जा रहा है। ऐसी स्थिति में घरों की छतें अब बागवानी के लिए एक शानदार विकल्प के रूप में उभर रही हैं। लोग अपनी छत का सही उपयोग करके न केवल ताजी सब्जियां, फल, मसाले बल्कि औषधीय पौधे भी आसानी से उगा रहे हैं। दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के कृषि विभाग ने छत पर बागवानी का एक सफल मॉडल पेश किया है, जहां विभिन्न प्रकार की फसलों का उत्पादन किया जा रहा है। यदि आप भी अपनी छत को गार्डन में बदलना चाहते हैं, तो इसके लिए सही योजना और प्रबंधन बेहद जरूरी है।
धूप और जल निकासी का महत्व
कृषि विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, छत पर बागवानी शुरू करने से पहले सबसे महत्वपूर्ण कदम सही स्थान का चुनाव करना है। आपको ऐसी जगह चुननी चाहिए जहां कम से कम 5 से 7 घंटे की पर्याप्त धूप आती हो। धूप पौधों के प्रकाश संश्लेषण के लिए अनिवार्य है। इसके साथ ही, छत पर जल निकासी यानी ड्रेनेज की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। विशेष रूप से बरसात के मौसम में अतिरिक्त पानी का छत पर जमा होना नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए इसे निकालने की पूरी तैयारी पहले ही कर लेनी चाहिए।
कंटेनर और गमलों का चयन
छत पर बागवानी करते समय अक्सर लोग भारी सीमेंट के गमलों का चुनाव कर लेते हैं, जो गलत है। छत पर वजन कम रखने के लिए आपको हल्के ग्रो बैग और प्लास्टिक के कंटेनरों का उपयोग करना चाहिए। एक बहुत बड़ी गलती जो कई लोग करते हैं, वह है बिना ड्रेनेज वाले बर्तनों का इस्तेमाल। हर कंटेनर में नीचे पर्याप्त छेद होना चाहिए ताकि पानी बाहर निकल सके। यदि कंटेनर में पानी जमा रहेगा, तो जड़ों तक हवा नहीं पहुंचेगी, जिससे जड़ें सड़ सकती हैं और फफूंद का खतरा भी बढ़ जाता है।
मिट्टी का मिश्रण और बुआई की प्रक्रिया
पौधों की बंपर पैदावार के लिए मिट्टी का मिश्रण तैयार करना एक कला है। इसके लिए आप 2 भाग कोकोपीट, 1 भाग वर्मी कंपोस्ट और 1 भाग मिट्टी का सही अनुपात लें। इसे अच्छी तरह मिलाकर कंटेनर में भरें। यदि आप लतर वाले पौधे लगा रहे हैं, तो उन्हें सीधे ग्रो बैग में लगा सकते हैं। वहीं छोटे पौधों के लिए पहले एक नर्सरी तैयार करना बेहतर होता है। लगभग 20 से 25 दिनों के बाद जब छोटे पौधे मजबूत हो जाएं, तो उन्हें मुख्य कंटेनर में ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। याद रखें कि ग्रो बैग के आकार के अनुसार ही पौधों का चुनाव करें।
देखभाल और रोगों से बचाव
पौधे लगाने के बाद ही आपकी जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। समय-समय पर पौधों का निरीक्षण करते रहें। यह देखते रहें कि कहीं पानी की मात्रा अधिक तो नहीं हो रही है। यदि पत्तियों का रंग पीला पड़ रहा है, तो समझ लें कि पौधे को पोषक तत्वों या पानी की कमी या अधिकता का सामना करना पड़ रहा है। यदि किसी बीमारी का लक्षण दिखे, तो तुरंत उचित दवाइयों का प्रयोग करें। फल देने वाले पौधों के लिए वर्मी कंपोस्ट और नीम की खली का नियमित उपयोग करना बहुत फायदेमंद साबित होता है।
हार्वेस्टिंग और फसल प्रबंधन
जब पौधों में फल लगने शुरू हो जाएं, तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि जैसे ही फल पूरी तरह से मैच्योर हो जाएं, उन्हें तुरंत तोड़ लेना चाहिए। समय पर हार्वेस्टिंग करने से अगले आने वाले फल स्वस्थ और अधिक संख्या में होते हैं। हमेशा ऐसे पौधों का चयन करें जिनकी जड़ें बहुत अधिक गहराई तक नहीं जाती हैं और जो सीमित जगह यानी कंटेनर में आसानी से पनप सकते हैं। छत पर बागवानी का कंटेनर केवल पौधे को सहारा देने के लिए नहीं है, बल्कि उसका आकार और सामग्री सीधे तौर पर पौधे की विकास दर को प्रभावित करते हैं।
Comments
0 comment