त्वचा की समस्याओं से छुटकारा दिलाएगा हाइड्रा ट्रीटमेंट, जानिए डॉक्टर से इसकी पूरी प्रक्रिया और फायदे जीवनशैली 11 घंटे पहले 4
चंदौली की डॉक्टर रिद्धी पांडे ने हाइड्रा ट्रीटमेंट की बारीकियों को साझा करते हुए बताया कि कैसे यह सुरक्षित प्रक्रिया त्वचा के दाग-धब्बों और मुंहासों को ठीक करने में मदद करती है।

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, बढ़ते प्रदूषण और खराब जीवनशैली के कारण त्वचा से जुड़ी परेशानियां बहुत आम हो गई हैं। चेहरे पर मुंहासे (पिंपल्स), दाग-धब्बे और बेजान त्वचा जैसी समस्याओं से लोग काफी परेशान रहते हैं और इनसे छुटकारा पाने के लिए तरह-तरह के उपायों और इलाज का सहारा लेते हैं। इन्हीं आधुनिक इलाजों में से एक है हाइड्रा ट्रीटमेंट, जिसे लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल और डर रहते हैं। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले की त्वचा विशेषज्ञ डॉक्टर रिद्धी पांडे ने लोकल 18 से बातचीत में इस हाइड्रा ट्रीटमेंट की पूरी प्रक्रिया और इसके फायदों के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है।

हर मरीज के लिए अलग होती है इलाज की प्रक्रिया

डॉक्टर रिद्धी पांडे ने बताया कि जब बात त्वचा की देखभाल की आती है, तो हर किसी की त्वचा का प्रकार और उसकी समस्याएं अलग होती हैं। यही वजह है कि हाइड्रा ट्रीटमेंट की प्रक्रिया सभी मरीजों के लिए एक जैसी नहीं हो सकती। डॉक्टर मरीज की त्वचा की संवेदनशीलता, उसकी मुख्य समस्या और बीमारी की गंभीरता की बारीकी से जांच करते हैं और उसी के अनुसार इलाज का खाका तैयार करते हैं। इस इलाज की एक खास बात यह भी है कि हाइड्रा ट्रीटमेंट के साथ-साथ होम्योपैथिक दवाओं का भी इस्तेमाल किया जाता है। इस दौरान पूरा ध्यान इस बात पर रहता है कि त्वचा की बाहरी सफाई करने के साथ-साथ मरीज की जरूरत के हिसाब से जरूरी औषधियां अंदरूनी तौर पर काम कर सकें।

लगभग डेढ़ घंटे का होता है पूरा सेशन

अक्सर लोगों को लगता है कि त्वचा से जुड़े इस तरह के ट्रीटमेंट में बहुत दर्द या बेचैनी होती है, लेकिन डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि यह एक बेहद आरामदायक प्रक्रिया है। हाइड्रा ट्रीटमेंट का पूरा प्रोसेस लगभग 1 से 1.5 घंटे तक चल सकता है। इस अवधि के दौरान मरीज को पूरी तरह से तनावमुक्त और आरामदायक माहौल देने पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। इस प्रक्रिया में सबसे पहले त्वचा की गहराई से सफाई की जाती है और इसके बाद मुख्य समस्या वाले हिस्सों पर विशेष ध्यान देते हुए काम किया जाता है। सफाई और उपचार के बाद, त्वचा की आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त दवाओं का प्रयोग किया जाता है ताकि मरीज को इसका पूरा लाभ मिल सके।

समस्या के स्तर पर निर्भर करते हैं इलाज के सेशन

इलाज के लिए मरीज को क्लीनिक के कितने चक्कर लगाने होंगे, यह पूरी तरह से उनकी त्वचा की स्थिति पर निर्भर करता है। डॉक्टर रिद्धी पांडे के अनुसार, सेशन का निर्धारण इस प्रकार किया जाता है:

  • यदि त्वचा की समस्या शुरुआती चरण में है या काफी हल्की है, तो केवल दो सेशन में ही बेहतर परिणाम देखने को मिल जाते हैं।
  • यदि समस्या पुरानी है या बहुत अधिक बढ़ चुकी है, तो मरीज को 3 या उससे अधिक सेशन लेने की आवश्यकता पड़ सकती है।

डॉक्टर ने यह भी बताया कि दो सेशन के बीच कितना समय अंतराल रखा जाएगा, यह भी मरीज की स्थिति और उनकी सुविधा को देखकर तय किया जाता है। विशेष रूप से जो मरीज दूर-दराज के इलाकों से इलाज के लिए आते हैं, उनकी सुविधा का पूरा ध्यान रखते हुए सेशन के बीच उचित अंतराल तय किया जाता है।

क्या इस ट्रीटमेंट के कोई दुष्प्रभाव हैं?

सुरक्षा और साइड इफेक्ट्स से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए डॉक्टर रिद्धी पांडे ने बताया कि यह पूरी तरह से एक सुरक्षित प्रक्रिया है। इसमें त्वचा पर किसी भी तरह के कॉस्मेटिक या केमिकल प्रोडक्ट का जबरन इस्तेमाल नहीं किया जाता है, बल्कि सब कुछ मरीज की वास्तविक जरूरत के हिसाब से ही तय होता है। हालांकि, उन्होंने यह सलाह भी दी कि किसी भी तरह का स्किन ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले एक बार विशेषज्ञ डॉक्टर से अपनी त्वचा की जांच जरूर करा लेनी चाहिए ताकि सही मार्गदर्शन मिल सके।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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