बरसात के मौसम में घर में घुस रहे हैं कीड़े-मकोड़े? अपनाएं ये असरदार देसी नुस्खे, मिनटों में हो जाएंगे गायब जीवनशैली एक महीने पहले 58
मानसून के समय रोशनी की ओर आकर्षित होकर घर में घुसने वाले उड़ने वाले कीड़ों और पंख वाली चींटियों से छुटकारा पाने के लिए मधुबनी के स्थानीय लोगों ने बेहद असरदार और पारंपरिक घरेलू नुस्खे बताए हैं।

भारत में मानसून का मौसम जहां चिलचिलाती गर्मी से राहत देता है, वहीं अपने साथ कई तरह की परेशानियां भी लेकर आता है। इस मौसम में चारों तरफ हरियाली छा जाती है, लेकिन इसके साथ ही घर में छोटे-छोटे उड़ने वाले कीड़े-मकोड़ों और पंख वाली चींटियों का आतंक भी शुरू हो जाता है। विशेष रूप से ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में, जहां घरों के आसपास पेड़-पौधे और पानी का भराव अधिक होता है, वहां शाम होते ही यह समस्या बेहद गंभीर रूप ले लेती है। जैसे ही घरों में बिजली के बल्ब जलाए जाते हैं, सैकड़ों कीड़े रोशनी की तरफ आकर्षित होकर वहां जमा हो जाते हैं।

इन कीड़ों की वजह से न केवल घर में गंदगी फैलती है, बल्कि इनसे एक अजीब तरह की दुर्गंध भी आने लगती है। इसके अलावा, भोजन में इनके गिरने या सोते समय कान और नाक में घुसने का डर हमेशा बना रहता है। इस बड़ी परेशानी से निपटने के लिए बाजार में मिलने वाले रासायनिक स्प्रे कई बार सेहत के लिए हानिकारक साबित होते हैं। ऐसे में हमारे पूर्वजों और बुजुर्गों द्वारा आजमाया गया पारंपरिक घरेलू नुस्खा बेहद सुरक्षित और असरदार साबित होता है। बिहार के मधुबनी जिले के रहने वाले स्थानीय निवासियों, बिमला देवी और देवेंद्र ने कुछ ऐसे ही पारंपरिक और देसी नुस्खे साझा किए हैं, जिनकी मदद से इन कीड़ों को मिनटों में घर से भगाया जा सकता है।

शाम होते ही घरों में क्यों बढ़ जाता है कीड़ों का जमावड़ा?

बरसात के दिनों में मौसम का मिजाज लगातार बदलता रहता है। लगातार होने वाली बारिश के कारण जमीन के अंदर रहने वाले कई तरह के कीड़े और चींटियां बाहर आ जाती हैं। चूंकि चारों तरफ पानी भरा होता है और नई घास व जंगली पौधे उग आते हैं, इसलिए इन जीवों की संख्या तेजी से बढ़ती है। शाम के समय जब घरों में रोशनी की जाती है, तो प्रकाश की तरंगें इन उड़ने वाले कीड़ों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।

रोशनी के पास पहुंचते ही ये कीड़े झुंड बना लेते हैं और पूरे घर में फैल जाते हैं। सबसे बड़ी चिंता इस बात की होती है कि ये कीड़े रात के समय भोजन या पीने के पानी में न गिर जाएं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों के कान में इनके घुसने का डर भी माता-पिता को परेशान करता है। ऐसे में रसायनों के बजाय घरेलू उपायों का उपयोग करना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

कीड़े-मकोड़ों से मुक्ति पाने के लिए आजमाएं ये देसी नुस्खे

मधुबनी की बिमला देवी और देवेंद्र के अनुसार, सदियों से चले आ रहे कुछ आसान उपायों को अपनाकर इन कीड़ों से तुरंत राहत पाई जा सकती है। इसके लिए आपको किसी महंगे उत्पाद को खरीदने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि घर में मौजूद चीजों से ही काम चल जाता है। आइए जानते हैं इन असरदार घरेलू उपायों के बारे में:

  • शाम को धुआं करना: शाम के समय जब कीड़े घर में प्रवेश करने लगते हैं, तब घर के मुख्य दरवाजों और खिड़कियों के आसपास थोड़ा सा धुआं कर देना चाहिए। धुएं के कारण कीड़े घर के अंदर प्रवेश नहीं कर पाते और बाहर ही रहते हैं।
  • लाह और धूमन जलाना: पारंपरिक रूप से गांवों में कीड़ों को भगाने के लिए लाह और धूमन का इस्तेमाल किया जाता है। इन्हें किसी छोटे बर्तन में रखकर जलाने से निकलने वाला धुआं और गंध कीड़ों को तुरंत दूर भगा देती है।
  • खइर का उपयोग: खइर, जो कि सरसों या राय का तेल निकालने के बाद बचा हुआ सूखा भाग यानी खली होती है, उसे जलाने से भी बहुत तीखा धुआं निकलता है। यह धुआं पंख वाली चींटियों और उड़ने वाले कीड़ों के लिए काल साबित होता है।
  • सूखी लाल मिर्च जलाना: यदि घर में कीड़ों का हमला बहुत ज्यादा हो गया है, तो सूखी लाल मिर्च को आग पर रखकर थोड़ा सा धुआं करें। इसकी तीखी गंध से कीड़े-मकोड़े एक मिनट भी कमरे में नहीं टिक पाएंगे।
  • नीम की पत्तियों का धुआं: नीम को प्राकृतिक कीटनाशक माना जाता है। नीम की सूखी पत्तियों को जलाकर उसका धुआं पूरे घर में घुमाने से न केवल उड़ने वाले कीड़े भागते हैं, बल्कि मच्छर और मक्खियां भी दूर रहती हैं।
  • बल्ब के पास हरी डालियां रखना: एक बहुत ही अनोखा और कारगर नुस्खा यह है कि जहां भी बिजली का बल्ब जल रहा हो, उसके ठीक पास फूलों की हरी डाली, बांस की डाली या नीम की पत्तियां लटका दें। इससे कीड़े बल्ब के पास इकट्ठा होने के बजाय वहां से दूर चले जाते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी क्यों भरोसेमंद हैं ये बुजुर्गों के उपाय?

आज के आधुनिक युग में भले ही बाजार में कई तरह के लिक्विड और स्प्रे उपलब्ध हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग इन पारंपरिक तरीकों पर ही सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि ये उपाय पूरी तरह से प्राकृतिक और रसायन मुक्त होते हैं। रासायनिक दवाओं के छिड़काव से बच्चों और पालतू जानवरों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है, जबकि देसी नुस्खे पूरी तरह सुरक्षित होते हैं।

इसके अलावा, ये नुस्खे बेहद किफायती हैं और इनके लिए कोई अतिरिक्त खर्च करने की आवश्यकता नहीं होती। इस मानसून सीजन में यदि आप भी अपने घर में उड़ने वाले कीड़ों और दुर्गंध से परेशान हैं, तो बिमला देवी और देवेंद्र द्वारा बताए गए इन आसान और सुरक्षित दादी-नानी के नुस्खों को जरूर आजमाएं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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