दिल्ली के स्कूल में 9 साल की बच्ची की मौत, पिता का दर्द- फीस लेने में अव्वल, मदद में फिसड्डी साबित हुआ प्रबंधन क्राइम एक घंटा पहले 4
दिल्ली के पांडव नगर इलाके के एक निजी स्कूल में 9 साल की छात्रा की हार्ट अटैक से मौत के बाद उसके पिता ने प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। पिता का कहना है कि स्कूल के पास न तो आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं थीं और न ही उन्होंने बच्ची को समय पर सही अस्पताल पहुँचाया।

स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही के गंभीर आरोप

दिल्ली के पांडव नगर में स्थित एक निजी स्कूल में 9 साल की मासूम बच्ची की अचानक हुई मौत ने शिक्षा व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दुखद घटना के बाद बच्ची के पिता विकास का दर्द छलक पड़ा है। उनका आरोप है कि स्कूल प्रशासन का एकमात्र उद्देश्य केवल समय पर फीस वसूलना है, लेकिन सुरक्षा और स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील मामलों में स्कूल पूरी तरह से लापरवाह साबित हुआ है। विकास का कहना है कि जब उनकी बेटी की जान पर बन आई, तो स्कूल परिसर में किसी भी तरह का बुनियादी मेडिकल सेटअप या डॉक्टर तक मौजूद नहीं था।

घटनाक्रम और पिता का सवाल

पीड़ित पिता विकास ने बताया कि उन्हें सुबह 9:18 बजे स्कूल से फोन आया कि उनकी बेटी अचानक गिर गई है। इसके बाद बच्ची को मलिक हेल्थ केयर ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। विकास के मन में अब यह बड़ा सवाल है कि जब बच्ची स्कूल में गिरी थी, तो उसे तुरंत पास के लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल ले जाने के बजाय दूर मलिक हेल्थ केयर क्यों ले जाया गया? उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन ने इस पूरे मामले में संवेदनहीनता दिखाई है।

मेडिकल मदद में देरी का आरोप

विकास ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि अगर बच्ची को समय रहते उचित प्राथमिक उपचार या सीपीआर (CPR) जैसी जीवन रक्षक सुविधाएं दी जातीं, तो शायद उसे बचाया जा सकता था। स्कूल में कोई डॉक्टर न होना और मेडिकल के नाम पर कोई इंतजाम न होना, प्रबंधन की बड़ी विफलता को दर्शाता है। पिता ने आगे कहा कि इतना बड़ा स्कूल संचालित किया जा रहा है, लेकिन प्राथमिक चिकित्सा के लिए एक मेडिकल स्टोर या डॉक्टर तक वहां उपलब्ध नहीं है। स्कूल ने बच्ची को लक्ष्मी नगर के भारी ट्रैफिक वाले रास्ते से दूर के अस्पताल भेजा, जबकि नजदीकी अस्पताल में उपचार संभव था।

फीस के लिए दबाव, सुरक्षा में कोताही

बच्ची के पिता ने यह भी उल्लेख किया कि स्कूल अक्सर फीस में देरी होने पर अभिभावकों को परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ता, लेकिन जब बच्चे की सुरक्षा का सवाल आया तो स्कूल के किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति ने उनके साथ खड़े होने की जहमत नहीं उठाई। अस्पताल में मिली जानकारी के अनुसार बच्ची को मृत अवस्था में ही लाया गया था। पिता का यह दर्दनाक सवाल बना हुआ है कि स्कूल प्रशासन ने आखिर किस आधार पर मलिक अस्पताल ले जाने का फैसला लिया और कौन से प्रोटोकॉल का पालन किया गया? पिता अब इस पूरे घटनाक्रम की गहन जांच की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में किसी अन्य बच्चे को इस तरह की लापरवाही का शिकार न होना पड़े।

सान्वी राणा पाबना के क्राइम एवं राज्य रिपोर्टर हैं, जो अपराध और विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें कवर करते हैं। कानून-व्यवस्था, जांच और बड़ी आपराधिक घटनाओं की वे जिम्मेदार रिपोर्टिंग करते हैं। तथ्यों की पुष्टि और संवेदनशीलता उनके काम की पहचान हैं।

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